Jupiter: कुंडली के अशुभ बृहस्पति को अपने लिए कैसे बनाएं शुभ?
नई दिल्ली, 20 जुलाई। किसी भी जातक के जीवन पर बृहस्पति ग्रह का अत्यधिक प्रभाव पड़ता है। जीवन में मान-सम्मान, संयम, सदाचार, शील, धैर्य, प्रतिष्ठा, विवाह सुख आदि अनेक कारक बृहस्पति के ही प्रभावक्षेत्र में आते हैं। जन्मकुंडली में बृहस्पति ग्रह ठीक हो तो जातक को सभी प्रकार के सुख प्राप्त होते हैं, लेकिन बृहस्पति दूषित हो तो अनेक कष्ट जीवन में आते रहते हैं। बृहस्पति के अशुभ प्रभाव को अपने लिए शुभ बनाने के लिए अनेक उपाय किए जा सकते हैं। ये उपाय लाल किताब के अनुसार हैं।

- बृहस्पति यदि कुंडली में शुभ है और उसे और ज्यादा शुभ बनाना है तो अपने भोजन में किसी एक पदार्थ में शुद्ध केसर का उपयोग करना चाहिए। अपनी जिव्हा और नाभि पर केसर की बिंदी लगाने से बृहस्पति के शुभ प्रभाव में वृद्धि होती है।
- यदि किसी स्त्री या पुरुष की कुंडली में बृहस्पति खराब है तो उसे अनुकूल बनाना अत्यंत आवश्यक है। बृहस्पति की अनुकूलता के लिए चंदन का तिलक प्रतिदिन करना चाहिए।
- बृहस्पति खराब है तो विवाह सुख में भी बाधा आती है। यदि कन्या की कुंडली में बृहस्पति खराब है तो कन्या को दो समान वजन के स्वर्ण के टुकड़े लेना चाहिए और एक टुकड़े को बहते पानी में डाल दें और दूसरे को अपने पास रखें। ध्यान रखें कियह स्वर्ण का टुकड़ा किसी भी कीमत पर न बेचें। अपने पास ही रहने दें। जब तक यह स्वर्ण का टुकड़ा कन्या के पास रहेगा, उसका वैवाहिक जीवन सुखमय रहेगा। पति अनुकूल रहेगा। यदि कोई व्यक्ति स्वर्ण भेंट करने की स्थिति में न हो तो केसर व हल्दी की समान तौल वाली पुड़िया बनाकर भी इसी तरह काम में लाई जा सकती है।
- इसी प्रकार यदि सूर्य खराब हो तो तांबे की दो प्लेट, चंद्र खराब हो तो मोती या चावल, मंगल के लिए मूंगा, बुध के लिए सीप, शनि के लिए लोहे का टुकड़ा या काला सूरमा प्रयोग में लाया जा सकता है।
- गुरु अष्टम स्थान में अशुभ फलकारी हो तो पीली वस्तु, पीला अनाज आदि का दान विष्णु मंदिर में करें। पीपल के वृक्ष में नियमित रूप से जल अर्पित करना भी लाभकारी होता है।
- द्वादश स्थान में गुरु व्यक्ति को धनवान बनाता है लेकिन उसकी संतान भाग्यशाली नहीं होती है। ऐसी स्थिति में जातक को पीला तिलक मस्तक पर लगाना चाहिए। साधु, ब्राह्मण व पीपल की पूजा करनी चाहिए।












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