कितनी संतानें होंगी आपकी, ये भी लिखा है आपकी कुंडली में

नई दिल्ली। कई लोग अक्सर ज्योतिषियों से सवाल करते हैं कि उन्हें कितनी संतानों की प्राप्ति होगी। कितनी पुत्री और कितने पुत्र होंगे। होंगे तो उनका सुख मिलेगा या नहीं। इन सब प्रश्नों का उत्तर मनुष्य की जन्मकुंडली में मिल जाता है, लेकिन उसके लिए कुंडली का अत्यंत सूक्ष्मता से अध्ययन करने की जरूरत होती है। पति-पत्नी दोनों की कुंडलियों का अध्ययन करके जो परिणाम आए उसके अनुसार फलकथन करना चाहिए। इनमें स्त्री और पुरुष प्रधान ग्रहों की मुख्य भूमिका होती है।

यहां मैं आपको कुछ योग बता रहा हूं जिनसे पता लगाया जा सकता है कि किस दंपती को कितनी संतानें प्राप्त होंगी।

पंचम भाव संतान सुख का भाव

पंचम भाव संतान सुख का भाव

  • जन्म कुंडली में पंचम भाव संतान सुख का भाव होता है। इस भाव में जितने ग्रह हों और जितने ग्रहों की दृष्टि हों उतनी संख्या में संतान प्राप्त होती है।
  • पुरुष ग्रहों के योग और दृष्टि से पुत्र और स्त्री ग्रहों के योग और दृष्टि से कन्या की संख्या का अनुमान लगाया जाता है।
  •  शुभ ग्रहों की दृष्टि

    शुभ ग्रहों की दृष्टि

    पंचम भाव में सूर्य पर शुभ ग्रहों की दृष्टि हो तो तीन पुत्रों का योग बनता है। पंचम में विषम राशि का चंद्र शुक्र के वर्ग में हो या चंद्र शुक्र से युत हो तो पुत्र होते हैं।

    तीनों ग्रहों के स्पष्ट राश्यादि

    तीनों ग्रहों के स्पष्ट राश्यादि

    गुरु, चंद्र और सूर्य इन तीनों ग्रहों के स्पष्ट राश्यादि जोड़ने पर जितनी राशि संख्या हो उतनी संतानें होती हैं। पंचम भाव से या पंचमेश से शुक्र य चंद्रमा जिस राशि में हो उस राशि तक की संख्या के बीच में जितनी राशि संख्या हो उतनी संतान प्राप्त होती हैं। पंचम भाव से या पंचमेश से शुक्र या चंद्र जिस राशि में स्थित हो उस राशि तक की संख्या के बीच जितनी राशियां हों उतनी ही संतान संख्या समझनी चाहिए। उदाहरण के तौर पर यदि पंचम भाव में पहली राशि मेष हो और चंद्र मिथुन राशि में हो तो तीन संतानों का सुख मिलता है।

    पंचम भाव में गुरु हो

    पंचम भाव में गुरु हो

    पंचम भाव में गुरु हो, रवि स्वक्षेत्री हो, पंचमेश पंचम में ही हो तो पांच संतानें होती हैं। कुंभ राशि का शनि पंचम भाव में हो तो पांच पुत्र होते हैं। मकर राशि में 6 अंश 40 कला के भीतर का शनि हो तो तीन पुत्र होते हैं। पंचम भाव में मंगल हो तो ती पुत्र, गुरु हो तो पांच पुत्र, सूर्य-मंगल दोनों हो तो 4 पुत्र, सूर्य-गुरु हो तो 6 संतानें होती हैं, जिनमें पुत्र-पुत्री दोनों हो सकते हैं।

    शुक्र हो तो पांच कन्याएं होती

    शुक्र हो तो पांच कन्याएं होती

    पंचम भाव में चंद्रमा गया हो तो तीन ज्ञानी पुत्रियों की प्राप्ति होती हैं। शुक्र हो तो पांच कन्याएं होती हैं और शनि गया हो तो सात कन्याएं होती हैं।कर्क राशि का चंद्र पंचम भाव में हो तो अल्पसंतान योग होता है। पंचमेश नीच का होकर छठे, आठवें, 12वें भाव में पापग्रहों से युक्त हो तो दंपती संतान सुख से वंचित रहता है।

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