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सही संख्या में करेंगे नवग्रहों के मंत्र का जाप तो ही मिलेगा शुभ परिणाम

नई दिल्ली। ज्योतिष के सिद्धांतों के अनुसार मनुष्य का संपूर्ण जीवन नवग्रहों से प्रभावित रहता है। व्यक्ति के जीवन में आने वाले सुख-दुख, उतार-चढ़ाव, लाभ-हानि, रोग आदि ग्रहों के अनुसार आते-जाते हैं। व्यक्ति परेशानियों से मुक्ति के लिए इन्हीं नवग्रहों या इनसे संबंधित देवी-देवताओं की पूजा करता है, उनके मंत्रों का जाप करता है, उन ग्रहों से संबंधित वस्तुओं का दान करता है। और इन सब कार्यों का शुभ और सकारात्मक परिणाम तभी मिलता है, जब इन्हें पूर्ण विधि-विधान और नियमों के साथ किया जाए।

आइये जानते हैं किस ग्रह को प्रसन्न करने के लिए कितने मंत्रों का किस समय जाप करना चाहिए और किन चीजों का दान करना चाहिए:

सूर्य: जन्म कुंडली में सूर्य खराब परिणाम दे रहा हो तो व्यक्ति को मान-सम्मान, पिता का सुख प्राप्त नहीं होता। उसके जीवन में तरक्की नहीं होती और हर कदम पर रूकावटें आती हैं। नेत्र रोग होते हैं। सूर्य को प्रसन्न करने के लिए उनके मंत्र ऊं ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः का 7 हजार बार जाप करना चाहिए। यह जाप सूर्योदय के समय करना होता है। सूर्य के निमित्त तांबा, गेहूं, गुड़, लाल कमल, गौ, केसर, लाल कपड़े का दान किया जाता है।

मानसिक स्थिति

मानसिक स्थिति

  • चंद्र: चंद्र खराब होने पर व्यक्ति को मानसिक रोग परेशान करते हैं। उसकी मानसिक स्थिति खराब रहती है। आत्मविश्वास की कमी रहती है। मिर्गी और फेफड़ों के रोग होते हैं। चंद्र को प्रसन्न करने के लिए ऊं श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्राय नमः मंत्र का 11 हजार जाप शाम के समय करें। चंद्र के निमित्त चांदी, मोती, शंख, चावल, मिश्री, सफेद फूल और कपूर दान करें।
  • मंगल: मंगल की अशुभता से व्यक्ति भयभीत रहता है। उसके पराक्रम, बल में कमी बनी रहती है। रक्त संबंधी बीमारियां उसे घेरे रहती है और विवाह कार्य में रूकावट आती है। मंगल को प्रसन्न करने के लिए ऊं क्रां क्रीं क्रौं सः मंगलाय नमः मंत्र के 10 हजार जाप सूर्योदय के समय करें। मंगल के निमित्त तांबा, गुड़, गेहूं, शक्कर, लाल कपड़ा, मसूर की दाल, लाल चंदन का दान करें।
  • ऊं ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः मंत्र

    ऊं ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः मंत्र

    • बुध: बौद्धिक चतुराई, व्यापार-व्यवसाय का प्रतिनिधि ग्रह बुध अशुभ हो तो व्यक्ति हर मोर्चे पर असफल साबित होता है। बुध को प्रसन्न करने के लिए ऊं ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः मंत्र के 9 हजार जाप सूर्योदय से पहले करें। बुध को अनुकूल बनाने के लिए हरा कपड़ा, मूंग, कांस्य पात्र, घी, और मिश्री का दान करना श्रेष्ठ रहता है।
    • गुरु: वैवाहिक कार्य, तर्क शक्ति और पद-प्रतिष्ठा बृहस्पति शुभ हो तभी मिलते हैं। अन्यथा नहीं। गुरु को प्रसन्न करने के लिए ऊं ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः मंत्र के 19 हजार जाप शाम के समय करें। सोना, लड्डू, चने की दाल, पीले कपड़े, हल्दी, नमक दान करने से गुरु की अनुकूलता प्राप्त होती है।
    • शनि ठीक नहीं हो तो पूरा जीवन कष्टों और अभावों में गुजरता है

      शनि ठीक नहीं हो तो पूरा जीवन कष्टों और अभावों में गुजरता है

      • शुक्र: सुख, सौंदर्य, भोग विलास और भौतिक सुख शुक्र से ही प्राप्त होते हैं। इसलिए शुक्र को प्रसन्न करने के लिए ऊं द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः के 16 हजार जाप करें और श्वेत वस्त्र, श्वेत चंदन, घी, चावल, चीनी, दूध, दही का दान करें।
      • शनि: शनि ठीक नहीं हो तो पूरा जीवन कष्टों और अभावों में गुजरता है। शनि को प्रसन्न करने के लिए ऊं प्रां प्री प्रौं सः शनये नमः मंत्र के 23 हजार जाप दोपहर के समय करें। तिल, तेल, उड़द, लौह पात्र, काला कपड़ा दान करें।

      राहु को प्रसन्न करना जरूरी

      राहु को प्रसन्न करना जरूरी

      • राहु: राहु को प्रसन्न करने के लिए ऊं छ्रां छ्रीं छ्रौं सः राहवे नमः के 18 हजार जाप आधी रात को करें। राहु की अनुकूलता पाने के लिए कंबल, तिल, तेल, नारियल, सीसा का दान करें। राहु अशुभ हो तो व्यक्ति दुश्मनों से घिरा रहता है।
      • केतु: केतु के लिए ऊं स्त्रां, स्त्रीं, स्त्रौं सः केतवे नमः मंत्र के 18 हजार जाप सूर्योदय से पूर्व करें। तिल, कंबल, चीनी का दान करने से केतु प्रसन्न होंगे।

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