कौन हैं JEE एडवांस्ड में परचम लहराने वाली Devdutta Mazhi? बंगाली मीडियम से की पढ़ाई, आज रचा जेईई में इतिहास
Devdutta Mazhi: यह कहना गलत नहीं होगा कि कठिन मेहनत, पक्की लगन और आत्मविश्वास के साथ किसी भी सपने को साकार किया जा सकता है - फिर चाहे रास्ते में कितनी ही चुनौतियां क्यों न हों। पश्चिम बंगाल के एक छोटे से गांव से निकलकर देश की सबसे मुश्किल परीक्षाओं में से एक, जेईई एडवांस्ड 2025 में टॉप करने वाली देवदत्ता माझी इसकी एक शानदार मिसाल हैं।
बंगाली मीडियम से पढ़ाई करने वाली देवदत्ता ने न सिर्फ टॉप रैंक हासिल की, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि सफलता के लिए भाषा नहीं, समर्पण और तैयारी मायने रखती है। अपनी स्कूली पढ़ाई एक सरकारी स्कूल से करने के बावजूद उन्होंने जेईई मेन में 300 में से 300 नंबर लाकर सबको चौंकाया था, और अब जेईई एडवांस्ड में गर्ल्स कैटेगरी में टॉपर बनकर पूरे देश में प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं।

जेईई मेन में भी किया था शानदार प्रदर्शन
देवदत्ता माझी ने जेईई मेन 2025 के दोनों सत्रों में भाग लिया था। पहले सत्र में उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 15 हासिल की थी। वहीं दूसरे सत्र में उन्होंने 300 में से पूरे 300 अंक प्राप्त कर सबका ध्यान खींचा था। अब जेईई एडवांस्ड 2025 में 360 में से 312 अंक प्राप्त कर वे एक बार फिर सुर्खियों में हैं।
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पश्चिम बंगाल के गांव से निकलीं देवदत्ता
देवदत्ता माझी पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले के आड़षा ब्लॉक के जामबाद गांव की रहने वाली हैं। उनके पिता जयंत माझी आसनसोल के बी.बी. कॉलेज में फिजिक्स के प्रोफेसर हैं और मां सेली देवी कटवा के दुर्गादासी चौधरानी गर्ल्स हाई स्कूल में शिक्षिका हैं। देवदत्ता ने भी इसी स्कूल से पढ़ाई की है।
स्कूल में भी रहीं टॉपर
देवदत्ता का स्कूल रिकॉर्ड भी शानदार रहा है। उन्होंने 2023 की माध्यमिक परीक्षा में 700 में से 697 अंक प्राप्त किए थे, यानी 99.57 प्रतिशत अंक। वे उस परीक्षा में भी रैंक 1 पर थीं।
IISC बेंगलुरु में पढ़ाई और ISRO में रिसर्च का सपना
देवदत्ता माझी IISC बेंगलुरु से गणित में स्नातक करना चाहती हैं। इसके बाद उनका सपना एस्ट्रोफिजिक्स में विशेषज्ञता हासिल कर इसरो में रिसर्च करना है। उनके गांव और स्कूल में उनकी सफलता से खुशी की लहर है।
क्लास 5 तक गांव के स्कूल में की थी पढ़ाई
देवदत्ता ने पांचवीं कक्षा तक की पढ़ाई गांव के ही जामबाद स्कूल से की थी। इसके बाद वे माता-पिता के साथ कटवा शिफ्ट हो गईं, जहां से उन्होंने आगे की पढ़ाई पूरी की। देवदत्ता माझी की सफलता उन सभी छात्रों के लिए प्रेरणा है जो सोचते हैं कि अंग्रेजी मीडियम से पढ़े बिना बड़ी परीक्षाओं में सफलता पाना मुश्किल है।
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