जानिए क्या हैं लाल किताब की विशेषताएं

उसी प्रकार से ये वस्तुयें भी इन ग्रहों के समान प्रभावकारी होती है। जैसे- केसर बृहस्पति ग्रह से सम्बन्धित वस्तु है, अतः केसर का प्रयोग करने से व्यक्ति का बृहस्पति ग्रह बलवान हो जाता है। इसी प्रकार से अन्य निर्बल ग्रहों को उससे से सम्बन्धित वस्तुओं का प्रयोग करके सबल किया जा सकता है।
ज्योतिष विद्या में जैसा कि माना जाता है कि ग्रहों का प्रभाव निश्चित है और उसमें कोई अन्तर या परिवर्तन नहीं किया जा सकता है। किन्तु ’लाल किताब विद्या’ के अनुसार यदि कोई ग्रह अशुभ फल दे रहा है, तो उसके प्रतिकूल प्रभाव को उपायों एंव टोटकों द्वारा अनुकूल रूप में परिवर्तित किया जा सकता है। इस विद्या की तीसरी विशेष बात यह है कि यह विद्या कर्मफल सिद्धान्त पर आधारित है।
जैसे मंगल ग्रह का प्रभाव उस व्यक्ति के अपने भाई से सम्बन्ध कैसे है? क्योंकि भाई से मधुर सम्बन्ध होने पर शुभ फल एंव इसके विपरीत होने पर अशुभ फल मिलेंगे। मुख्य रूप इस विद्या में ग्रहो के अशुभ प्रभाव को दूर करने के लिए उपाय, आचरण तथा टोटके दिये गये है, जो काफी प्रभावशाली देंखे गयें है। क्योंकि ये काफी सरल है तथा व्यक्ति इन्हे आसानी से कर सकता है। हाॅलाकि उपाय बहुत सरल होते है, परन्तु उनमें विधि-विधान की जटिलतायें होती है। यदि श्रद्धा एंव विश्वास के साथ उपाय और टोटके किये जायें तो अनुकूल परिणाम सामने आते है।












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