Nav Samvatsar 2078: 13 अप्रैल से शुरू होगा नव संवत्सर 2078, राजा-मंत्री होंगे मंगल
नई दिल्ली। हिंदू नव संवत्सर विक्रम संवत 2078 'आनंद' और शालिवाहन शके 1943 का प्रारंभ चैत्र शुक्ल प्रतिपदा 13 अप्रैल 2021, मंगलवार को होगा। शिव विंशति में इस आनंद नामक संवत्सर की गणना आठवें क्रमांक पर होती है। इस नव वर्ष के राजा और मंत्री दोनों का कार्यभार अग्नि तत्व के प्रतीक मंगल ग्रह के पास रहेगा। सस्येश शुक्र, धान्येश गुरु, मेघेष मंगल, रसेश रवि, नीरसेश शुक्र, फलेश चंद्र, धनेश शुक्र और दुर्गेश मंगल होंगे। इस प्रकार ये 10 अधिकारी होंगे। इनमें से पांच गृह मंडल में पांच स्थान सौम्य ग्रह को प्राप्त हुए हैं और पांच स्थान कू्रर ग्रहों को प्राप्त हुए हैं।

वर्ष का फल मिश्रित रहेगा। ग्रह परिषद के अनुसार जहां संक्रमणजनित रोग बढ़ने के योग बन रहे हैं, वहीं व्यापारी-व्यवसायी के लिए लाभ के अवसर उत्पन्न होंगे। इस बार संवत्सर के नाम को लेकर भी संशय बना हुआ है। मतमतांतर और पंचांग भेद के कारण कहीं इसे आनंद तो कहीं राक्षस नामक संवत्सर कहा जा रहा है।
यह रहेगा आनंद संवत्सर का वर्ष फल
इस बार मंगल के पास राजा और मंत्री के महत्वपूर्ण पद हैं। नव वर्ष का शुभारंभ जिस वार से होता है, वही वर्ष का राजा होता है। नववर्ष का प्रारंभ मंगलवार से हो रहा है। मंगल के प्रभाव से अग्नि के साथ जनधन का क्षय होने की घटना होती है। प्राकृतिक प्रकोप, लोगों में सदाचार की कमी, आपराधिक घटनाओं में वृद्धि आदि होती है। साथ ही धान्य आदि के भावों में तेजी आएगी। अध्यात्म के मार्ग पर चलने वालों को राहत और अन्य को पीड़ा का अनुभव होता है। इसके अलावा धान्येश गुरु होने से शासन नवनीति का गठन करेगा जिससे धान्य की उपलब्धता सुलभ होगी। इसके अलावा दुर्गेश मंगल होने के कारण राष्ट्र में आंतरिक विरोध, पड़ोसी देशों से तनाव चलता रहेगा। अच्छी बारिश के योग भी बन रहे हैं।
नव संवत्सर के नाम पर संशय
हिंदू नव संवत्सर के नाम पर संशय है। कुछ में नव संवत्सर का नाम आनंद तो कुछ में राक्षस बताया गया है। ज्योतिष ग्रंथों के अनुसार कुल 60 संवत्सरों का उल्लेख मिलता है। संवत्सर 2077 का नाम प्रमादी था। इस हिसाब से आने वाले संवत्सर 2078 का नाम आनंद होगा। हालांकिआनंद का लोप बताते हुए कुछ पंचांग नवसंवत्सर का नाम राक्षस बता रहे हैं।












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