Fact Check: राष्ट्रपति नहीं भरते इनकम टैक्स? जानें क्या कहते हैं भारत सरकार के नियम
नई दिल्ली, 2 जुलाई: हाल ही में राष्ट्रपति रामनाथ गोविंद उत्तर प्रदेश के कानपुर में स्थित अपने पैतृक गांव गए थे। उस दौरान उन्होंने लोगों से टैक्स भरने की अपील की। साथ ही बताया कि वो देश में सरकारी महकमे के हिसाब से सबसे ज्यादा सैलरी पाते हैं, लेकिन उनकी 5 लाख की सैलरी में से 2.75 लाख टैक्स चला जाता है। ऐसे में देखा जाए तो उनके अधिकारी उनसे ज्यादा कमाते हैं। इसके बाद कांग्रेस समेत कई दलों ने उनके इस बयान की निंदा की। साथ ही दावा किया कि राष्ट्रपति की कमाई पर किसी तरह का टैक्स नहीं लगता है।

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वहीं जब वनइंडिया की टीम ने इस दावे की पड़ताल की तो हकीकत कुछ और ही निकली। द प्रेसिडेंट (एमोल्यूमेंट) एंड पेंशन एक्ट 1951 के मुताबिक राष्ट्रपति को वेतन देश की संचित निधि (Consolidated Fund) से दिया जाता है। इसके अलावा 2017 में उनका वेतन 1.7 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दिया गया था। ऐसे में सर्वोच्च अदालत के फैसले पर नजर डालें, तो धारा 14 (हेड ऑफ इनकम) और धारा 10 (कुल आय में शामिल नहीं होने वाली आय) की व्याख्या करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि कोई भी आय जो विशेष रूप से लागू कानून के तहत आयकर से मुक्त नहीं है, उसे कर योग्य माना जाता है।
वहीं आयकर अधिनियम और द प्रेसिडेंट (एमोल्यूमेंट) एंड पेंशन एक्ट 1951 भी राष्ट्रपति के वेतन में आयकर की छूट नहीं देते हैं। ऐसे में साफ है कि राष्ट्रपति भी टैक्स भरते हैं। अगर स्वैच्छिक समर्पण (टैक्स की छूट) अधिनियम, 1961 के तहत राष्ट्रपति अपना वेतना संचित निधि में ही डाल देते हैं, तो वो टैक्स देने से बच सकते हैं। ये छूट उन सभी लोगों के लिए है, जो संचित निधि से अपना वेतन प्राप्त कर रहे हैं।

Fact Check
दावा
राष्ट्रपति नहीं भरते हैं टैक्स
नतीजा
ऐसा कोई प्रावधान नहीं, राष्ट्रपति भी भरते हैं टैक्स












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