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Vastu Tips: मकान बनाते समय भूखंड का रखें खास ख्याल

By Pt. Anuj K Shukla
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    लखनऊ। अगर आप घर बनवाने या खरीदने की सोंच रहें है तो वास्तु के बारें में विचार करना भी आवश्यक है। चॅूकि भवन में सकारात्मक ऊर्जा का वास रहने से ही घर में सुख व शान्ति का अनुभव होगा। भवन कई प्रकार के होते है जैसे-वर्गाकार भूखण्ड, आयताकार भूखण्ड, वृत्ताकार भूखण्ड, चतुष्कोणाकार, षटकोणाकार, अष्टकोणाकार, गोमुखाकार, सिंहमुखाकार, भद्रासन भूखण्ड, काकमुखी भूखण्ड आदि प्रकार के भवन होते है।

    चलिए जानते है कि किस प्रकार के भूखण्ड में निवास करने से क्या लाभ मिलता है... 

    वर्गाकार भूखण्ड

    वर्गाकार भूखण्ड

    जिस भवन की लम्बाई, चौड़ाई समान हो और प्रत्येक कोण 90 अंश का हो या चारों भुजायें समान हो। ऐसे भूखण्ड को वर्गाकार कहते है। यह भूखण्ड सर्वश्रेष्ठ प्रकार का होता है, इसमें निवास करने वाले लोग सदा सुखी व समृद्ध होते है।

    आयताकार भूखण्ड

    दो भुजाये बड़ी व दो भुजायें छोटी तथा जिसके चारों कोण 90 अंश के हो इस प्रकार के भूखण्ड को आयताकार कहते है। इस भवन में निवास करने वाले लोागों के पास धन-धन्य व पद-प्रतिष्ठा बनी रहती है। गृहस्थ जीवन के लिए यह भूखण्ड उत्तम होता है।

    वृत्ताकार भूखण्ड

    जो भूखण्ड गोले के आकार का हो उसे वृत्ताकार भूखण्ड कहते है। सन्यासी, सन्तों व अध्यात्मिक पुरूषों के निवास के लिए यह भवन उपयुक्त होता है। हमारा संसद भवन भी वृत्ताकर है, इसलिए वहाॅ पर कभी आपसी सहमति नहीं बन पाती है।

    यह भी पढ़ें:Vastu Tips: भवन में क्या करें और क्या न करें

    षटकोणाकार भूखण्ड

    षटकोणाकार भूखण्ड

    छह कोणों पर छह भुजाओं से युक्त भूखण्ड को षटकोणाकार भूखण्ड होता है। इस भूखण्ड पर निमार्ण करके रहने से दिन-दूनी, रात-चैगनी प्रगति होती है। घर के मुखिया का अपने परिवार पर पूरा नियन्त्रण रहता है।

    अष्टकोणाकार भूखण्ड

    जो भूखण्ड आठ कोणों व आठ भुजाओं से युक्त होता है उसे अष्टकोणाकार भूखणड कहते है। इस भूखण्ड में निमार्ण करके रहने से धन-धान की वृद्धि होती है एंव परिवार में आपसी प्रेम बना रहता है।

    गोमुखाकार भूखण्ड

    जिस भूखण्ड का फ्रंट कम होता है तथा पीछे की लम्बाई अधिक होती है। उसे गोमुखाकार भूखण्ड कहते है। इस प्लाट पर भवन बनाकर रहना अति-उत्तम माना जाता है। यह भवन व्यापारिक दृष्टिकोण से भी शुभ माना जाता है। इसमें आप रह भी सकते है और व्यापार भी कर सकते है। इसमें रहने वाले हर प्राणी का विकास होता है।

     सिंहमुखाकार भूखण्ड

    सिंहमुखाकार भूखण्ड

    जो भवन सामने से अधिक और पीछे से कम हो तो उसे सिंहमुखाकार भूखण्ड कहते है। ऐसे भूखण्ड पर भवन बनाकार रहना तो शुभ नहीं होता है किन्तु व्यापारिक प्रतिष्ठान के लिए यह भवन शुभ होता है।

    भद्रासन भूखण्ड

    जिस भूखण्ड की लम्बाई व चैड़ाई समान हो तथा मध्य भाग समतल हो तो उसे भद्रासन भूखण्ड कहते है। ऐसी भूमि पर भवन-निर्माण करके वास करने से सभी प्राकर के सुखों की प्राप्ति होती है। सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य, शान्ति और प्रगति ये सभी सुख प्राप्त होते है।

    काकमुखी भूखण्ड

    जो भूखण्ड आगे से संकरा और पीछे से चैड़ा हो तो उसे काकमुखी भूखण्ड कहते है। इस भूखण्ड पर मकान बनवाकर रहने से घर के मुखिया को लाभ होता है तथा अन्य सभी लोगों का विकास होता है।

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    English summary
    Shape and size of the plot: The best shapes for plots of land are square or rectangular, facing squarely on the four cardinal directions.

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