शंख की माला जप करने से रिद्धि-सिद्धि की प्राप्ति होती है...

लखनऊ। भारत में शंखों को विशिष्ट स्थान प्राप्त है। स्वर्ग में अष्टसिद्धि, नवनिधि में शंख को भी एक माना गया है। यह एक समुद्री जीव है, जिसे लक्ष्मी का सहोदर माना गया है। इसमें शत-प्रतिशत कैल्शियम पाया जाता है, जो धार्मिक कृत्य के साथ-साथ आयुर्वेद में भी प्रमुख है। यह तांत्रिक व सात्विक दोनों कार्यो में प्रयुक्त होता है। शिव साधना में भी इसे उत्तम माना गया है। शंख की माला जप करने से रिद्धि-सिद्धि की प्राप्ति होती है।

लक्ष्मी का सहोदर माना गया है शंख

लक्ष्मी का सहोदर माना गया है शंख

  • वाक् शक्ति-शंख की माला धारण करने से वाणी पर अधिकार आता है। जिससे आत्म-विश्वास में वृद्धि होती है।
  • धन वृद्धि-इसे लक्ष्मी का सहोदर माना गया है। अतः पूजन स्थान में रखने से व इसकी माला से श्रीसूक्त का नियमित पाठ करने से लक्ष्मी-विष्णु जी दोनों सहाय होते है, जिससे घर की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है।
  • माला से लगातार जप करने से मानसिक शान्ति मिलती है

    माला से लगातार जप करने से मानसिक शान्ति मिलती है

    • मानसिक शान्ति-इस माला से लगातार जप करने से मानसिक शान्ति मिलती है। साथ में ही जिनकी कुण्डली चन्द्र व शुक्र अशुभ फल दे रहें वे लोग शंख की माला से शुक्र या चन्द्र की शान्ति करेंगे तो अवश्य लाभ मिलेगा।
    • पारिवारिक शान्ति के लिए-अगर आपके परिवार में आये दिन व्यर्थ के विवादों से अशान्ति का माहौल बना रहता है तो शंख की माला गले में धारण करने से घर का वातावरण सुखद व प्रसन्नतादायक हो जााता है।
    •  बंद उद्योग को चालू कराने के लिए

      बंद उद्योग को चालू कराने के लिए

      किसी भी बिजनेस का उद्देश्य धन लाभ होता है किन्तु जब कोई लाभ नहीं होगा तो उद्योग बंद ही करना पड़ जाता है। बंद उद्योग के पूजन स्थान में एक शंख की माला रख दें और दूसरी शंख की माला से श्रीसूक्त पाठ को 40 दिन नियमित करने से बंद पड़ा उद्योग फिर चलने लगता है।

      पति-पत्नी में प्रेम बना रहें

      पति-पत्नी में प्रेम बना रहें

      यदि आये दिन जीवन साथी से हाय-हाय होती रहती है तो शंख की माला को पूरी विधि के साथ शुद्ध करके पति व पत्नी दोनों एक-एक माला अपने गले में धारण करें। ऐसा करने से आपस में मधुरता बनी रहती है।

      विधि

      विधि

      किसी भी शुक्ल पक्ष के प्रथम सोमवार या शुक्रवार के दिन प्रातः स्नान-ध्यान करके, दांए हाथ में जल, सुपारी, पुष्प आदि लेकर संकल्प करें फिर कलश स्थापना करें, धूप, दीप आदि जलाकर गुरू पूजन व गणेश-लक्ष्मी के मन्त्रों का जाप करने के बाद ही इस माला को धारण करना चाहिए।

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