पितृ अमावस्या पर 20 साल बाद बना शनैश्चरी अमावस्या का संयोग

नई दिल्ली। पितरों की शांति और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के सोलह दिन यानी पितृ पक्ष भाद्रपद माह की पूर्णिमा तिथि 13 सितंबर 2019 से प्रारंभ हो रहे हैं। पूर्णिमा का पहला श्राद्ध और फिर आश्विन माह के कृष्ण पक्ष के पंद्रह दिन मिलकर कुल 16 दिनों का श्राद्ध पक्ष होता है। पंचांगों के अनुसार शतभिषा नक्षत्र में शुरू हो रहे पितृ आराधना के पर्व में पितरों के निमित्त श्राद्ध करने से सौ प्रकार के तापों से मुक्ति मिलेगी। खास बात यह है कि श्राद्ध पक्ष का समापन 28 सितंबर को शनैश्चरी अमावस्या के संयोग में होगा। सर्वपितृ अमावस्या पर शनिवार का संयोग 20 साल बाद बन रहा है।

सर्वपितृ अमावस्या

सर्वपितृ अमावस्या

आश्विन माह के कृष्ण पक्ष के पंद्रह दिन पितरों के माने गए हैं। इसे श्राद्ध पक्ष कहा जाता है। जिन परिजनों की मृत्यु पूर्णिमा के दिन होती है उनके लिए भाद्रपद माह की पूर्णिमा के दिन श्राद्ध किया जाता है। इस प्रकार श्राद्ध पक्ष सोलह दिनों का हो जाता है। इस बार पूर्णिमा पर 13 सितंबर शुक्रवार को शतभिषा नक्षत्र, धृति योग, वणिज करण एवं कुंभ राशि के चंद्रमा की साक्षी में श्राद्ध पक्ष का आरंभ हो रहा है। शास्त्रीय गणना से देखें तो पूर्णिमा तिथि के स्वामी चंद्रमा हैं। शतभिषा नक्षत्र के स्वामी वरुण देव तथा धृति योग के स्वामी जल देवता हैं। पितृ जल से तृप्त होकर सुख- समृद्धि तथा वंश वृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। इसलिए श्राद्ध पक्ष की शुरुआत में पंचांग के पांच अंगों की इस स्थिति को अतिविशिष्ट माना जा रहा है।

पांच गुना शुभफल प्रदान करेगा नक्षत्र

पांच गुना शुभफल प्रदान करेगा नक्षत्र

श्राद्ध पक्ष का आरंभ शतभिषा नक्षत्र में हो रहा है। नक्षत्र मेखला की गणना से देखें तो शतभिषा के तारों की संख्या 100 है। इसकी आकृति वृत्त के समान है। यह पंचक के नक्षत्र की श्रेणी में आता है। यह शुक्ल पक्ष में पूर्णिमा के दिन विद्यमान है। इसलिए यह शुभफल प्रदान करेगा। श्राद्ध पक्ष में श्राद्धकर्ता को पितरों के निमित्त तर्पण पिंडदान करने से लौकिक जगत के सौ प्रकार के तापों से मुक्ति मिलेगी। वहीं वणिज करण की स्वामिनी माता लक्ष्मी हैं। ऐसे में विधि पूर्वक श्राद्ध करने से परिवार को माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होगी।

किस दिन कौन सी तिथि का श्राद्ध

किस दिन कौन सी तिथि का श्राद्ध

  • 13 सितंबर- पूर्णिमा का श्राद्ध
  • 14 सितंबर- सुबह 10.03 बजे तक पूर्णिमा तिथि रहेगी। पश्चात प्रतिपदा लगेगी।
  • 15 सितंबर- दोपहर 12.23 बजे तक प्रतिपदा तिथि रहेगी। पश्चात द्वितीया लगेगी।
  • 16 सितंबर- दोपहर 2.35 बजे तक द्वितीया तिथि रहेगी। पश्चात तृतीया लगेगी।
  • 17 सितंबर- तृतीया का श्राद्ध
  • 18 सितंबर- चतुर्थी का श्राद्ध
  • 19 सितंबर- पंचमी का श्राद्ध
  • 20 सितंबर- षष्ठी का श्राद्ध
  • 21 सितंबर- सप्तमी का श्राद्ध
  • 22 सितंबर- अष्टमी का श्राद्ध
  • 23 सितंबर- नवमी का श्राद्ध
  • 24 सितंबर- दशमी का श्राद्ध
  • 25 सितंबर- एकादशी का श्राद्ध
  • 26 सितंबर- द्वादशी प्रातः 11.02 बजे तक, उपरांत त्रयोदशी
  • 27 सितंबर- त्रयोदशी प्रातः 7.31 बजे तक, उपरांत चतुर्दशी, इस दिन त्रयोदशी-चतुर्दशी का श्राद्ध होगा।
  • 28 सितंबर- सर्वपितृ अमावस्या

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