फैक्ट चेक: क्या प्रधानमंत्री ने लॉकडाउन बढ़ाने से पहले कोविड-19 टास्क फोर्स से सलाह नहीं ली? जानिए सच्चाई
नई दिल्ली। देश में कोरोना वायरस (कोविड-19) को नियंत्रित करने के लिए लॉकडाउन 3 मई तक बढ़ा दिया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बात की घोषणा मंगलवार को देश को संबोधित करते हुए की थी। इस बीच लॉकडाउन से जुड़ी कुछ गलत खबरें भी सामने आई हैं। एक समाचार पत्रिका ने इस बात का दावा किया है कि प्रधानमंत्री मोदी ने लॉकडाउन बढ़ाने से पहले कोविड-19 के 21 सदस्यीय वैज्ञानिकों के टास्क फोर्स से परामर्श नहीं किया था। आपको बता दें पत्रिका का ये दावा पूरी तरह गलत है। इसकी पुष्टि पीआईबी ने खुद की है।

पीआईबी इंडिया ने अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा, 'दावा- एक समाचार पत्रिका द्वारा दावा किया जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लॉकडाउन बढ़ाने से पहले कोविड-19 के 21 सदस्यीय वैज्ञानिकों के टास्क फोर्स से परामर्श नहीं किया था। वास्तविकता- सभी निर्णय टास्क फोर्स से सलाह लेने के बाद लिए गए हैं।' इसके साथ ही इस मामले में भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) ने भी ट्वीट किया है।
आईसीएमआर ने ट्वीट कर कहा, 'एक मीडिया रिपोर्ट में कोविड-19 टास्क फोर्स को लेकर झूठा दावा किया जा रहा है। वास्तविकता यह है कि पिछले महीने में 14 बार टास्क फोर्स ने मुलाकात की है और सभी फैसलों में टास्क फोर्स के सदस्य शामिल होते हैं। कृपया ऐसी अफवाहों से बचें।'
देश के नाम संबोधन में पीएम मोदी ने कहा था, कई राज्यों ने लॉकडाउन को बढ़ाने का फैसला किया। अब ये तय किया गया है कि भारत में लॉकडाउन को 3 मई तक और बढ़ाना पड़ेगा। अगले एक सप्ताह में कोरोना के खिलाफ लड़ाई में कठोरता और ज्यादा बढ़ाई जाएगी। 20 अप्रैल तक हर कस्बे, हर थाने, हर जिले, हर राज्य को परखा जाएगा, वहां लॉकडाउन का कितना पालन हो रहा है, उस क्षेत्र ने कोरोना से खुद को कितना बचाया है, ये देखा जाएगा। जो क्षेत्र इस अग्निपरीक्षा में सफल होंगे, जो Hotspot में नहीं होंगे, और जिनके Hotspot में बदलने की आशंका भी कम होगी, वहां पर 20 अप्रैल से कुछ जरूरी गतिविधियों की अनुमति दी जा सकती है।












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