भवन निर्माण के वास्तु टिप्स: जिन्हें अनदेखा नहीं कर सकते आप
लखनऊ। हर कोई चाहता है कि उसका अपना एक घर हो, जिसमें सुकून के दो पल व्यतीत किये जाए, लेकिन इस मंहगाई के दौर में भवन बनाना वाकई बहुत मुश्किल काम है।
- अगर आप-अपना आशियाना बनवाने जा रहे है तो हम आपको कुछ ऐसे वास्तु टिप्स बताने जा रहे है, जिन्हें अपनाकर आप-अपने भवन में खुशहाल जीवन व्यतीत कर सकते है।
- प्राथमिक रूप से भवन निर्माण के लिए वर्गाकार या आयताकार भूमि का चयन करना चाहिए। विकृत भूमि का चयन न करें जिससे भवन में सकारात्मक उर्जा का प्रवाह न हो सके।
- दो विशाल भूखंड के मध्य छोटा संकरा भूखंड कभी उत्तम नहीं माना जाता है।
- भवन निर्माण करते समय यह ध्यान रखें कि भूमि सूर्यवेधी या चन्द्र वेधी इसका विचार किसी वास्तु मर्मज्ञ से करना चाहिए।
- रहने योग्य भूखंड में सारी दिशाओं का तालमेल इस प्रकार से होना चाहिए कि घर में सकारात्मक उर्जा प्रवाहित होती रहे।
- भूखण्ड के सामने किसी भी प्रकार का अवरोध जैसे-टीला, बड़ा वृ़क्ष, बिजली का खंभा और मन्दिर आदि नहीं होना चाहिए।
- भवन में ईशान दिशा की ढाल का होना अति-आवश्यक है।
- भवन में दरवाजे व खिड़कियों की पवचयस्य की ऊॅचाई एक सीध में होनी चाहिए।
- यदि किसी भवन पर मन्दिर की छाया पड़ रही हो तो उस भवन में निवास करना उत्तम नहीं माना जाता है।
- ऐसे मकान में निवास कदापि नहीं करना चाहिए जो बन्द रास्ते का आखिरी मकान हो।
- पढ़ने वाले तथा अध्यात्म में रूचि रखने वाले तथा वृद्धों को पूर्व दिशा की ओर सिर रखकर शयन करना चाहिए।
- मुख्य रूप से गृह निर्माण के समय दरवाजे खिड़कियॉ, चूल्हा, समर सेबल आदि का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
- भूमिगत जल का संग्रह पूर्व, या ईशान अर्थात पूर्व-उत्तर कोण में ही करना चाहिए।
- टयूबवेल या हैंडपंप पूर्व या ईशान कोण की दिशा मेें ही बनवाना उत्तम होता है।
- भोजनालय कक्ष कभी भी उत्तर या ईशान कोण की दिशा में नहीं बनवाना चाहिए।
- बिना दरवाजे के, बिना पूर्ण छत के घर में प्रवेश कभी भी नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से घर में विपत्तियॉ का वास होता है।
- रविवार, मंगलवार या शनिवार को गृह प्रवेश नहीं करना चाहिए। क्योंकि ऐसा करने से घर में रोग हावी रहते है।
- उत्तर दिशा की दीवार पर झरना का चित्र न लगायेें अन्यथा परिवार की आर्थिक स्थिति में गिरावट आती है।













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