Fact Check: ऊंची जातियों के खिलाफ हिंसा नहीं भड़का रहे थे पीएम मोदी, वीडियो तोड़-मरोड़कर किया वायरल

नई दिल्ली, 24 अगस्त: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक बयान की क्लिप इन दिनों सोशल मीडिया पर जमकर शेयर की जा रही है, जिसको लेकर दावा किया जा रहा है कि पीएम मोदी ने अपने बयान के जरिए निचली जाति के लोगों को ऊंची जातियों से बदला लेने के लिए उकसा रहे हैं। इस वीडियो को जमकर फेसबुक, ट्विटर पर शेयर किया जा रहा है, जानिए क्या है इस वीडियो की सच्चाई?

PM Modi

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वायरल वीडियो क्लिप में कहते हुए सुना जा सकता है कि, "जिसका बचपन अन्याय, अत्याचार और उत्पीड़न देखा है; जिसने अपनी मां को अपनी आंखों के सामने अपमानित होते देखा हो। मुझे बताइए, अगर ऐसे व्यक्ति को मौका मिल जाए तो हिसाब चुकता करेगा कि नहीं करेगा? तालियों के बाद वीडियो में पीएम मोदी को आगे कहते हुए देखा गया, "तुम मुझे पानी नहीं भरने देते थे, तुझ मुझे मंदिर नहीं जाने देते थे। तुम मेरे बच्चों को स्कूल में एडमिशन देने से मना करते थे।"

इस वीडियो को ट्विटर और फेसबुक पर व्यंग्यात्मक कैप्शन के साथ साझा किया गया था, जिसमें पीएम को उच्च जाति समूहों के खिलाफ लोगों को भड़काने का आरोप लगाया, लेकिन इस वीडियो और बयान की हकीकत कुछ और है। फैक्ट चेक में जब इस वीडियो के बारे में पड़ताल की गई तो जांच में पाया गया कि क्लिप की मूल भावना से छेड़छाड़ की गई है। पूरे भाषण से एक बयान काटकर वायरल कर दिया गया, पीएम मोदी यहां भीमराव अंबेडकर के बारे में बात कर रहे थे।

21 मार्च 2016 को पीएम मोदी ने नई दिल्ली के विज्ञान भवन में डॉ. बीआर अंबेडकर राष्ट्रीय स्मारक की आधारशिला रखने के लिए आयोजित कार्यक्रम में भाषण दिया था। पूरा भाषण 47 मिनट से ज्यादा लंबा है। वायरल क्लिप इस भाषण के 36 मिनट के आसपास से काटकर वायरल की गई है।

सच्चाई यह है कि जैसे ही भाषण का वायरल हिस्सा खत्म होता है, वहां से पीएम मोदी आगे कहते हैं कि "आम लोगों के लिए इस तरह सोचना सामान्य है। लेकिन बाबा साहेब अम्बेडकर जैसे महान व्यक्ति के लिए ऐसा नहीं था। जब उनके हाथ में सत्ता थी तो संविधान का मसौदा तैयार करने के लिए उनके हाथ में एक कलम थी। आपको उनकी पूरी संसद की बहस या भाषणों में एक भी उदाहरण नहीं मिलेगा, जहां उन्होंने किसी शब्द या वाक्य का इस्तेमाल दूसरों को चोट पहुंचाने के लिए किया हो या वह कभी प्रतिशोधी रहे हों।" ऐसे में सोशल मीडिया पर वायरल किया जा रहा वीडियो झूठी जानकारी के साथ शेयर किया जा रहा है।

Fact Check

दावा

एक वीडियो के जरिए दावा किया जा रहा है कि पीएम मोदी निचली जाति के लोगों को ऊंची जातियों से बदला लेने के लिए उकसा रहे हैं।

नतीजा

वायरल वीडियो का एक अधूरा हिस्सा काटकर वायरल किया गया है, जिसमें पीएम मोदी का अधूरा बयान है।

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