फैक्ट चेक: सरकार ने रद्द नहीं किया PC&PNDTC एक्ट, गर्भ का लिंग परीक्षण आज भी है गैरकानूनी
नई दिल्ली। भारत में गर्भ में पल रहे बच्चे का लिंग परीक्षण कराना गैरकानूनी है। अगर कोई ऐसा करता पाया जाता है तो उसके खिलाफ कड़े कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। लेकिन हाल ही में सामने आई एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि स्वास्थ्य मंत्रालय ने लिंग परीक्षण पर प्रतिबंध लगाने वाले कानून पीसी एंड पीएनडीटीसी (पूर्व गर्भाधान और प्री नेटल डायग्नोस्टिक तकनीक) एक्ट 1994 को निलंबित कर दिया है। हालांकि यह रिपोर्ट झूठी है, स्वास्थ्य मंत्रालय ने खुद इसका खंडन किया है।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपने एक स्पष्टीकरण में कहा कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार (MoHFW) ने गर्भधारण करने से पहले या बाद में बच्चे का लिंग चयन करने पर प्रतिबंध लगाने वाले पीसी एंड पीएनडीटी अधिनियम को रद्द नहीं किया है। बता दें कि पूर्व गर्भाधान और प्रसव पूर्व निदान तकनीक (PCPNDT) अधिनियम, 1994 भारत में कन्या भ्रूण हत्या और गिरते लिंगानुपात को रोकने के लिए भारत की संसद द्वारा पारित एक संघीय कानून है। इस अधिनियम से प्रसव पूर्व लिंग निर्धारण पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।
झूठी रिपोर्ट में ये दावा किया गया है कि कोरोना वायरस के चलते लॉकडाउन में मद्देनजर पीसी एंड पीएनडीटी एक्ट को 1996 के तहत कुछ प्रावधानों को स्थगित कर दिया है जिसके सिलसिले में 4 अप्रैल, 2020 को अधिसूचना जारी की गई थी। रिपोर्ट में ऐसा भी कहा गया है कि लॉकडाउन के दौरान पंजीकरण के नवीनीकरण के लिए ये नियम लागू होते हैं, महीने के 5 वें दिन निदान केंद्रों द्वारा रिपोर्ट प्रस्तुत करना और राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों द्वारा त्रैमासिक प्रगति रिपोर्ट (क्यूपीआर) प्रस्तुत करना।
रिपोर्ट में कहा गया है कि सभी अल्ट्रासाउंड क्लिनिक, जेनेटिक काउंसलिंग सेंटर, जेनेटिक लेबोरेटरी, जेनेटिक क्लिनिक और इमेजिंग सेंटर को कानून के तहत निर्धारित दिन के आधार पर सभी अनिवार्य रिकॉर्ड बनाए रखने होंगे। यह केवल संबंधित प्राधिकृत अधिकारियों को प्रस्तुत करने की समय सीमा है जिसे 30 जून, 2020 तक बढ़ाया गया है। पीसी और पीएनडीटी अधिनियम के प्रावधानों के अनुपालन से कोई छूट (निदान केंद्रों को) नहीं है।
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