भाजपा के आंगन में जानकी पराई क्यों?
जिस हिन्दुत्व की रक्षा की लड़ाई का दावा भाजपा करती रही है, उसके आंगन में भगवान राम तो दिखते हैं परंतु माता जानकी पराई? अयोध्या में राम मंदिर बने इसके नाम पर अरबों रुपए रातोंरात चंदा देने के लिए देश के कई अमीर और गरीब से धनवान बने कुछ नेता तैयार हैं। भाजपा इसी हिन्दुत्व का ढिढ़ोरा पीट कर सत्ता का सुख भी हासिल कर चुकी है। परंतु वास्तव में हिन्दुत्व के प्रति वह कितनी ईमानदार है, यह देखना है तो एक बार सीतामढ़ी अवश्य जाएं। सीतामढ़ी माता जानकी की जन्मस्थली है। ऐसे में यहां भी हिन्दुत्व दिखना चाहिए। परंतु यहां एक बार आने के बाद कोई पर्यटक दुबारा आने के लिए नहीं सोचेगा। वजह जिला बनने के बाद भी विकास मामले में यह अत्यंत पिछड़ा हुआ है। यहां तक कि इस जिले को अब तक पर्यटन स्थल का दर्जा तक नहीं दिया जा सका है।

एक ओर राम के नाम पर इतनी मारामारी वहीं दूसरी ओर जानकी की जन्मस्थली की ऐसी उपेक्षा। इत्तेफाक से बिहार में अभी जदयू-भाजपा की ही सरकार है। भाजपा के कई मंत्री और सांसद भी हैं। ऐसे में उन्हें हिन्दुत्व का जलवा तो दिखाना ही चाहिए? इसी बहाने कम से कम सीतामढ़ी की जनता का कुछ तो भला हो जाता। परंतु किसी चुनाव में किसी नेता ने जानकी स्थल का भी विकास हो, इस बात को मजबूती से नहीं उठाया। यह अलग बात है कि जनता सबकुछ जानते हुए भी खामोश रहती है। उसकी चुप्पी कमजोरी नहीं, वह सोचती है कि राजनीति के पचड़े में वह क्यों पड़े? इस बार हुए लोकसभा चुनाव में जनता ने चुप्पी साधकर ही भाजपा को सबक सिखाया। जनता के जवाब से भाजपा कम से कम चार साल तक तो और जरूर कराहेगी।
देश चलाने वाले ही यदि पक्षपात करने लगेंगे तो कहां जाएगी जनता। ऐसे भी भारत में भांति-भांति के लोग रहते हैं। यहां मुसलमान, सिख, ईसाई सहित कई अन्य धर्मों को भी मानने वाले लोग रहते हैं। सभी की निगाहें सत्ता पर विराजमान बड़े नेताओं पर रहती है कि वह उनके हित में कुछ करेगा। ऐसे में जात-पात धर्म के नाम पर लड़ानेवाले नेताओं से जनता को सावधान रहने की जरूरत है।
2009 के चुनावी झटके से हांफ रही भाजपा ने तो अब नेतृत्व परिवर्तन का भी निर्णय ले लिया है। उसे लगने लगा है कि सिर्फ हिन्दुत्व और राम मंदिर के नाम पर जनता अब वोट देनेवाली नहीं है। यदि उसे सत्ता में बने रहना है तो कुछ और भी काम करना पड़ेगा। सीतामढ़ी की जनता की बार-बार मांग के बावजूद आज यह जिला पिछड़ा हुआ है। यहां के कई बुद्धिजीवियों ने व्यंग्यात्मक अंदाज में टिप्पणी भी कि भाजपा के आंगन में जानकी इतनी पराई क्यों हैं? इस क्यों का जवाब तो भाजपा नेता ही दे सकते हैं।
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