Janmashtami 2022: उत्तम संतान और सुख-समृद्धि देता है जन्माष्टमी व्रत
Janmashtami उत्तम संतान और सुख-समृद्धि देता है जन्माष्टमी व्रत
भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाता है। इस बार जन्माष्टमी 18 और 19 अगस्त 2022 को मनाई जा रही है किंतु भगवान की कृपा पाने के लिए व्रत 19 अगस्त को किया जाएगा। जन्माष्टमी के दिन व्रत रखने का बड़ा महत्व है। शास्त्रों का कथन है किजन्माष्टमी का व्रत रखने से मनुष्य को सांसारिक सुख, सौंदर्य, आकर्षण, प्रेम, समृद्धि और उत्तम संतान सुख की प्राप्ति होती है।

जन्माष्टमी व्रत का नियम
जन्माष्टमी का व्रत सभी लोग कर सकते हैं। किंतु संतान सुख की प्राप्ति के लिए महिलाओं को यह व्रत अवश्य करना चाहिए, बल्कि दंपती को साथ में यह व्रत करना चाहिए। जिन दंपतियों की संतान नहीं हैं या संतान होने के बाद जीवित नहीं रहती, या संतान हमेशा बीमार रहती है तो उन्हें अपनी कामनापूर्ति का संकल्प लेकर यह व्रत करना चाहिए। इस व्रत से पापों की निवृत्ति व सुखों की वृद्घि होती है। व्रती को उपवास की पूर्व रात्रि में अल्पाहारी रहना चाहिए, साथ ही इंद्रियों पर काबू रखना चाहिए। तिथि विशेष पर प्रात: स्नान कर सूर्य, सोम (चंद्रमा), पवन, दिग्पति (चार दिशाएं), भूमि, आकाश, यम और ब्रह्म आदि को नमन कर उत्तर मुख बैठना चाहिए। हाथ में जल-अक्षत-कुश लेकर मास-तिथि-पक्ष का उच्चारण कर अपनी अभीष्ट कामना की पूर्ति का संकल्प लेना चाहिए। क्लीं कृष्णाय नम: मंत्र का जाप स्फटिक की माला से करना चाहिए। दिनभर निराहार रहें। क्षमता न हो तो फलाहार ले सकते हैं। रात्रि में 12 बजे श्रीकृष्ण का जन्म करवाकर प्रसाद ग्रहण कर व्रत खोला जाता है।
जन्माष्टमी व्रत के लाभ
- जन्माष्टमी का व्रत निसंतान दंपतियों को अवश्य करना चाहिए।
- जन्माष्टमी व्रत उन दंपतियों को करना चाहिए जिनकी संतान जीवित नहीं रहती।
- जिन स्ति्रयों की संतानें बीमार रहती हैं, उन्हें जन्मजात कोई रोग है, उन्हें जन्माष्टमी व्रत जरूर करना चाहिए।
- जिन दंपतियों की संतानें गलत रास्ते पर चली गई हैं, कहना नहीं मानती हैं, उन्हें भी जन्माष्टमी व्रत करना चाहिए।
- जन्माष्टमी व्रत से आकर्षण प्रभाव में वृद्धि होती है। फिर सब लोग आपकी बात मानने लगते हैं।
- इससे सौंदर्य में वृद्धि होती है। वाणी का ओज प्राप्त होता है।
- प्रेम की चाह रखने वाले युवक-युवतियों को जन्माष्टमी व्रत रखकर विधि विधान से श्रीकृष्ण का पूजन करना चाहिए।
- सुख-समृद्धि में वृद्धि करने के लिए जन्माष्टमी व्रत जरूर करें।












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