जीवन के लिए जरूरी हैं पेड़, जानिए क्या कहता है वास्तु-शास्त्र?

अशोक, मौलसिरी, शमी, चम्पा, अजुन, कटहल, बकुल, शाल आदि वृक्ष घर के सामने शुभ होते है।

लखनऊ। स्वच्छ वायु हम सब की जरूरत है क्योंकि आक्सीजन के बिना हम एक पल भी जिन्दा नहीं रह सकते है। वर्तमान परिप्रेक्ष्य में धरती पर प्रदूषण की भरमार है ऐसे में हम स्वच्छ हवा के लिए तरसते रहते है। स्वच्छा व निर्मल हवा पाने के लिए घर में वृक्षों को लगाना अति-आवश्यक है।

अब आईये जानते है कि वास्तु के अनुसार भवन में कौन सा पेड़ किस दिशा में लगाना शुभ रहेगा...

कौन से वृक्ष शुभ कारक है और कौन से अशुभ कारक?

कौन से वृक्ष शुभ कारक है और कौन से अशुभ कारक?

  • अशोक, मौलसिरी, शमी, चम्पा, अजुन, कटहल, केतकी, चमेली, पाटल, नारियल, नागकेशर, महुआ, वट, पाटल, समेल, बकुल, शाल आदि वृक्ष घर के सामने शुभ होते है।
  • पाकर, गूलर, आम, नीम, बहेड़ा, पीपल, कपित्थ, अगस्त्य, बेर, निगुण्डी, इमली, कदम्ब, केला, नींबू, अनार, खजूर, बेल आदि वृक्ष घर के सामने लगाना अशुभ होता है।
  • यदि दिन के दूसरे और तीसरे पहर में में वृक्ष, मन्दिर आदि की छाया भवन पर पड़े तो उस घर में रोग व विपत्तियॉ बनी रहती है।
  • किस दिशा में लाभ देते है और किस दिशा में हानि?

    किस दिशा में लाभ देते है और किस दिशा में हानि?

    पूर्व दिशा-इस दिशा में पीपल, सेमल, पाकर, गूलर पीड़ा, भय व निर्धनता देता है किन्तु बरगद व अनार का पेड़ मनोकामनाओं की पूर्ति करता है। ईशान में ऑवला व कटहल लाभदायक होता है।
    पश्चिम दिशा-इस दिशा में बरगद का पीड़ा कारक, कुलनाशक होता है, आम, कैथ, अगस्त्य तथा निर्गुण्डी धन नाशक होता है। पीपल का पेड़ पश्चिम दिशा शुभ कारक होता है।

    उत्तर-दक्षिण

    उत्तर-दक्षिण

    • उत्तर दिशा-इस दिशा मे बेल व पाकर का पेड़ शुभफल देता है और गूलर का पेड़ अशुभ फल देता है।
    • घर के निकट कॉटे वाले, दूध वाले तथा फल देने वाले वृक्ष सन्तान व स्त्री पक्ष को हानि पहुॅचाते है। यदि इन्हें काटा न जा सके तो इनके निकट कोई शुभ वृक्ष लगा देने से इनकी अशुभता दूर हो जाती है। कॉटेदार और दूध वाले वृक्षों की लकड़ी को भी घर में लगाना अशुभ माना जाता है।
    • दक्षिण दिशा-इस दिशा में पाकर का पेड़ रोग कारक, आम, कैथ, अगस्त्य तथा निगुण्डी आर्थिक हानि कराने वाले होते है। इमली, जामुन व कदम्ब का पेड़ दक्षिण दिशा में होने पर शुभ फल देता है।
    • बृहत्संहिता में कहा गया है....

      बृहत्संहिता में कहा गया है....

      • अश्वत्थं च कदम्बं च कदलीबीपूरकम। गृहे यस्य प्ररोहन्ति स गृही न प्ररोहति।।
      • अर्थात बेर, केला और नींबू जिस घर में जितना अधिक पनपते है उतनी ही उस घर की आर्थिक स्थिति डॉवाडोल होती है।
      • भविष्यपुराण में कहा गया-अपने घर से दक्षिण दिशा में तुलसी नहीं लगानी चाहिए अन्यथा घर में रोग व आर्थिक नुकसान होता है।
      • घर में बगीचा कहां बनाए?

        घर में बगीचा कहां बनाए?

        घर से पूर्व, ईशान, पश्चिम व उत्तर दिशा में बगीचा लगाने से घर में बरक्कत होती है, रोग में कमी होती है, आयु में वृद्धि होती है, नौकरी में प्रोन्नति होती है एंव बुध ग्रह मजबूत होकर शुभ फल देता है। भूलकर भी बगीचे को घर के आग्नेय कोण, दक्षिण, वायव्य में कोण में नहीं बनाना चाहिए अन्यथा धन, पुत्र का नाश व दुर्घटना होने की आशंका बनी रहती है।

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