11 देश अलग-अलग वैक्सीन को मिलाने की कर चुके हैं पहल, कहां क्या स्थिति है जानिए
नई दिल्ली, 2 जून: दुनिया के कई देशों में कोरोना वायरस की दो अलग-अलग वैक्सीन को मिलाने की कवायद चल रही है। इसकी मुख्य वजह ये है कि कई देशों में वैक्सीन सप्लाई की किल्लत देखने को मिल रही है। इसलिए पहली डोज और दूसरी डोज में अलग वैक्सीन के इस्तेमाल करने की स्थिति में उसके प्रभाव और सुरक्षा को लेकर कई तरह की स्टडी चल रही है। अबतक ऐसे 11 देश हैं जो या तो यह प्रक्रिया अपनाने पर विचार कर रहे हैं या फिर बदले हालात में वैक्सीन मिक्सिंग के विकल्प को अपनाने का फैसला कर चुके हैं।

कनाडा
1 जून के सीबीसी न्यूज की रिपोर्ट में कहा गया है कि कनाडा पहली डोज एस्ट्राजेनेका वैक्सीन की और दूसरी डोज फाइजर या मॉडर्ना वैक्सीन लगाने का प्रस्ताव रखेगा। वहां टीकाकरण पर नेशनल एडवाइजरी कमिटी भी मॉडर्ना या फाइजर की पहले डोज लेने वालों को दोनों में से किसी भी एक वैक्सीन की दूसरी डोज लेने की सलाह देगा।
चीन
12 अप्रैल को चीन के रोग नियंत्रण के प्रमुख अधिकारी ने कहा था कि वह एफीकेसी बढ़ाने के लिए दो अलग-अलग टेक्नोलॉजी से तैयार वैक्सीन को मिलाने के बारे में औपचारिक तौर पर विचार कर रहा है। उस वक्त वहां के शोधकर्ता कैनसाइनो बायोलॉजिक्स और चोंगक्विंग शिफेई बायोलॉजिकल की ओर से विकसित वैक्सीन की डोज मिलाने पर परीक्षण कर रहे थे।
फिनलैंड
पिछले 14 अप्रैल को फिनलैंड के इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ एंड वेल्फेयर ने कहा था कि 65 साल के कम उम्र के जो लोग पहली डोज में एस्ट्राजेनेका वैक्सीन लगवा चुके होंगे, उन्हें दूसरी डोज में अलग वैक्सीन लगाई जाएगी।
फ्रांस
अप्रैल में फ्रांस की सबसे बड़ी स्वास्थ्य सलाहकार संस्था ने 55 साल से कम उम्र के लोगों को पहली डोज एस्ट्राजेनेका वैक्सीन लगाने की सलाह दी थी और कहा था कि दूसरी डोज उन्हें मैसेंजर आरएनए वैक्सीन की लगानी चाहिए। हालांकि, ट्रायल में डोज को मिलाने के बाद उसके प्रभाव का अबतक मूल्यांकन नहीं किया गया है।
नॉर्वे
23 अप्रैल को नॉर्वे ने कहा था कि जिन लोगों ने पहली डोज एस्ट्राजेनेका वैक्सीन की ली होगी, उन्हें दूसरी डोज में एमआरएनए वैक्सीन लगवाने का ऑफर दिया जाएगा।
रूस
रूस ने स्पूतनिक वी और एस्ट्राजेनेका वैक्सीन को मिलाने वाले क्लिनिकल ट्रायल की मंजूरी देना रोक दिया है। एस्ट्राजेनेका के अधिकारी ने 28 मई को एक अंतरराष्ट्रीय न्यूज एजेंसी को बताया था कि वहां के स्वास्थ्य मंत्रालय की एथिकल कमिटी ने और आंकड़े मांगे हैं।
दक्षिण कोरिया
दक्षिण कोरिया ने 20 मई को कहा था कि वह वैक्सीन के मिश्रण पर ट्रायल करेगा। इसमें एक वैक्सीन एस्ट्राजेनेका की और दूसरी फाइजर और दूसरी वैक्सीन निर्माताओं की होगी।
स्पेन
स्पेन के स्वास्थ्य मंत्री कैरोलिना दारियस ने 19 मई को कहा था कि उनका देश एस्ट्राजेनेका की पहली डोज लेने वाले 60 साल से कम उम्र के लोगों को दूसरी डोज इसी की या फिर फाइजर की लगवाने की अनुमति देगा। यह फैसला वहां के कारलोस 3 हेल्थ इंस्टीट्यूट में हुई एक स्टडी की शुरुआती नतीजों के बाद लिया गया। इसके मुताबिक एस्ट्राजेनेका के बाद फाइजर की डोज देना सुरक्षित और बहुत ही ज्यादा प्रभावी पाया गया।
स्वीडन
स्वीडन की स्वास्थ्य एजेंसी ने 20 अप्रैल को कहा था कि 65 साल से कम उम्र के जिन लोगों को पहली डोज में एस्ट्राजेनेका वैक्सीन दी गई होगी, उन्हें दूसरी डोज में दूसरी वैक्सीन दी जाएगी।
यूनाइटेड किंगडम
जनवरी में ब्रिटेन ने कहा था कि वह दूसरी डोज में दूसरी वैक्सीन लगाने का विकल्प उन्हीं हालातों में देगा, जब पहली वैक्सीन का स्टॉक खत्म हो जाएगा। 12 मई को ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की अगुवाई में हुई एक स्टडी के जारी नतीजों के मुताबिक ये पाया गया कि फाइजर और एस्ट्राजेनेका वैक्सीन में अदला-बदली करने पर दूसरी डोज के बाद ज्यादातर लोगों में पोस्ट-वैक्सीनेशन के हल्के या मध्यम ज्यादा लक्षण दिखाई पड़े। जबकि जिन्हें दोनों डोज एक ही वैक्सीन की लगी, उनमें ऐसा नहीं हुआ। 21 मई को नोवावैक्स ने कहा कि वह अलग-अलग वैक्सीन को मिलाने पर ट्रायल करेगा। यूके में जून में ही यह ट्रायल शुरू होनी है।
अमेरिका
जनवरी में सीएनबीसी ने रिपोर्ट दी थी कि अमेरिकी सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) ने अपनी गाइडलाइंस को अपडेट किया है और बहुत ही 'असाधारण परिस्थितियों' में कम से कम 28 दिन के अंतराल पर फाइजर और मॉडर्ना की डोज मिलाने की अनुमति दी है।












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