Fact Check: क्या 1 जुलाई से बदलने वाले हैं रेलवे के नियम? जानें हकीकत
नई दिल्ली, जून 22: कई राज्यों द्वारा कोविड प्रतिबंधों में ढील देने के बाद लोग ने घूमने या यात्राओं की योजना बनानी शुरू कर दी है। वहीं कुछ सोशल मीडिया यूजर्स की माने तो भारतीय रेलवे यात्रियों की सुविधा के लिए 1 जुलाई से 10 नए नियम ला रहा है। इन सुविधाओं में एक्सप्रेस में कन्फर्म टिकट, तत्काल बुकिंग के लिए अलग-अलग समय, राजधानी और शताब्दी ट्रेनों के लिए पेपरलेस टिकट सुविधा और हिंदी और अंग्रेजी के अलावा अन्य भाषाओं में टिकट शामिल हैं।

1 जुलाई से ऐसा कोई नियम लागू नहीं होगा
सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स ने वायरल हो रहे इन नए नियमों के एक ब्लॉग का लिंक शेयर किया है। वायरल हो रहे इस मैसेज के वन इंडिया की फैक्ट चैक टीम ने जांच की है। हमारी जांच में ये वायरल दावा गलत साबित हुआ है। 1 जुलाई से ऐसा कोई नियम लागू नहीं होगा। सोशल मीडिया पर यह संदेश 2015 से प्रसारित हो रहा है और रेलवे कई बार स्पष्ट कर चुका है कि यह गलत खबर है।
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रेलवे ने खबर को बताया गलत
कीवर्ड्स की मदद से हमने इंटरनेट पर सर्च करने पर पाया कि ये 2015 का मैसेज है जो वायरल हो रहा है। कुछ न्यूज वेबसाइट्स ने भी इस संबंध में खबरें चलाई थीं। वहीं 2017 में, रेल मंत्रालय ने वायरल संदेश पर एक विस्तृत स्पष्टीकरण भी जारी किया था। जिसमें कहा गया था कि, यह खबर पूरी तरह से गलत और निराधार है। मीडिया के एक वर्ग ने भी भारतीय रेलवे के अधिकृत स्रोतों से इसकी पुष्टि किए बिना इस खबर को प्रकाशित किया है। इसने रेल यात्रियों के मन में बहुत भ्रम पैदा किया है।

नियमों में 1 जुलाई से कोई बदलाव नहीं आएगा
प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि रेलवे ऑनलाइन (ई-टिकट) और पीआरएस काउंटर दोनों के माध्यम से प्रतीक्षा सूची वाले टिकट बेच रहा है। तब से इस योजना में कोई बदलाव नहीं किया गया है। हालांकि यात्री मांग में वृद्धि के चलते अधिक ट्रेनों की योजना बनाई जा रही है। इससे प्रतीक्षा सूची में काफी कमी आने की उम्मीद है। रेलवे जुलाई 2015 से सुविधा एक्सप्रेस ट्रेनें भी चला रहा है। इन ट्रेनों में प्रतीक्षा सूची के टिकट भी उपलब्ध हैं। इस संबंध में भी कोई बदलाव नहीं किया गया है। रेलवे ने नवंबर 2015 में नए रिफंड नियम अधिसूचित किए थे। ये नियम अभी भी जारी हैं।

ट्रेन में पेपर टिकट को बंद करने का कोई प्रस्ताव नहीं
रेलवे ने प्रेस बयान में स्पष्ट किया है कि, इसके अलावा, शताब्दी और राजधानी ट्रेनों या किसी भी ट्रेन में पेपर टिकट को बंद करने का कोई प्रस्ताव नहीं है। हालांकि, ऑनलाइन सीट बुक करने वाले यात्रियों के लिए, ईमेल या एसएमएस पर प्राप्त टिकट एक वैध दस्तावेज है, लेकिन इसके साथ एक आईडी प्रूफ होना चाहिए। 2015 में भी तत्काल टिकटों के लिए अलग-अलग समय अधिसूचित किए गए थे। रेलवे लंबे समय से अपने हेल्पलाइन नंबर 139 पर अपनी गंतव्य चेतावनी सुविधा चला रहा है। और क्षेत्रीय भाषाओं में टिकटों (ई-टिकट और पीआरएस दोनों) को प्रिंट करने का कोई प्रस्ताव नहीं है।

Fact Check
दावा
भारतीय रेलवे यात्रियों की सुविधा के लिए 1 जुलाई से 10 नए नियम ला रहा है
नतीजा
रेल मंत्रालय ने वायरल संदेश पर एक विस्तृत स्पष्टीकरण भी जारी किया था। जिसमें कहा गया था कि, यह खबर पूरी तरह से गलत और निराधार है।












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