आडवाणी को पीएम की कुर्सी तक ले जायेगा रथ: ज्‍योतिष

LK Advani
आडवाणी की रथ यात्रा उत्‍तर प्रदेश से निकल कर मध्‍य प्रदेश में प्रवेश कर चुकी है। इस बीच अभी तक सबसे बड़ी खलल पत्रकारों को नोट बांटने के मामले के रूप में आयी है। आगे क्‍या-क्‍या होता है, यह तो वक्‍त बतायेगा, लेकिन क्‍या यह यात्रा कैसे परिणाम लायेगी इस पर लखनऊ के ज्‍योतिषाचार्य पं. अनुज के शुक्‍ला की भविष्‍यवाणी-

शरद ऋतु की वृद्धा अवस्था में राजनैतिक यात्राओं का दौर शुरू हो गया है। प्रथम घोषणा लालकृष्ण आडवाणी ने की थी। प्रधानमंत्री की दावेदारी पर मजबूत पकड़ बनाये रखने के लिए आडवाणी नया पैंतरा खेल रहें है। जिस रथ यात्रा की योजना आण्डवाणी ने बनायी थी, दरसल संघ को उस पर विश्वास नहीं था। संघ का मानना है कि अगर राममंदिर आंदोलन के समय निकाली गयी यात्रा को छोड़ दें, तो आडवाणी की अन्य यात्रायें विफल रही हैं। आइये जानते है कि पहली रथ यात्रा की तुलना में आडवाणी की छठी यात्रा के दूरगामी परिणाम क्या होंगे?

भारत के पूर्व उप प्रधानमंत्री आडवाणी ने अपने जीवन की छठी रथ यात्रा 11 अक्टूबर दिन मंगलवार को सिताब-दियारा से प्रारम्‍भ कर की। आण्डवाणी की जनचेतना यात्रा के समय क्षितिज पर मकर लग्न उदित हो रहा था। मकर राशि एक चर राशि है, जो यात्रा को गतिशील एंव सक्रिय बनायें रखेगी। लग्नेश व द्वितीयेश शनि जो यात्रा का कारक होते हुये, भाग्यभाव में अपनी मित्र राशि कन्या में स्थित है एंव उसकी तृतीय दृष्टि एकादश भाव पर पड़ रही है। शनि की जिस भाव पर दृष्टि पड़ती है, उस भाव की प्रबलता में कुछ कमी आ जाती है। अतः इस यात्रा से आण्डवाणी की जन लोकप्रियता में वृद्धि होने के आसार नजर नहीं आ रहे है।

तृतीयेश व द्वाददेश होकर गुरू चतुर्थ भाव में स्थित है। तृतीय भाव से आत्म-विश्वास एंव महत्वाकांक्षाओं की जानकारी मिलती है तथा द्वादेश भाव से लम्बी यात्रा के बारे में विचार किया जाता है। गुरू की सप्तम दृष्टि राज्य भाव पड़ रही है एंव राज्येश शुक्र अपनी सकारात्मक राशि तुला में स्थित है, इसलिए आडवाणी पीएम इन वेंटिग की कुर्सी पर पुन: आसीन होने में कामयाब हो सकते है। चतुर्थेश व एकादशेश मंगल नीच का होकर सप्तम भाव में स्थित है और जिसकी सप्तम दृष्टि प्रथम भाव पर पड़ रही है। जिसके कारण यात्रा के दौरान आडवाणी को ह्रदय से सम्बन्धित कोई दिक्कत होने की आशंका है।

षष्ठेश व भाग्येश बुध उच्च का होकर धर्म भाव में स्थित है। अतः आडवाणी के कुछ धार्मिक वकतव्य चर्चा का विषय बन सकते है। विरोधी आप पर मौखिक वार करेंगे परन्तु निष्फल रहेंगे। बेशक राजनीति सम्भावनाओं का खेल है, परन्तु आडवाणी की यह छठी रथ यात्रा भाजपा की डुबती हुयी नैय्या में तिनका का सहारा जरूर साबित होगी।

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