भवन निर्माण प्रारंभ करने का समय है महत्वपूर्ण.. जानिए क्या हैं लाभ-हानि के योग?
यदि गृहपति के वर्ण का स्वामी निर्बल हो तो उस स्थिति में निर्मित गृह एक वर्ष के भीतर किसी दूसरे के हाथ में चला जाता है।

Home construction Tips ( वास्तु शास्त्र): अपने घर का निर्माण करवाना प्रत्येक व्यक्ति का सपना होता है। वह और उसका परिवार घर में सुख पूर्वक रहे और घर उनके लिए सुखद हो, उसमें रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति उन्नति करें, सुख-शांति रहे इसलिए व्यक्ति भवन निर्माण प्रारंभ करने से पूर्व उसका शुभ मुहूर्त निकलवाता है। घर का निर्माण किन शुभाशुभ योग में हो रहा है, उस पर बहुत कुछ निर्भर करता है।
आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ योग-संयोग..
गृह की आयु
कोई घर कितने लंबे समय तक टिका रहेगा इसे ज्योतिष की भाषा में गृह की आयु कहा जाता है। यदि गृह निर्माण प्रारंभ करने के समय लग्न में बृहस्पति, छठे स्थान में सूर्य, सातवें में बुध, चौथे स्थान में शुक्र और तीसरे स्थान में शनि हो तो उस घर की आयु सौ वर्ष होती है। यदि लग्न में शुक्र, तीसरे में सूर्य, छठे में मंगल तथा पांचवें में बृहस्पति हो तो उस घर की आयु 200 वर्ष तक होती है। यदि चतुर्थ स्थान में बृहस्पति, दशम में चंद्रमा, 11वें में मंगल और शनि दोनों हो तो उस घर की अवधि 80 वर्ष होती है।
लक्ष्मी योग
गृह निर्माण प्रारंभ करने के समय के लग्न में शुक्र अपनी उच्चराशि मीन में हों, या चतुर्थ स्थान में बृहस्पति अपनी उच्चराशि कर्क में हो, या लाभ स्थान में शनि अपनी उच्चराशि तुला में हो, तो ऐसे समय में शुरू किया गया गृह लक्ष्मी से युक्त रहता है। अर्थात् उसमें निवास करने वालों को कभी धन का अभाव नहीं रहता।
धनधान्यप्रद योग
पुष्य, तीनों उत्तरा, रोहिणी, मृगशिरा, श्रवण, अश्लेषा, पूर्वाषाढ़ा इन 9 नक्षत्रों में किसी नक्षत्र पर बृहस्पति हो और बृहस्पति का वार हो तो ऐसे योग में आरंभ किया गया गृह संतान और राज्य देने वाला होता है। ऐसे घर में धनधान्य के भंडार भरे रहते हैं।
अग्निभय योग
हस्त, पुष्य, रेवती, मघा, पूर्वाषाढ़ा, मूल इन 6 नक्षत्रों में से किसी नक्षत्र पर मंगल हो और मंगल का ही दिन हो तो ऐसे योग में प्रारंभ होने वाले घर में अग्नि भय रहता है इसलिए मंगलवार को गृह निर्माण प्रारंभ नहीं किया जाता है किंतु ऐसे घर को पुत्रप्रद कहा गया है।
अशुभ योग
अपने शत्रुग्रह के नवमांश में पड़ा हुआ एक ग्रह भी यदि गृहारंभ लग्न से सातवें या दसवें स्थान में बैठा हो और यदि गृहपति के वर्ण का स्वामी निर्बल हो तो उस स्थिति में निर्मित गृह एक वर्ष के भीतर किसी दूसरे के हाथ में चला जाता है। व्यक्ति को घर बेचना पड़ता है।












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