Total Solar Eclipse 2019: 'सूर्यग्रहण' क्यों बढ़ा देता है गर्भवती महिलाओं की परेशानी?

नई दिल्ली। साल 2019 का दूसरा सूर्यग्रहण आज है , यह खग्रास सूर्यग्रहण है, जो कि भारत में दिखाई नहीं देगा, आपको बता दें कि जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के मध्य में आता है, तब यह पृथ्वी पर आने वाले सूर्य के प्रकाश को रोकता है और सूर्य में अपनी छाया बनाता है। इस खगोलीय घटना को 'सूर्य ग्रहण' कहा जाता है। ग्रहण एक भौगोलिक घटना है बावजूद इसका नाम सुनते ही गर्भवती महिलाएं और उनके घर वाले चिंतित हो जाते हैं।

चलिए विस्तार से जानते हैं कि ऐसा क्यों होता है?

शिशु विकलांग बन सकता है

शिशु विकलांग बन सकता है

दरअसल पुराणों की मान्यता के मुताबिक राहु चंद्रमा को और केतु सूर्य को ग्रसता है। ये दोनों ही छाया की संतान हैं। चंद्रमा और सूर्य की छाया के साथ-साथ चलते हैं। चंद्र ग्रहण से इंसान की सोचने की शक्ति कम होती है जबकि सूर्य ग्रहण के समय आंखों और लीवर की परेशानियां होती है इसलिए घर के बड़े-बूढ़े लोग गर्भवती स्त्री को सूर्यग्रहण को नहीं देखने की सलाह देते हैं, क्योंकि उसके दुष्प्रभाव से शिशु विकलांग बन सकता है।

गर्भपात की संभावना

गर्भपात की संभावना

कहा जाता है कि जब अंतरिक्ष में ये घटना होती है तो उसमें काफी ऊर्जा का हनन होता है, ये ऊर्जा पेट में पल रहे बच्चे के लिए नुकसानदायक होती है, जिसकी वजह से गर्भपात की संभावना बढ़ जाती है। इस कारण प्रेग्नेंट वोमेन को सूर्यग्रहण से दूर रहने की सलाह दी जाती है।

सूर्यग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं का खाना-पीना रूक जाता है

सूर्यग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं का खाना-पीना रूक जाता है

इसलिए अक्सर घर की बूढ़ी औरतें सूर्यग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं के पेट पर गोबर और तुलसी का लेप लगा देती हैं जिससे होने वाले बच्चे के शरीर को ठंडक मिले क्योंकि गोबर और तुलसी ठंडक के श्रोत हैं, यही नहीं कहीं-कहीं तो कुछ जगह तो गर्भवती स्त्रियों को खाने-पीने से भी रोका जाता है, अगर ग्रहण लंबा हुआ तो स्थिति विकट हो जाती है क्योंकि प्रेग्नेंट महिला को हर दो घंटे में खाना होता है और ग्रहण लंबा हो गया तो महिला के भोजन पर ही ग्रहण लग जाता है।

कैंची या चाकू का प्रयोग वर्जित

कैंची या चाकू का प्रयोग वर्जित

ग्रहण के दौरान गर्भवती महिला को कुछ भी कैंची या चाकू से काटने को मना किया जाता है और कपड़े सिलने से भी रोका जाता है क्योंकि ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने से शिशु के अंग या तो कट जाते हैं या फिर सिल (जुड़) जाते हैं।

वहम है और कुछ नहीं

लेकिन वैज्ञानिक और डॉक्टर्स इन बातों से बिल्कुल सरोकार नहीं रखते हैं, उनका कहना है कि ये एक खगोलिय घटना है जिसका असर ब्रह्मांड पर आंशिक रूप से हो सकता है लेकिन व्यक्ति विशेष पर इन बातों का असर नहीं होता है, जो नियम-कानून बताये गये हैं वो लोगों ने अपने हिसाब से बना लिए हैं।

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