कांग्रेस में बड़ा चमत्कार नहीं कर पायेंगी प्रियंका गांधी

बड़ी ताजा खबर है कि कांग्रेस प्रियंका गाधी को अगामी लोकसभा चुनाव में भावी प्रधानमन्त्री के रूप में पेश करके भारत की भावुक जनता को लुभाने का प्रयास करेगी। जनता जनार्दन है, ये तो सत्य है, लेकिन जनता राजनीति के प्रति जागरूक नहीं है। यह एक घोर बिडम्बना भी है। शायद इसलिए चुनाव से कुछ समय पूर्व राजनीतिक दल जनता की स्वार्थी नसों को टटोलने लगते है और इसमें काफी हद तक कामयाब भी होते है।
आइये एक नजर प्रिंयका गाधी की कुण्डली पर डालते और देखेते है कि कांग्रेस के लिए कितना लाभकारी साबति होगी?
प्रियंका का जन्म तुला लग्न और विशाखा नक्षत्र में हुआ है। तुला राशि एक चर राशि है, जिसका स्वामी शुक्र है। जिस कारण सन्तुलित एंव प्रेरक दिमाग के साथ-2 तर्कशाील बुद्धि की भी धनी है। आपकी राय व दिशायें ज्यादा समय तक स्थायी नहीं रहेंगी। किसी भी महत्वपूर्ण कार्य में घुसने की पहल करने की तथा कि्रयाओं का आकलन करने की आप में अदभुत क्षमता है।
कुंडली कहती है स्वतंत्र विचारधारा की हैं प्रियंका
विशाखा नक्षत्र में जन्म होने से स्वभाव में नम्रता एंव भाषण कला में चतुरता हासिल है। आकर्षक, परम्परावादी और स्वतंत्र विचारधारा की आप धनी है। तृतीय का सूर्य दृढ़ इच्छा शकित व सिथर स्वभाव का मालिक बनाता है और चुनाव लड़ने या किसी स्थान पर आधिपत्य दिलाता है। आपके अधीनस्थ प्रेम पूर्वक कार्य करने वाले होंगे।
वर्तमान में प्रियंका की जन्मपत्री में बुध की महादशा में चन्द्र की अन्तर दशा चल रही है, जो जनवरी 2014 तक रहेगी। चन्द्र दशमेश होकर लग्न भाव में सिथत है। अत: इस कार्यकाल में प्रियंका को संगठन की कोर्इ बड़ी जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।
फरवरी 2014 से बुध की दशा में मंगल की अन्तरदशा प्रारम्भ हो रही है। मंगल दूसरे एंव सातवें भाव का मालिक होकर छठें भाव में बैठकर शत्रुहंता योग का निर्माण कर रहा है। दूसरा भाव वाणी का कारक होता है एंव सातवा भाव यात्रा का संकेतक होता है। इसलिए अगामी लोकसभा चुनाव में प्रियंका पूरे देश में सभायें करके अपनी वाणी से जनता को लुभाने एंव विरोधियों को मुह-तोड़ जवाब देने की पूरी कोशिश करेंगी। फरवरी माह में प्रियंका गाधी के फेफड़ों में संक्रमण होने की आशंका नजर आ रही है।
कांग्रेस की राशि मिथुन है तथा प्रियंका की राशि तुला है। इन दोनों राशियों के स्वामी आपस में मैत्री भाव रखते है, इसलिए प्रियंका की मेहनत कांग्रेस के डूबते जनाधार में तिनका का सहारा तो साबति हो सकती है, लेकिन कोर्इ बड़ा चमत्कार हो पाना असम्भव नजर आ रहा है।












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