Shani Rashi Parivartan 2023: शनि के राशि परिवर्तन का राशियों पर प्रभाव
Shani Rashi Parivartan 2023 (शनि राशि परिवर्तन) in Aquarius Rashi: यदि आपकी कुंडली में शनि बलवान है तो प्रभावशील व्यक्तियों से आपको लाभ हो सकता है।

Shani Rashi Parivartan 2023: ग्रहों में न्यायाधिपति और अच्छे-बुरे कर्मो के अनुसार फल देने वाले शनि को ग्रह होने के बावजूद देवता का दर्जा प्राप्त है। ऐसे शनिदेव 17 जनवरी 2023 को कुंभ राशि में प्रवेश करने जा रहे हैं। शनि के राशि परिवर्तन का विभिन्न राशियों पर भिन्न-भिन्न प्रभाव होगा। आइए जानते हैं विस्तार से-
मेष : मेष राशि के जातकों के लिए शनि एकादश स्थान में लोहे के पाये से भ्रमण करने से संतान एवं पत्नी पक्ष को पीड़ा हो सकती है। मित्रों व आत्मीयजन का विश्वासघात मिल सकता है। आपकी उम्मीदों पर पानी फिर सकता है। व्यावसाययिक और नौकरी के क्षेत्र में अच्छी सफलता, धनलाभ, पद-प्रतिष्ठा में वृद्धि प्राप्त होगी। लोह, भूमि, पत्थर व स्त्रीवर्ग से लाभ, आरोग्यता प्राप्त होगी, विवाह के योग बनेंगे। शारीरिक पीड़ा और दांपत्य जीवन में टकराव हो सकता है।
वृषभ : शनि आपके दशम स्थान में ताम्र पाद से भ्रमण करेगा। यदि आपकी कुंडली में शनि बलवान है तो प्रभावशील व्यक्तियों से आपको लाभ हो सकता है, व्यावसायिक उन्नति होगी, कोर्ट-कचहरी के मामलों में विजय, आर्थिक स्थिति में सुधार होगा और अचल संपत्ति की प्राप्ति के योग बनेंगे। पारिवारिक वियोग, राजभय, नौकरी में परिवर्तन, माता-पिता को शारीरिक पीड़ा, किसी महिला मित्र के कारण अपयश मिल सकता है। वाहन-मशीनरी का प्रयोग करते समय सावधानी रखें।
मिथुन : शनि आपके नवम स्थान में स्वर्ण पाद से भ्रमण करने पर संतान की चिंता रहेगी, अनिष्टकारी प्रसंग, भाई-बहन से विवाद और पीड़ा, आर्थिक कष्ट आ सकता है। शत्रुभय बना रहेगा, स्त्री से कष्ट, कोर्ट के कार्यो में परेशानी, चलते-चलते काम अटक सकते हैं। यदि आपकी जन्मकुंडली में शनि बलवान है तो धार्मिक कार्यो में योगदान, तीर्थयात्रा, संतों के दर्शन, व्यावसायिक उन्नति, धन लाभ, संतान सुख प्राप्त होगा। नौकरी और व्यवसाय में इच्छानुसार परिवर्तन से लाभ होगा।
कर्क : आपकी राशि पर शनि का लघुकल्याणी ढैया अष्टम स्थान में चांदी के पाये से प्रारंभ होगा। यह शुभ-अशुभ दोनों प्रकार के परिणाम देगा। राजभय, संतान को कष्ट, कार्यो में बाधा और हानि, धनहानि, व्यावसायिक क्षेत्रों में असफलता, वाहन एवं पशु के कारण कष्ट उठाना पड़ सकता है। बुरे लोगों की संगति होगी। यदि आपकी जन्मकुंडली में जन्मस्थ शनि बलवान होगा तो धनलाभ, कार्य व्यवसाय में सफलता, जीवनसाथी से धनलाभ होगा। अचल संपत्ति खरीदने के योग बनेंगे।
सिंह : शनि आपकी राशि पर लोहे के पाये से सप्तम स्थान में भ्रमण करेगा। फलस्वरूप स्त्रीकष्ट, द्रव्यहानि, नौकरी में परेशानी, व्यवसाय में बाधा, मानसिक पीड़ा, बुद्धि भ्रम, अनिर्णय की स्थिति रहेगी। विद्यार्थी वर्ग को विद्यार्जन में रूकावट, जिन लोगों का दांपत्य जीवन ठीक नहीं चल रहा है उनका विवाह विच्छेद हो सकता है। गुप्तरोग होने की आशंका, बार-बार यात्रा होगी और कष्टकारी होगी। जन्मस्थ शनि बलवान होने पर धनलाभ, व्यापार में आशातीय प्रगति, धन-संपदा में लाभ।
कन्या : शनि आपके छठे भाव में तांबे के पाये से प्रवेश करेगा। आरोग्यता, शत्रुनाश, कोर्ट के कार्यो में विजय, कर्ज मुक्ति, नौकरी व्यवसाय में सफलता, अचल संपत्ति की प्राप्ति, मित्रों का सहयोग, पद-प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। जन्मस्थ शनि कमजोर है तो बेकार के कार्यो में व्यय होगा। बार-बार स्थान परिवर्तन की स्थिति आ सकती है। शारीरिक पीड़ा, स्वजन से विरोध-मतभेद, संतान की चिंता, भाई-बहनों से परेशानी। दांपत्य जीवन में कष्ट रहेगा। अनावश्यक खर्च में वृद्धि होगी।
तुला : शनि आपके पंचम भाव में चांदी के पाये से भ्रमण करेगा। कार्यो में सफलता के साथ सम्मान और प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। कार्यो के लिए प्रशंसा मिलेगी। शिक्षा के क्षेत्र में सफलता, स्थायी संपत्ति में वृद्धि, शेयर, बीमा जैसे क्षेत्रों में लाभ, मित्रों का सहयोग प्राप्त रहेगा। यदि आपकी जन्मकुंडली में जन्मस्थ शनि कमजोर तथा निर्बल हो तो संतान को पीड़ा या संतान से पीड़ा, विद्याअध्ययन में रूकावट, शेयर से हानि, आय से अधिक व्यय की स्थिति बनेगी, नौकरी में उतार-चढ़ाव रहेगा।
वृश्चिक : आप पर शनि का लघु कल्याणी ढैया चौथे स्थान में स्वर्ण पाद से प्रारंभ होगा। शत्रु वृद्धि होगी, स्थान परिवर्तन, यात्रा में कष्ट, स्वभाव में कड़वाहट, अधीनस्थों और उच्चाधिकारियों से विरोध, माता-पिता को कष्ट, मानसिक कष्ट, प्रियजन का वियोग जैसी स्थिति बन सकती है। जन्मस्थ शनि बलवान होने पर कष्टों में कमी आएगी। स्थायी संपत्ति की प्राप्ति, नौकरी कारोबार में उन्नति, फंसा हुआ या डूबा हुआ पैसा मिलने की उम्मीद, विवाह के योग बनेंगे।
धनु : शनि का तृतीय स्थान में लोहे के पाये से भ्रमण करना श्रेष्ठ फलदायक है। पद-प्रतिष्ठा, सम्मान, पराक्रम में वृद्धि होगी। नौकरी-व्यवसाय में मनमुताबिक वृद्धि और सफलता के योग हैं। धनलाभ, भाई से सहयोग, शत्रुनाश, भूमि-गृह की प्राप्ति, यश में वृद्धि होगी। यदि जन्मस्थ शनि निर्बल होगा तो अशुभ फल प्राप्त होंगे। मानसिक कष्ट, मानसिक उद्विग्नता, आलस्य हावी रहेगा। बुद्धि भ्रम, संतान व भाई-बहनों से कष्ट, अनचाहा स्थान परिवर्तन हो सकता है। अपयश और कष्टकारी यात्राएं होंगी।
मकर : शनि की साढ़ेसाती का अंतिम ढैया सोने के पाये से चरण पर दूससे स्थान में प्रारंभ होने क्लेश, अकारण विवाद, स्वजन का वियोग, स्वजन से कलह, स्त्रीकष्ट, नौकरी-व्यवसाय में परिवर्तन और उतार-चढ़ाव की स्थिति रहेगी। धन हानि, कर्ज चुकाने में संकट आएगा। घर छोड़ना पड़ सकता है। जन्मस्थ शनि मजबूत होने पर व्यावसायिक और नौकरी के कार्यो में सफलता, कोर्ट-कचहरी के मामलों में विजय प्राप्त होगी। स्थायी संपत्ति तथा भौतिक सुखों में वृद्धि होगी। यश-सम्मान प्राप्त होगा।
कुंभ : शनि की साढ़ेसाती का दूसरा ढैया हृदय पर तांबे के पाये से प्रारंभ होने से शुभाशुभ फल प्राप्त होंगे। स्थायी लाभ, पद-प्रतिष्ठा में वृद्धि, नौकरी-व्यवसाय में उन्नति के योग हैं। मित्रों से सहयोग, प्रेम संबंध में मजबूती। यदि जन्मस्थ शनि निर्बल होगा तो कष्टकारी परिणाम मिलेंगे। जीवनसाथी को पीड़ा, स्वास्थ्य में गिरावट, कार्यो में बाधा, पारिवारिक मतभेद, कोर्ट-कचहरी के मामले फंस सकते हैं। आर्थिक कष्ट, निरर्थक दूरस्थ यात्राएं होंगी। मित्रों एवं अधीनस्थों से असहयोग रहेगा।
मीन : आपको चांदी के पाये से मस्तक पर शनि की साढ़ेसाती का प्रथम ढैया प्रारंभ हो रहा है। शनि आपके एकादश और द्वादश भाव का स्वामी होकर द्वादश भाव में गोचर करेगा। व्यापार में परेशानी, कुटंबिक मतभेद, गृहक्लेश, शारीरिक पीड़ा, जीवनसाथी एवं संतान के लिए अरिष्टप्रद, कर्ज लेने की स्थिति आ सकती है, धनागम में परेशानी, आय से अधिक व्यय। जन्मस्थ शनि बलवान होने पर अच्छे परिणाम मिलेंगे। व्यावसायिक उन्नति, धनलाभ, मित्रों में वृद्धि, प्रेम में वृद्धि होगी।












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