सोमवती अमावस्या: राशियों के मुताबिक करें भोलेनाथ का पूजन

सोमवार से युक्त अमावस्या को सोमवती अमावस्या कहते है। यद्यिप चतुदर्शी से युक्त अमावस्या को किसी कार्य में नहीं लिया जाता है। सोमवती अमवस्या सांयकाल में दो घड़ी भी मिल जायी तो ली जाती है। यद्यिप अमावस्या को सभी तिथियों में एक विशेष पर्व माना गया है, किन्तु सोमवती अमावस्या का पुराणों में विशेष महात्म्य बतलाया गया है। सोमवती अमावस्या भी स्नान दान का पर्व है।

धार्मिक ग्रन्थों में उल्लेख है कि इस दिन स्नान-दान करने से पापों का नाशों होता है। इस दिन व्रत रहकर मौन स्नान-दान करने से सन्तान को सुख एवं परिवार में शान्ति व समृद्धि बनी रहती है। स्त्रियों को वैधव्य नहीं होता और चिरकाल तक सौभाग्य मिलता रहता है। अमावस्या पितृकार्य का दिन है और चन्द्रलोक ही पितृलोक का निवास स्थान है। अतः अमवस्या के दिन सोमवार का पड़ना विशेष पुण्यकाल का योग माना जाता है। सोमवार को शनि भी मार्गी हो रहा है, इसलिए इस बार की सोमवती अमावस्या अद्भुत फलदायक सिद्ध होगी।

पूजन विधि- प्रातःकाल उठकर अपने नित्यकर्म से निवृत होकर मौन रहकर स्नान करके साफ वस्त्र धारण करें। यदि सम्भव हो तो सकंल्प लें अथवा ह्रदय में भगवान विष्णु का ध्यान करते हुये पीपल वृक्ष के समीप जाकर वृक्ष की जड़़ में निम्न मन्त्र "ऊॅ विष्णवे नमः" कम से कम एक माला जाप करें। तत्पश्चात पीपल वृक्ष की 108 बार परिक्रमा करें एंव साथ में कच्चा सूत चपटते जाये। प्रदक्षिणा के पश्चात पूजन की सारी सामग्री एंव यथा शक्ति दक्षिणा ब्राम्हण को दें दे।

विशेष-

1- इस दिन स्त्रियां तुलसी व पार्वती पर सिन्दूर चढ़ाकर अपनी माॅग में लगा लें जिससे अखण्ड सौभाग्यवती बनी रहेंगी। स्त्रियाॅ आज के दिन निम्न वस्तुयें जैसे- कपड़ा, गहना, बरतन, अनाज अथवा कोई भी खाने की वस्तु वस्तुयें दान कर सकती है जिससे उनके जीवन में प्रगति के मार्ग प्रशस्त होंगे एंव परिवार व समाज में उनका मान-सम्मान होगा।

2- जिन जातकों की जन्मपत्रिका कालसर्प दोष से युक्त है, वे लोग सोमवती अमवस्या पर चांदी के बने नाग-नागिन की विधिवत पूजा करें और उन्हे नदीं में प्रवाहित कर दें। यह उपाय करने से कालसर्प दोष से छुटकारा मिलेगा।

अमावस्या सोमवार को पड़ रही है और सोमवार दिन भगवान शंकर का है। अतः राशियों के मुताबिक करें भोलेनाथ का पूजन

मेष

मेष

मेष- इस राशि वाले जातक शिव जी का दूध से अभिषेक करें एंव रूद्राष्टक का पाठ करें।

वृष

वृष

वृष- शिवजी को बिल्वपत्र चढ़ाये एंव नागेश्वराय मन्त्र की कम से कम एक माला का जाप करें।

मिथुन

मिथुन

मिथुन- अष्टगंध से शिव जी का पूजन करें तथा ऊॅ नमः शिवाय का जाप करें।

कर्क

कर्क

कर्क- गंगा जल से शिव जी का अभिषेक करें और गणेश स्त्रोत का पाठ करें।

सिंह

सिंह

सिंह- पंचामृत से शंकर भोले का अभिषेक करें तथा साथ में पंचाक्षरी मन्त्र का जाप करें।

कन्या

कन्या

कन्या- बिल्वपत्र व भांग से शिव जी का पूजन करें और शिव चालीसा का पाठ करें।

तुला

तुला

तुला- दूध व शहद से शंकर जी का अभिषेक करें एंव रूद्राष्टक का पाठ करें।

वृश्चिक

वृश्चिक

वृश्चिक- लाल फूल, धतूरा व भांग से शिव जी का पूजन कर महामृत्युजंय मन्त्र का जाप करें।

धनु

धनु

धनु- पीले फूल, अष्टगंध, धतूरा आदि से पूजन कर शिव चालीसा का पाठ करें।

मकर

मकर

मकर- शिव जी का दही से अभिषेक कर शमी पत्ती चढ़ायें और लघु मृत्युजंय का जाप करें।

कुम्भ

कुम्भ

कुम्भ- अष्टगंध, शमी की पत्ती, घतूरा, फल-फूल से पूजन करे एंव पंचाक्षरी मन्त्र का जाप करें।

मीन

मीन

मीन- गन्ने के रस से शिव जी का अभिषेक करें और नागेश्वराय मन्त्र का जाप करें।

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