IIT Delhi: 33 साल के PhD डिग्री का रिकॉर्ड सिर्फ 5 साल में टूटा, क्या है IIT दिल्ली की इस कामयाबी का सीक्रेट?
IIT Delhi PhD: देश के प्रमुख तकनीकी संस्थानों में शुमार इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT Delhi) ने शोध और नवाचार के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। संस्थान में पिछले पांच वर्षों के दौरान पीएचडी डिग्रियां प्रदान करने की जो रफ्तार देखी गई है, उसने पिछले कई दशकों के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।
शोध के प्रति इस बढ़ते रुझान ने न केवल संस्थान की शैक्षणिक गरिमा को बढ़ाया है, बल्कि भारत को वैश्विक ज्ञान अर्थव्यवस्था (Knowledge Economy) में एक मजबूत दावेदार के रूप में भी खड़ा किया है। आधुनिक सुविधाओं, सरकारी प्रोत्साहन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के त्रिवेणी संगम ने IIT दिल्ली को 'रिसर्च हब' में तब्दील कर दिया है, जहां आज का युवा न केवल डिग्री ले रहा है, बल्कि देश की जटिल समस्याओं के तकनीकी समाधान भी खोज रहा है।

IIT दिल्ली में शोध का स्वर्ण काल, 5 साल बनाम कई दशक
IIT दिल्ली द्वारा जारी ताज़ा आंकड़े बताते हैं कि साल 2020 से 2025 के बीच संस्थान ने कुल 2,259 पीएचडी डिग्रियां प्रदान की हैं। इस संख्या की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह 2010 से 2019 के पूरे दशक (2,376 डिग्री) के लगभग बराबर है।
यदि हम इतिहास के पन्नों को पलटें, तो संस्थान की स्थापना के बाद 1966 से 1999 तक (33 साल) में कुल 2,281 पीएचडी डिग्रियां दी गई थीं। यानी जो मुकाम हासिल करने में पहले तीन दशक से ज्यादा का समय लगा, उसे IIT दिल्ली ने अब महज 5 साल में हासिल कर लिया है।
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दो दशकों में ग्राफ की रिकॉर्ड बढ़त
संस्थान में शोधार्थियों की संख्या में वृद्धि का सिलसिला साल 2000 के बाद से ही तेज हो गया था:
- 2000-2009: इस दशक में 1,130 पीएचडी डिग्रियां दी गईं।
- 2010-2019: यह संख्या दोगुनी से अधिक बढ़कर 2,376 तक पहुंच गई।
साल 2000 से 2025 तक अब तक कुल 5,765 छात्र पीएचडी पूरी कर चुके हैं, जो शुरुआती 33 वर्षों के मुकाबले दोगुने से भी ज्यादा है।
क्यों बढ़ा शोध के प्रति रुझान? ये हैं मुख्य कारण
संस्थान प्रशासन के अनुसार, इस अभूतपूर्व प्रगति के पीछे ठोस रणनीतिक बदलाव और बेहतर इकोसिस्टम का हाथ है।
1. फेलोशिप और आर्थिक मजबूती
रिसर्च की ओर छात्रों के आकर्षण का सबसे बड़ा कारण पीएचडी छात्रों को मिलने वाली आर्थिक सहायता (Fellowship) में वृद्धि है। बेहतर स्टाइपेंड मिलने से मेधावी छात्र कॉर्पोरेट नौकरियों के बजाय शोध को करियर के रूप में चुनने के लिए प्रोत्साहित हुए हैं। वर्तमान में, संस्थान के प्रत्येक फैकल्टी मेंबर के साथ औसतन 5.5 पीएचडी छात्र शोध कार्य कर रहे हैं।
2. सरकारी योजनाओं का 'बूस्टर' डोज
केंद्र सरकार की योजनाओं, विशेषकर Prime Minister's Research Fellowship (PMRF) ने इसमें गेम-चेंजर की भूमिका निभाई है। इस योजना के तहत न केवल आकर्षक फेलोशिप मिलती है, बल्कि छात्रों को सीधे उद्योग और अनुसंधान की मुख्यधारा से जोड़ा जाता है। इससे न केवल दाखिलों में सुधार हुआ, बल्कि समय पर शोध पूरा करने की दर में भी इजाफा देखा गया है।
3. वर्ल्ड-क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर और लैब
IIT दिल्ली ने अपनी रिसर्च सुविधाओं को आधुनिक बनाने के लिए भारी निवेश किया है। सेंट्रल रिसर्च फैसिलिटी (CRF) में अब ऐसी लैब और हाई परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग (HPC) प्रणालियां मौजूद हैं, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर के शोध के लिए अनिवार्य हैं।
ग्लोबल पार्टनरशिप, ऑस्ट्रेलिया से ताइवान तक का सफर
अब IIT दिल्ली की रिसर्च सिर्फ कैंपस की दीवारों तक सीमित नहीं है। संस्थान ने विदेशी विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर Joint PhD प्रोग्राम शुरू किए हैं।
- University of Queensland (ऑस्ट्रेलिया): इसके साथ मिलकर चल रहे संयुक्त रिसर्च प्रोजेक्ट्स वैश्विक चुनौतियों पर केंद्रित हैं।
- National Yang Ming Chiao Tung University (ताइवान): इस साझेदारी से सेमीकंडक्टर और नैनोटेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में शोध को नया आयाम मिला है।
इन अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों और फंडेड प्रोजेक्ट्स से जुड़ने के कारण छात्रों को वैश्विक एक्सपोजर मिल रहा है, जिससे उनकी पीएचडी ट्रेनिंग का स्तर भी काफी ऊंचा हुआ है।
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