Fact Check: क्या बीजापुर मुठभेड़ में जान गंवाने वाले जवानों को शहीद का दर्जा नहीं देगी सरकार?
नई दिल्ली: छत्तीसगढ़ के सुकमा और बीजापुर में बीते शनिवार को नक्सिलयों के खिलाफ एक ऑपरेशन शुरू किया गया। इस दौरान हुई मुठभेड़ में 23 जवान शहीद हो गए। इसके बाद से सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल की जा रही है। जिसमें ये कहा जा रहा कि केंद्र सरकार ने बीजापुर हमले में मारे गए जवानों को शहीद का दर्ज देने से इनकार कर दिया है। कई लोगों ने इस पोस्ट को पढ़कर सरकार के प्रति अपना गुस्सा जाहिर किया है।

मनफूल सिंह नाम के एक यूजर ने लिखा कि क्या बीजापुर में नक्सली हमले में शहीद हुए सीआरपीएफ के कोबरा कमांडो को शहीद का दर्जा भी नहीं दे सकती है देश की सरकार? ये तो देश के जवानों के साथ शहीदों का इतना बड़ा अपमान है। शर्म आती है ऐसी सरकार पर जो पता नहीं किस-किस को शहीद मान लेती है, लेकिन देश की रक्षा करने वाले जवानों को शहीद नहीं मनाती। इसके साथ उन्होंने एक खबर का स्क्रीनशॉट शेयर किया है, जिसमें लिखा है कि केंद्र ने हाईकोर्ट से कहा-अर्धसैनिकों को नहीं मिल सकता है शहीद का दर्जा।
इस मामले की पड़ताल करने पर हकीकत कुछ और ही निकली। दरअसल 2015 में दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी। जिसमें पूछा गया था कि सरकार किन जवानों को शहीद मानती है। जिस पर सरकार ने कहा कि उनकी ओर से 'शहीद' शब्द का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। जिन जवानों का निधन ऑपरेशन के दौरान होता है उनके परिवार को मुआवजा और पेंशन देने का प्रवाधान है। बीजापुर हमले के बाद सरकार की ओर से ऐसा कोई बयान नहीं आया, ऐसे में ये बात साफ है कि जो पोस्ट अब वायरल की जा रही है वो पूरी तरह से छूट है। केंद्र के अलावा राज्य सरकारों ने भी शहीदों के परिजनों को मदद दी है।

Fact Check
दावा
बीजापुर में जान गंवाने वालों को शहीद का दर्जा नहीं
नतीजा
वायरल हो रही पोस्ट गलत है, सरकार ने नहीं जारी किया ऐसा बयान












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