Neelam: शनि का रत्न 'नीलम' पहनने से पहले जान लें ये खास बातें
नई दिल्ली, 14 जनवरी। शनि का रत्म नीलम अत्यंत तीव्र और शीघ्र प्रभाव दिखाने वाला रत्न होता है। इसे अच्छी तरह सोच-विचारकर और योग्य ज्योतिषी को अपनी कुंडली दिखाकर उसके अनुसार ही धारण करना चाहिए अन्यथा यह लाभ की जगह हानि भी देने लगता है। नीलम रत्न धारण करने में यह ध्यान रखा जाना अत्यंत आवश्यक है किवह रत्न पूरी तरह शुद्ध हो। नीलम की अशुद्धियों के कारण भी वह विपरीत प्रभाव देता है।

नीलम के नौ प्रकार के दोष
- प्राचीन रत्न शास्त्रों में नीलम के नौ प्रकार के दोष बताए गए हैं। आइए जानते हैं ये दोष-
- अभ्रक दोष : जब नीलम में अभ्रक का मिश्रण होता है तो उसकी आभा भी अभ्रक की तरह हो जाती है। अभ्रक दोषयुक्त नीलम धारण करने से धन की हानि होती है।
- मंदीदोष : जब नीलम रत्न मंद आभा वाला होता है। अधिक चमक वाला नहीं होता है तो ऐसा नीलम मंदी दोष वाला होता है। ऐसा नीलम धारण करने से कुष्ठ रोग हो जाता है।
- कड़कड़ाहट दोष : कड़कड़ाहट या कर्कराहट दोष युक्त नीलम में अनेक प्रकार की आड़ी-तिरछी रेखाएं होती है। ऐसे दोष युक्त नीलम धारण करने से जातक अनेक प्रकार के रोगों से ग्रसित हो जाता है।
- दोषयुक्त गर्भ वाला : जिस नीलम रत्न के भीतर मध्य में अनेक प्रकार के दोष होते हैं। रेखाएं, दाग-धब्बे, टूटन आदि होती है वह दोषयुक्त गर्भ वाला नीलम होता है। ऐसा नीलम धारण करने से मनुष्य अनेक परेशानियों में घिर जाता है।
- कठोर : जो नीलम कठोर, खुरदुरा होता है वह विपरीत प्रभाव देता है। ऐसा नीलम पहनना स्वयं अपने धन का नाश करना होता है।
- मलिन : यदि नीलम मलिन, मटमैला हो तो ऐसा नीलम मित्रों, स्वजनों से दूर करवा देता है। जो व्यक्ति ऐसा दोषयुक्त नीलम पहनता है वह अकेला रह जाता है।
- पथरीला : पथरीला नीलम धारण करने से अस्त्र-शस्त्र के घाव लगने का डर बना रहता है।
- मटीला : मिट्टी जैसे रंग वाला, कांतिहीन नीलम पहनना हानिकर होता है। यह अनेक प्रकार के कष्ट मनुष्य को देता है।
- विवर्ण : विवर्ण अर्थात अनेक वर्णो रंगों वाला। रंग-बिरंगा नीलम पहनने से हिंसक और जहरीले पशुओं का भय बना रहता है।












Click it and Unblock the Notifications