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आज से बदली गुरु की चाल, जानिए क्या होगा आप पर असर

लखनऊ। वैदिक ज्योतिष में बृहस्पति को ज्ञान, विवेक, संयम, उत्तम शिक्षण, सदाचार, सात्विक प्रवृत्ति, विवाह योग, कॅरियर, अर्थव्यवस्था का प्रतिनिधि ग्रह माना गया है। जिस जातक की जन्मकुंडली में बृहस्पति शुभ होता है, उस पर दूसरे बुरे ग्रहों का भी अधिक बुरा प्रभाव नहीं पड़ता है, लेकिन जिनकी कुंडली में बृहस्पति नेष्टकारी होता है उनके लिए समय कठिन होता है। लेकिन यह भी सच है कि जब-जब बृहस्पति अपनी राशि बदलता है, तब-तब विश्व में कोई बड़ा घटनाक्रम होता है। आज सुबह 6 बजे बृहस्पति मकर राशि में प्रवेश कर गया है। इस राशि में पहले से ही शनि और मंगल स्थित है, ऐसे में बृहस्पति का इन ग्रहों के साथ आना बड़ी घटनाओं का संकेत दे रहा है। हालांकि मंगल-शनि की युति के कारण पृथ्वी पर पड़ रहे दुष्प्रभाव बृहस्पति के कारण कुछ कम होंगे, लेकिन समय संकट का है। बृहस्पति इस राशि में 30 जून 2020 तक रहेगा और वक्री होकर पुनः धनु राशि में आ जाएगा। इसके बाद 20 नवंबर 2020 से मार्गी होकर पुनः मकर राशि में चला जाएगा। मकर राशि में जाकर बृहस्पति नीच का हो जाता है, इसलिए यह देश-दुनिया के साथ सभी राशि वालों के लिए ज्यादा शुभ नहीं कहा जा सकता।

कैसा रहेगा गोचर का प्रभाव

कैसा रहेगा गोचर का प्रभाव

मकरे च गुरौ चैव दुर्भिक्षं घोरदारूणम्।
विग्रहंयान्ति राजानः त्रिमासान्ते शुभं भवेत्।।

अर्थात: गुरु के मकर राशि में जाने से राजाओं में परस्पर वैर-विरोध होने से कुछ देशों में युद्ध और दुर्भिक्ष की स्थिति बने। प्राकृतिक प्रकोप होने पर विश्व के कुछ राष्ट्रों पर घोर विपत्ति दुर्भिक्ष जैसी स्थिति बने। धातु व धान्यादि में घट बढ़ के साथ भयंकर संकट का समय रहे। 22 मार्च से मंगल भी मकर राशि में आ गया है। इसकी शनि और गुरु से युति विश्व के लिए शुभप्रद नहीं है। शस्त्र भय, यान दुर्घटना, धार्मिक असहिष्णुता, प्राकृतिक प्रकोप से जन-धन को हानि होवे।

बृहस्पति के मकर राशि में गोचर का राशियों पर प्रभाव

बृहस्पति के मकर राशि में गोचर का राशियों पर प्रभाव

  • मेष: स्थान परिवर्तन, कुटुंबिक क्लेश, अपव्यय, सम्मान में कमी, मांगलिक कार्यों पर खर्च, रोगों में वृद्धि।
  • वृषभ: भाग्योदयकारी, धन-संपत्ति की प्राप्ति, कार्यों में लाभ, पद-प्रतिष्ठा में वृद्धि, स्वास्थ्य पर खर्च।
  • मिथुन: धन हानि, भाग्य की प्रतिकूलता, बीमारियों की अधिकता, पीड़ा, कार्य बाधा, परेशानी।
  • कर्क: व्यवसाय में सफलता, दांपत्य सुख, धन लाभ, प्रवास, भागीदारी में सफलता, रोग से दुख।
  • सिंह: शारीरिक पीड़ा, शत्रु नाश, ऋण मुक्ति, व्यय, संतान की चिंता।
  • कन्या: संतान सुख, धन प्राप्ति, शिक्षा में सफलता, मांगलिक कार्य, सात्विकता में वृद्धि।
  • तुला: कार्यों में रुकावट, मातृ कष्ट, अप्रिय प्रसंग, मित्रों से लाभ।
  • वृश्चिक: संतान को कष्ट, यात्रा में परेशानी, मित्रों से मतभेद, धन की कमी, रोगों में वृद्धि।
  • धनु: सम्मान में वृद्धि, सुख, शांति, शिक्षा में सफलता, श्रेष्ठ पद-प्रतिष्ठा की प्राप्ति, दवाइयों पर खर्च।
  • मकर: कार्य-व्यवसाय में बाधा, यात्रा में शारीरिक कष्ट, आर्थिक परेशानी, मानसिक-शारीरिक पीड़ा।
  • कुंभ: अपव्यय, मानसिक-शारीरिक कष्ट, स्वजनों से विरोध, यात्रा में कष्ट।
  • मीन: पद-प्रतिष्ठा में वृद्धि, धन लाभ, संतान सुख, व्यवसाय में हानि, शारीरिक कष्ट।
नीच राशि में बृहस्पति के गोचर में क्या करें

नीच राशि में बृहस्पति के गोचर में क्या करें

  • जिन राशि के जातकों के लिए गुरु नेष्टकारी हो वे गुरु की शांति के लिए बृहस्पति स्तोत्र, बृहस्पति कवच का पाठ करें।
  • गुरु मंत्र ऊं ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः या ऊं गुं गुरवे नमः के 19 हजार जाप स्वयं करें या पंडित से करवाएं।
  • गुरुवार का व्रत करें, पीले धान्य का भोजन करें एवं पीले वस्त्र गुरुवार को धारण करें।
  • श्रीहरि का नियमित पूजन करें। पीपल, केले के वृक्ष का पूजन करें।
  • गुरु यंत्र को घर में स्थापित करके पूजन करें। गुरु के बीज मंत्रों से हवन करें।
  • तर्जनी अंगुली में पुखराज रत्न या उपरत्न सुनहला- लाजवर्त मणि धारण करें।

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