Navratri 2017: कौन था महिषासुर, मां दुर्गा ने क्यों किया इसका वध?
मैसूर। आदिशक्ति का पर्व नवरात्रि का शुभारंभ हो चुका है। अगले 9 दिनों तक चलने वाले इस पर्व में मां दुर्गा के अलग-अलग रूपों की पूजा होती है। सबको पता है कि मां दुर्गा ने इन दिनों असुर महिषासुर का वध किया था। महिषासुर एक बहुत चालाक दैत्य था, धार्मिक कथाओं में कई जगह उसके व्यक्तित्व को लेकर बहुत कुछ लिखा और कहा गया है।
आइए जानते हैं इस असुर के बारे में विस्तार से...
- हिंदू माइथोलॉजी के मुताबिक एक महिषासुर एक बलवान लेकिन दुष्ट राक्षस था।
- जिसके पिता का नाम रंभ था जो कि असुरों का राजा था।
- रंभ को जल में रहने वाले भैंस से प्रेम हो गया और इन दोनों के योग से महिषासुर का जन्म हुआ।

मिला था वरदान
- संस्कृत में महिष का अर्थ भैंस होता है।
- रंभ की वजह से राक्षस महिषासुर को वरदान मिला था कि वो जब चाहे भैंस बन जाये और जब चाहे मनुष्य।
- महिषासुर बाद में स्वर्ग लोक के देवताओं को परेशान करने लगा और पृथ्वी पर भी उत्पात मचाने लगा।
- उसने स्वर्ग पर एक बार अचानक आक्रमण कर दिया और इंद्र को परास्त कर स्वर्ग पर कब्ज़ा कर लिया तथा सभी देवताओं को वहां से खदेड़ दिया।
- देवगण परेशान होकर त्रिमूर्ति ब्रम्हा, विष्णु और महेश के पास सहायता के लिए पहुंचे।
- सारे देवताओं ने फिर से मिलकर उसे फिर से परास्त करने के लिए युद्ध किया परंतु वे फिर हार गये।
- महिषासुर ने अपनी इस शक्ति से उसने देवताओं को परेशान कर दिया था और धरती-आकाश में उत्पात मचा दिया था जिससे परेशान होकर देवताओं ने ब्रम्हा, विष्णु और महेश से मदद मांगी।
- महिषासुर को वरदान प्राप्त था कि उसे कोई मनुष्य मार नहीं सकता इसलिए ब्रह्मदेव ने आदिशक्ति का सृजन किया और मां दुर्गा को आकार दिया।

स्वर्ग पर कब्ज़ा कर लिया

ब्रम्हा, विष्णु और महेश

मां दुर्गा को आकार दिया

बुराई पर अच्छाई का प्रतीक
देवी दुर्गा ने महिषासुर पर आक्रमण कर उससे नौ दिनों तक युद्ध किया और दसवें दिन उसका वध किया। इसी उपलक्ष्य में हिंदू भक्तगण दस दिनों का त्यौहार दुर्गा पूजा मनाते हैं और दसवें दिन को विजयादशमी के नाम से जाना जाता है। जो बुराई पर अच्छाई का प्रतीक है।












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