9 साल की उम्र तक नहीं गए स्कूल, कब और कैस शुरू हुई सोनम वांगचुक की पढ़ाई? पास में है कौन-कौन सी डिग्री?

Sonam Wangchuk Education and Degrees: सोनम वांगचुक बीते 19 दिनों से दिल्ली के जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठे हैं। CJP द्वारा 20 जून को शुरू किया गया ये प्रोटेस्ट शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के लिए किया जा रहा है। सोनम वांगचुक जो CJP के सपोर्ट में भूख हड़ताल पर बैठे हैं वो लद्दाख के एक जाने-माने इंजीनियर, शिक्षा सुधारक और इनोवेटर हैं। सोनम आज केवल हमारे देश में नहीं बल्कि पूरी दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बना चुके हैं।

भूख हड़ताल पर बैठे सोनम बीते कुछ दिनों से हर ओर छाए हुए हैं। लोग उनके बारे में ज्यादा से ज्यादा जानने की कोशिश कर रहे हैं। इसी बीच ये सवाल भी उठ रहा है कि सोनम वांगचुक ने कहां से पढ़ाई की है और उनके पास कौन-कौन सी डिग्री है। बता दें, 9 साल की उम्र तक सोनम ने स्कूल की शक्ल भी नहीं देखी थी। लेकिन फिर आगे चलकर उन्होंने जाने माने संस्थानों से पढ़ाई की और आज अपनी उपलब्धियों के लिए पहचाने जाते हैं।

Sonam Wangchuk Education and Degrees

बॉलीवुड की मशहूर फिल्म '3 इडियट्स' का आखिरी भाग, जिसमें एक इनोवेटिव स्कूल दिखाया गया है वो सोनम द्वारा लद्दाक में चलाए जा रहे असली स्कूल पर बेस्ड है। आइए जानते हैं सोनम वांगचुक की पढ़ाई का सफर कैसा रहा और उन्होंने शिक्षा के दम पर कौन-कौन सी बड़ी उपलब्धियां हासिल कीं हैं।

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कौन हैं सोनम वांगचुक? 9 साल तक क्यों नहीं गए स्कूल?

सोनम वांगचुक का जन्म साल 1966 में लद्दाख के अलची के पास एक छोटे से गांव उलेयटोकपो में हुआ था। उनका गांव मेन एरिया से हटके, दूरदराज इलाके में बसा हुआ था। उस समय उनके गांव में कोई स्कूल नहीं था। यही वजह रही कि उन्होंने 9 साल की उम्र तक किसी स्कूल में दाखिला नहीं लिया। उनकी शुरुआती शिक्षा उनकी मां ने घर पर ही मातृभाषा में कराई। इसी दौरान उन्होंने पढ़ना-लिखना सीखा और बुनियादी शिक्षा हासिल की।

बहुत कम लोग ये जानते हैं कि वो एक राजनीतिक परिवार से संबंध रखते हैं। सोनम वांगचुक के पिता सोनम वांग्याल जम्मू-कश्मीर की कांग्रेस सरकार में मंत्री रह चुके हैं। वांग्याल ने साल 1984 में लद्दाख को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर अनशन भी किया था।

कहां से की सोनम वांगचुक ने पढ़ाई?

सोनम का परिवार शुरू से गांव में रहता था, बाद में उनके पिता सार्वजनिक जीवन से जुड़े, जिसके बाद परिवार का संपर्क बड़े शहरों से हुआ। इसके बाद सोनम वांगचुक का दाखिला दिल्ली के स्पेशल केंद्रीय विद्यालय में कराया गया था। यहां उन्हें नए माहौल, अलग-अलग विषयों और आधुनिक शिक्षा प्रणाली को समझने का मौका मिला। इसी स्कूल ने उनकी आगे की पढ़ाई की मजबूत नींव तैयार की।

स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद सोनम वांगचुक ने उस समय के रीजनल इंजीनियरिंग कॉलेज, श्रीनगर, जिसे आज NIT श्रीनगर के नाम से जाना जाता है, में एडमिशन लिया। उन्होंने 1987 में मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक (BTech) की डिग्री हासिल की। इंजीनियरिंग की पढ़ाई ने उन्हें विज्ञान और तकनीक को बेहतर तरीके से समझने का मौका दिया, जिसका उपयोग उन्होंने बाद में समाज की समस्याओं के समाधान खोजने में किया।

फ्रांस जाकर ली उच्च शिक्षा

इंजीनियरिंग पूरी करने के बाद सोनम वांगचुक ने विदेश जाकर अपनी पढ़ाई आगे बढ़ाई। उन्होंने फ्रांस के क्रेटेरे स्कूल ऑफ आर्किटेक्चर, ग्रेनोबल से अर्थन आर्किटेक्चर (Earthen Architecture) की पढ़ाई की। इस कोर्स के दौरान उन्होंने ऐसे मकान बनाने की तकनीक सीखी, जो पर्यावरण के अनुकूल हों और पहाड़ी इलाकों की जरूरतों के हिसाब से तैयार किए जा सकें। सोनम वांगचुक हमेशा मानते रहे हैं कि पढ़ाई का मकसद सिर्फ परीक्षा पास करना नहीं होना चाहिए।

उनका मानना है कि शिक्षा का सीधा संबंध लोगों की रोजमर्रा की समस्याओं का हल निकालने से होना चाहिए। इसी सोच के साथ उन्होंने 1988 में स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख (SECMOL) की शुरुआत की। इस संस्था ने लद्दाख के सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए कई अहम कदम उठाए।

इंजीनियरिंग की पढ़ाई से निकाले नए समाधान

सोनम वांगचुक ने अपनी तकनीकी शिक्षा का इस्तेमाल कई उपयोगी इनोवेशन तैयार करने में किया। उनका सबसे चर्चित प्रोजेक्ट आइस स्तूप (Ice Stupa) है। इस तकनीक के जरिए सर्दियों में बर्फ के रूप में पानी जमा किया जाता है, जिसे गर्मियों में पिघलाकर खेती के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यह तकनीक खासतौर पर पानी की कमी वाले पहाड़ी इलाकों में किसानों के लिए काफी मददगार साबित हुई है।

HIAL के जरिए बदल रहे हैं शिक्षा का तरीका

सोनम वांगचुक ने हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स, लद्दाख (HIAL) की सह-स्थापना भी की। इस संस्थान में छात्रों को सिर्फ किताबों तक सीमित रखने के बजाय वास्तविक अनुभव के साथ सीखने पर जोर दिया जाता है। यहां शिक्षा को स्थानीय जरूरतों, पर्यावरण और तकनीक से जोड़कर पढ़ाया जाता है, ताकि छात्र पढ़ाई के साथ-साथ समाज की समस्याओं का समाधान भी खोज सकें।

सोनम वांगचुक का नाम उस समय पूरे देश में और ज्यादा चर्चा में आया, जब बॉलीवुड फिल्म '3 Idiots' रिलीज हुई। फिल्म का मशहूर किरदार फुंसुख वांगड़ू जो मूवी के लास्ट में स्कूल चलाते हैं वो स्कूल सोनम द्वारा चलाए जा रहे स्कूल से प्रेरित है।

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