Palmistry: क्या आपके हाथ में भी बन रहा है चतुष्कोण....

नई दिल्ली। हस्तरेखा शास्त्र मूलत: रेखाओं और उनसे मिलकर बनी विभिन्न् आकृतियों का विश्लेषण करके भविष्य कथन करता है। इनमें कई तरह की आकृतियां बन सकती है। कुछ शुभ तो कुछ अशुभ होती है। आज जानते हैं हथेली में चतुष्कोण बनने का क्या अर्थ होता है। किन रेखाओं से मिलकर चतुष्कोण बने तो क्या कथन होता है। हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार हथेली पर जिस किसी भी रेखा के साथ या पर्वत पर चतुष्कोण बनता है, उस रेखा या पर्वत से संबंधित शुभ परिणामों में वृद्धि होती है। इस तरह हथेली पर चतुष्कोण होना शुभ माना गया है। लेकिन हथेली पर एक स्थान ऐसा भी है जहां चतुष्कोण होना ठीक नहीं माना जाता और वह स्थान है शुक्र पर्वत।

चौकोर आकृति चतुष्कोण कहलाती है

चौकोर आकृति चतुष्कोण कहलाती है

हथेली पर चार रेखाओं से मिलकर बनने वाली चौकोर आकृति चतुष्कोण कहलाती है। यह आकृति टेढ़ी-मेढ़ी और अलग-अलग लंबाई-चौड़ाई वाली हो सकती है। यदि हथेली की कोई रेखा स्पष्ट और निर्दोष है तथा उस पर चतुष्कोण बना हुआ है तो यह उस रेखा से प्राप्त होने वाले शुभ परिणामों को बढ़ा देता है। यदि रेखा टूटी हुई है और उस पर चतुष्कोण बन जाए तो उस टूटी रेखा के बुरे प्रभावों को कम कर देता है।

कहां-कैसा फल

कहां-कैसा फल

  • जीवन रेखा पर चतुष्कोण की उपस्थिति उम्र बढ़ाने वाली मानी गई है। यदि जीवन रेखा टूट रही हो और उस पर चतुष्कोण बना हो तो यह शारीरिक तकलीफों को कम कर देता है।
  • यदि हथेली पर कहीं नीले, काले या लाल बिंदु के निशान हों और उसके पास कहीं चतुष्कोण बन रहा हो तो यह अग्नि से व्यक्ति को रक्षा प्रदान करता है।
  • यदि हथेली में विवाह रेखा सीधी न चलकर नीचे की ओर झुक रही हो या आकार में गोल हो रही हो। तो यह स्थिति जीवनसाथी के स्वास्थ्य के लिए अच्छी नहीं मानी गई है। विवाह रेखा में दोष हो और उस पर चतुष्कोण बन जाए तो जीवनसाथी के स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियों में राहत मिलती है।
  • हथेली में भाग्य रेखा टूटी हुई हो तो

    हथेली में भाग्य रेखा टूटी हुई हो तो

    • हथेली में भाग्य रेखा टूटी हुई हो तो व्यक्ति को जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में असफलता सामना करना पड़ता है। लेकिन इस पर चतुष्कोण बन रहा हो तो भाग्य के रास्ते में आने वाली रूकावटें स्वत: दूर होती चली जाती हैं।
    • मंगल पर्वत हथेली में दो जगह होता है। एक तो जीवन रेखा के ठीक नीचे अंगूठे के पास और दूसरा हृदय रेखा के ठीक नीचे मस्तिष्क रेखा के पास। मंगल पर्वत दबा हुआ तो व्यक्ति में साहस की कमी रहती है। वह दब्बू किस्म का हो जाता है। लेकिन यदि मंगल पर्वत पर चतुष्कोण बन रहा हो तो व्यक्ति कभी अपने शत्रुओं से हारता नहीं है।
    • मस्तिष्क रेखा अधिक लंबी हो तो

      मस्तिष्क रेखा अधिक लंबी हो तो

      • शनि पर्वत खराब हो तो व्यक्ति गलत संगत में पड़कर गलत कार्य करने लगता है। इस पर यदि चतुष्कोण बना है तो व्यक्ति बुरी संगत में नहीं पड़ता और यदि पड़ भी गया है तो शीघ्र ही उससे बाहर आ जाता है। ऐसा व्यक्ति आगे चलकर समाज हित के कई कार्य करता है।
      • मस्तिष्क रेखा अधिक लंबी, जंजीरदार या कटी-फटी है तो व्यक्ति मानसिक रोगी होता है। यदि चतुष्कोण इस रेखा पर बना है तो व्यक्ति कभी निराश नहीं होता। मानसिक रूप से वह काफी मजबूत होता है।
      • हृदय रेखा पर चतुष्कोण बनने से व्यक्ति में गजब का आत्मविश्वास होता है। हृदय रेखा खराब होने से हृदय रोग हो सकते हैं, लेकिन इस पर चतुष्कोण होने से हृदय रोगों से बचाव होता है।
      • शुक्र पर्वत पर चतुष्कोण होना शुभ नहीं माना जाता। यदि ऐसा है तो वह व्यक्ति जेल जा सकता है, या दुष्कर्मी बनता है।
      • यदि चंद्र रेखा पर चतुष्कोण बना हुआ है तो व्यक्ति अपने जीवन में अनेक बार विदेश यात्राएं करता है।

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