Fact Check: वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन के अफसरों को मिली सजा? जानें वायरल ट्वीट का सच
सोशल मीडिया पर एक ट्वीट तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन बनाने वाले हर एक अधिकारी को सजा दी गई है।

Vande Bharat Express Fact Check: देश की सेमी हाई स्पीड ट्रेन वंदे भारत एक्सप्रेस अपनी सुविधाओं और स्पीड को लेकर जमकर सुर्खियों में हैं। देश के अलग-अलग शहरों में इस ट्रेन का लगातार विस्तार किया जा रहा है। लोग भी खूब इस ट्रेन में सफर का आनंद ले रहे हैं। इस बीच सोशल मीडिया पर एक ट्वीट तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन बनाने वाले हर एक अधिकारी को सजा दी गई है। ऐसे में क्या इस वायरल ट्वीट का सच, जानिए....
एक-एक अधिकारी को दी गई सजा !
भारतीय रेलवे अपनी ट्रेनों को लेकर अपग्रेड हो रहा है। अब ट्रेनें तय समय पर स्टेशन पहुंचती है और स्टेशन पर भी यात्रियों के लिए सुविधाओं को पहले से बेहतर किया जा रहा है। ऐसे में वायरल ट्वीट में दावा करते हुए लिखा गया है कि "भारत में इस अद्भुत ट्रेन को बनाने वाले हर एक अधिकारी को सजा दी गई है। टीम के हर एक सदस्य को परेशान किया गया। उन्होंने भ्रष्टाचार के लिए जांच की। भ्रष्टाचारियों द्वारा। रेलवे के भ्रष्ट अधिकारियों ने इस ट्रेन को बनाने वाले ईमानदार इंजीनियरों की जांच की और उन्हें नवाचार के लिए दंडित किया है।"
PIB Fact Check ने बताई सच्चाई
वायरल ट्वीट के मुताबिक बिना वजह वंदे भारत बनाने वाली टीम के सदस्यों पर भ्रष्टाचार के मामले दर्ज किए गए और उनसे पूछताछ की गई। अब इस वायरल ट्वीट को लेकर प्रेस इंफोर्मेशन ब्यूरो (PIB) ने इसकी सच्चाई बताई है। पीआईबी फैक्ट चैक ने इसकी सच्चाई बताते हुए ट्वीट किया है, जिसमें उन्होंने लिखा-एक ट्वीट में दावा किया गया है कि #VandeBharat Express को बनाने वाले हर एक अधिकारी को सजा दी गई है। ये दावा फर्जी है। मामले में किसी अधिकारी को सजा नहीं हुई है।
गौरतलब है कि वंदे भारत एक्सप्रेस भारत की हाई स्पीड ट्रेनों में से एक है, जिसे 15 फरवरी 2019 में वाराणसी से नई दिल्ली के बीच शुरू किया गया था। अब तक यह देशभर में अलग-अलग रेल मार्ग पर कुल 10 वंदे भारत एक्सप्रेस चल रही है।

Fact Check
दावा
एक ट्वीट में दावा किया गया है कि Vande Bharat Express को बनाने वाले हर एक अधिकारी को सजा दी गई है।
नतीजा
पीआईबी फैक्ट चेक ने इस दावों को पूरी तरह से झूठा बताया है।












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