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मौत के मुंह से बचा लाती है मृत संजीवनी पूजा, महाशिवरात्रि पर पूर्ण करें पूजा

नई दिल्ली। जीवन में तरक्की करने, सफल होने से भी ज्यादा जरूरी है स्वस्थ रहना। यदि आप स्वस्थ नहीं रहेंगे तो जीवन की बाकी सारी चीजें बेकार हो जाती है। इसलिए हिंदू धर्म शास्त्रों में उत्तम स्वास्थ्य को सबसे ऊपर रखा गया है। अच्छे स्वास्थ्य की प्राप्ति और आकस्मिक रूप से आने वाली दुर्घटनाओं को टालने, उनसे बचने के लिए वैदिक ज्योतिष में कुछ विशेष पूजा विधान बताए गए हैं। उन्हीं में से एक है मृत संजीवनी पूजा। इसे महामृत्युंजय पूजा के नाम से भी जाना जाता है। यह पूजा भगवान शिव और मां गायत्री की सम्मिलित पूजा है, जिससे पूजा का संयुक्त फल उस जातक को मिलता है जो इसे स्वयं के स्वास्थ्य और आयु वृद्धि के लिए करता है। यह पूजा कोई भी जातक स्वयं के लिए या किसी दूसरे के निमित्त भी कर सकता है, लेकिन पूजा का पूरा विधि-विधान सही तरीके से करना होता है। यह पूजा महाशिवरात्रि के दिन समाप्त हो तो और भी ज्यादा अच्छा है। इस वर्ष महाशिवरात्रि 4 मार्च को आ रही है और संयोग से इस दिन सोमवार भी है।

कब और क्यों की जाती है मृत संजीवनी पूजा

कब और क्यों की जाती है मृत संजीवनी पूजा

यह पूजा किसी जातक के लिए तब भी जाती है जब लाख प्रयत्नों के बाद भी उसके स्वास्थ्य में सुधार नहीं होता है, जो जातक मरणासन्न् स्थिति में होता है, जिस जातक की बार-बार दुर्घटनाएं होती हैं। यह पूजा स्वस्थ व्यक्ति के लिए भी करवाई जा सकती है ताकि उसे जीवन में कभी किसी बड़े रोग या दुर्घटना का सामना ना करना पड़े और उसकी आयु और यश में वृद्धि हो। इस पूजा से व्यक्ति के जीवन धन, संपत्ति, वैभव और संपन्न्ता भी आती है।

कैसे की जाती है पूजा

कैसे की जाती है पूजा

भगवान शिव को समर्पित मृत संजीवनी पूजा में भगवान शिव के मंत्र का जाप प्रमुख रूप से किया जाता है। इस पूजा में सवा लाख या एक लाख 51 हजार मंत्रों का जाप किया जाता है। इसकी अवधि 7 दिन से लेकर 11 दिन तक होती है। आमतौर पर इस पूजा को किसी भी दिन प्रारंभ किया जा सकता है, लेकिन इसका समापन सोमवार के दिन होना चाहिए। यदि 7 दिन में सवा लाख या 151000 जाप पूरे करना है तो उसके हिसाब से 7 या 11 दिनों की अवधि तय कर लें और पूजा का अंतिम दिन सोमवार हो। मंत्र जाप जातक स्वयं भी कर सकता है या किसी पंडित से भी करवा सकता है, लेकिन पंडित से करवाएं तो ज्यादा बेहतर है, क्योंकि उससे पूर्ण विधि-विधान और मंत्रोच्चार सहित पूजा हो जाती है। यह पूजा एक या पांच पंडित मिलकर कर सकते हैं। प्रतिदिन के मंत्रों की संख्या निर्धारित कर लें। पूजा प्रारंभ करने से पूर्व जिस जातक के लिए पूजा की करवाई जाती है उसके नाम, गोत्र आदि का उच्चारण करते हुए संकल्प दिलवाया जाता है फिर मंत्र जाप प्रारंभ किए जाते हैं।

पूजा समाप्ति पर क्या करें

पूजा समाप्ति पर क्या करें

7 या 11 दिन की पूजा समाप्ति के दिन कुल मंत्रों की दशांश संख्या का हवन किया जाता है। यानी सवा लाख मंत्रों का जाप करवाया है तो 12 हजार 500 मंत्रों की आहूति दी जाती है। इसमें 3 से 4 घंटे का समय लगता है। हवन संपन्न् होने के बाद जाप करने वाले पंडितों को सपत्नीक भोजन करवाकर अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान-दक्षिणा देकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करें। मृत संजीवनी पूजा की विधि कियी योग्य पंडित के पास उपलब्ध होती है, उसी के अनुसार वह पूजा विधान संपन्न् करवा देता है।

क्या सावधानियां रखें

क्या सावधानियां रखें

इस पूजा के दौरान जिस जातक के लिए पूजा करवाई जा रही है उसके लिए कुछ विशेष नियमों का ध्यान रखना आवश्यक है। जिस जातक के निमित्त पूजा करवाई जा रही है वह पूजा प्रारंभ होने से समाप्त होने तक के दौरान मांसाहार, शराब और यौन संबंध बनाने से दूरी रखें। पूरी तरह संयम नियम का पालन करें। इस दौरान झूठ बोलना, चोरी करना, किसी का अपमान करना ठीक नहीं रहता है।

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