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Kundali: अपनी कुंडली से कैसे जानें कि आप पर भगवान की कृपा है?

नई दिल्ली, 04 मई। प्रत्येक मानव अपनी श्रद्धा-भक्ति और क्षमता के अनुसार देवी-देवता का पूजन करता है। कई लोगों पर भगवान की कृपा हो जाती और कई लोग लगातार कठिन परीक्षा से गुजरते रहते हैं। जिन पर भगवान की कृपा हो जाती है उनके जीवन में फिर किसी चीज का अभाव नहीं रह जाता है। आप पर भगवान की कृपा है या नहीं? या आगे भगवान की कृपा होगी या नहीं? यह जन्मकुंडली देखकर सरलता से बताया जा सकता है।

Kundali: अपनी कुंडली से कैसे जानें कि आप पर भगवान की कृपा है?

ये हैं जन्मकुंडली के कुछ संकेत

  • जन्मकुंडली में दशमेश यदि बुध हो और उस पर शुभ ग्रहों की दृष्टि पड़ रही हो तो जातक पर भगवान की कृपादृष्टि होती है।
  • नवमेश यदि उच्चस्थ हो, उस पर शुभ ग्रह जैसे पूर्ण चंद्र, बुध, गुरु, शुक्र की दृष्टि हो तो ऐसे जातक पर प्रभु कृपा होती है।
  • नवमेश यदि पूर्ण बली हो और उस पर गुरु की दृष्टि हो तो ऐसे जातक पर परमात्मा की पूर्ण कृपादृष्टि होती है।
  • लग्न के स्वामी अथवा लग्न पर नवमेश की दृष्टि होने से जातक पर भगवान की कृपा दृष्टि होती है।
  • नवमेश यदि बृहस्पति के साथ हो और षड्वर्गो में बली हो अथवा लग्नेश पर बृहस्पति की पूर्ण दृष्टि हो तो प्रभु कृपा होती है।
  • दशमेश केंद्रस्थ हो, नवमेश भी चतुर्थ भाव में हो तो ऐसा जातक प्रभु कृपा से अपने कार्यो से यश का भागीदार बनता है।

ईश्वर के प्रति आपका कैसा रहेगा प्रेम

  • झन्मांग के पंचम स्थान से ईश्वर के प्रति प्रेम-भक्ति तथा नवम भाव से धर्म का विचार किया जाता है। नवम और पंचम दोनों को मिलाकर मान की ईश्वर के प्रति भक्ति का पूर्ण विचार किया जाता है।
  • पंचम स्थान में यदि कोई पुरुष ग्रह सूर्य, मंगल, गुरु हो या उसकी दृष्टि पड़ती हो तो जातक ईश्वर के प्रति आसक्त होता है।
  • यदि पंचमभाव समराशि का हो और उस पर चंद्र या शुक्र की दृष्टि पड़ती या उसमें चंद्र या शुक्र हो तो मानव पर लक्ष्मी की कृपा होती है।
  • जन्मांग के किसी भी भाव में यदि चार या पांच ग्रह एक साथ बैठे हों तो जातक प्रभु भक्ति के सहारे संसार से विरक्त हो जाता है।
  • यदि दशम भाव में मीन राशि हो और उसमें बुध या मंगल बैठा हो तो ऐसा जातक आध्यात्मिक जीवन व्यतीत करता है।
  • दशमाधिपति नवम में हो और बली नवमेश बृहस्पति और शुक्र से दृष्ट या युत हो तो जातक प्रभु भक्ति के मार्ग पर चलता है।
  • नवमाधिपति बली और शुभ ग्रह हो तथा उस पर गुरु या शुक्र की दृष्टि हो तो जातक प्रभु का कृपा पात्र बन जाता है।

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