Importance of Gemstone: क्यों पहने जाते हैं अलग-अलग आकार के रत्न?
नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए अनेक प्रकार के उपाय प्रचलित हैं। इनमें ग्रहों से जुड़े दान, मंत्र जाप, यंत्र पूजा, संबंधित ग्रहों की पूजा, ग्रहों से जुड़े देवताओं की पूजा, व्रत, अभिषेक आदि अनेक उपाय किए जाते हैं। इनमें एक और प्रमुख उपाय है रत्न धारण करवाना। ग्रहों को बल प्रदान करने के लिए किसी व्यक्ति की कुंडली के आधार पर रत्न पहनाए जाते हैं। आपने अक्सर देखा होगा लोगों की अंगुली में ये रत्न अलग-अलग शेप के होते हैं। इनमें गोल, चौकोर, अंडाकार और तिकोना रत्न होते हैं। क्या आप जानते हैं रत्नों के साइज के साथ इनका शेप भी महत्वपूर्ण होता है। किस व्यक्ति को किस शेप का रत्न पहनाया जाना चाहिए, यह जरूर देखा जाना चाहिए।

अलग-अलग शेप क्यों
रत्न शास्त्र में प्रत्येक ग्रह से जुड़ा एक प्रमुख रत्न और उसके अनेक उपरत्न होते हैं। प्रत्येक रत्न में संबंधित ग्रह की रश्मियों को ग्रहण करने की क्षमता होती है। चूंकि इस पृथ्वी पर मौजूद प्रत्येक कण पंचमहाभूतों पृथ्वी, अग्नि, जल, वायु और आकाश तत्व से मिलकर बना है। इसलिए रत्नों में भी पंचमहाभूतों की रश्मियां समाहित हैं।

एक विशेष चिन्ह
प्रत्येक महाभूत का एक विशेष चिन्ह होता है। इनमें आकाश तत्व निराकार माना गया है। वायु तत्व षटकोण होता है। अग्नि तत्व का चिन्ह त्रिकोण होता है। जल तत्व का चिन्ह अर्धचंद्र होता है और पृथ्वी तत्व चौकोर माना गया है। पंचमहाभूतों की प्रकृति और ग्रहों से संबंधित रत्नों के अनुसार उनका शेप निर्धारित किया जाता है।

किस ग्रह के लिए कौन का शेप उपयुक्त
- सूर्य- माणिक- अग्नि और आकाश तत्व- गोल, ओवल शेप
- चंद्र- मोती- जल तत्व- गोल, अर्धचंद्र शेप
- मंगल- मूंगा- अग्नि तत्व- तिकोना, कैप्सूल शेप
- बुध- पन्ना- पृथ्वी तत्व- गोल, चौकोर
- गुरु- पुखराज- पृथ्वी तत्व- गोल, चौकोर
- शुक्र- हीरा- आकाश, पृथ्वी तत्व- गोल, चौकोर या किसी भी शेप का
- शनि- नीलम- वायु तत्व- षटकोण, गोल
- राहू- गोमेद- आकाश तत्व- किसी भी शेप का पहना जा सकता है
- केतु- लहसुनिया- आकाश तत्व- किसी भी शेप का पहना जा सकता है












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