केदारनाथ में तबाही के ज्योतिषीय कारण
परमात्मा के द्वारा इन्सान को दिया गया एक अनमोल उपहार है प्रकृति। प्रकृति से हमें जल, अग्नि, वायु, रोशनी आदि सभी वह तत्व मिलते है, जो जीवन का मूल आधार है। इन तत्वों के बगैर जीवन सम्भव ही नहीं है। प्रकृति हमसे कुछ लेने की इच्छुक नही, वह तो सिर्फ देना जानती है। प्रकृति की रक्षा से ही जीवन सुरक्षित रह सकता है। इन्सान अपनी बढ़ती लिप्साओं को पूर्ण करने के लिए प्रकृति के साथ खिलवाड़ कर रहा है और जिसके परिणाम भयावह आ रहें है। प्रकृति कभी भी असन्तुलन बर्दास्त नहीं कर सकती है इसलिए वह जब पुनः सन्तुलन स्थापित करने का प्रयास करती है, तो एक भयावह नजारा सामने आता है।
उत्तराखण्ड में इन्द्रदेव की वक्र दृष्टि से तबाही का तहलका मचा हुआ है। बारह ज्योतिर्लिंगो में से एक केदारनाथ मन्दिर के आस-पास सबसे ज्यादा तबाही आयी है आखिर ऐसा क्यों? 9 नवम्बर 2000 ई को जब नया राज्य उत्तराखण्ड बना तो उसका नाम उत्तरांचल था। जो टिहरी के डूबने के बाद बना था। लेकिन जब से इस राज्य का नाम उत्तराखण्ड पड़ा है तब से वहां तबाही आने का सिलसिला जारी है।

उत्तरकाशी में साल 2012 में तबाही आ चुकी है और सन् 2013 ने तो ऐतिहासिक तबाही का रूप ले लिया है। आइये जानते है कि उत्तरांचल से बने उत्तराखण्ड में इतनी तबाही क्यों आ रही है? अंक ज्योतिष के अनुसार उत्तराखण्ड का नामांक, मूलांक और भाग्यांक क्रमशः इस प्रकार है। अंक 8, अंक, 9 और अंक 4 हैं। अंक 8 का स्वामी शनि ग्रह, अंक 9 का प्रतिनिधित्व मंगल ग्रह कर रहा है एंव अंक 4 सूर्य का नाकारात्मक अंक है। यह सर्वविदित है कि मंगल और शनि अपास में शत्रुता का भाव रखते है। शनि बड़े से बड़ा तूफान लाने का संकेतक है और मंगल सहयोगी की भूमिका निभाता है।
अंक ज्योतिष में नाम के अक्षरों का विशेष महत्व माना गया है। उत्तरांचल से बने उत्तराखण्ड में अक्षर के जुड़ जाने से अशुभता आ गयी है। अंक 2 का स्वामी चन्द्रमा। चूंकि चन्द्रमा जल का कारक है, इसलिए उत्तराखण्ड में आये दिन जल से तबाही एंव बड़े नुकसान हो रहें है। उत्तरकाशी में सन् 2012 में बादल फटने से काफी जनहानि हुई थी। क्योंकि उत्तरकाशी का नामांक हुआ 2 अंक, सन् 2012 में दो बार 2 अंक आया एंव उत्तरकाशी के नाम में भी अक्षर जुड़ा है। इसलिए उत्तरकाशी में आसमान ने आफत मचायी। इसी प्रकार क अक्षर के विशेष योग बनने पर आया है केदारनाथ में ऐतिहासिक तबाही आयी है।
उत्तराखण्ड में कांग्रेस की सरकार में केदारनाथ में प्रकृति का कहर बरपा है। जिस दिन तबाही आयी है, उस दिन सोमवार था। सोमवार चन्द्र का दिन है एंव 2 अंक का प्रतिनिधित्व करता है। केदारनाथ में भी क अक्षर सम्मलित है। जिस कारण इतने व्यापक रूप में यहां तबाही आयी है।












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