नफरती मौलवी को देश से निकालेगा फ्रांस! जानिए यहूदियों के खिलाफ कितना जहर उगलता था इमाम हसन
फ्रांस के गृह मंत्री गेराल्ड डार्मिनिन ने पहले ही चेतावनी दे दी थी कि, अगर कोर्ट से इमाम हसन इक्विउसेन को दोषी नहीं मानती तो वे उसे फ्रांस की धरती से बाहर का रास्ता दिखाने के लिए देश के कानून को बदलने की कोशिश करेंगे।
पेरिस, 31 अगस्त : फ्रांस की शीर्ष प्रशासनिक अदालत (France's top administrative court) ने मोरक्को के इमाम हसन इक्विउसेन (Moroccan imam Hassan Iquioussen) के निष्कासन (निर्वासन, देश निकाला) को हरी झंडी दे दी है। फ्रांस के गृह मंत्री गेराल्ड डार्मिनिन ने बताया कि, इमाम हसन ने यहूदियों के खिलाफ अभद्र भाषा (anti-semitic' speech, Hate speech) का इस्तेमाल किया था, जिसके लिए उन पर कोर्ट की तरफ से कड़ी कार्रवाई की जा रही है। गृह मंत्रालय के वकील पिछले हफ्ते काउंसिल ऑफ स्टेट को बताया था कि, इमाम हसन सालों से यहूदियों के खिलाफ गलत बयानबाजियां की थीं। उन्होंने कई सालों से नफरत की भाषा के सहारे लोगों के बीच एक नफरत की भावना फैलाने का काम किया है। कोर्ट ने इमाम हसन को देश से बाहर का रास्ता दिखा दिया है।

फ्रांस की अदालत ने नफरत की आग फैलाने वाले इमाम पर की सख्त कार्रवाई
लोगों के भीतर नफरती आग फैलाने वाले इमाम हसन के खिलाफ अदालत के फैसले पर फ्रांस के गृह मंत्री ने राज्य परिषद के एक फैसले का हवाला देते हुए ट्विटर पर ट्वीट किया, यह गणतंत्र के लिए एक बड़ी जीत है। बता दें कि, कोर्ट ने नफरत की आग फैलाने वाले इमाम हसन को देश से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। बता दें कि, पूर्व में पेरिस की एक अदालत ने हसन इक्विउसेन के निर्वासन को रोकने का फैसला सुनाया था जिसके बाद, इस मामले को गृह मंत्रालय ने गंभीरता से लिया था। इसके बाद फ्रांस की सर्वोच्च प्रशासनिक अदालत ने पेरिस कोर्ट के पूर्व आदेश को पलटते हुए मंगलवार को इमाम को देश से बाहर निकालने को हरी झंडी दे दी है।

नफरत की बीज बोता था इमाम
खबर के मुताबिक, मोरक्को के इमाम अपनी नफरती भाषण में यहूदी समुदाय और महिलाओं के खिलाफ अभद्र टिप्पणी किया करते थे। जिसके बाद कोर्ट ने इमाम को देश से बाहर का रास्ता दिखाने के लिए पेरिस के एक कोर्ट के फैसले को पलट दिया। 58 साल के इमाम हसन उत्तरी फ्रांस में स्थित अपने घर से YouTube और Facebook की सहायता से दुनिया भर के अपने फॉलोवर्स में यहूदियों के खिलाफ नफरत की आग उगलने का काम करता था। खास कर वह महिलाओं के खिलाफ गलत सोच को समाज के सामने पेश करता था। नफरत की भाषा फैलाकर धर्म की आड़ में रोटी सेंकने वाले इस इमाम का जन्म फ्रांस में हुआ था, लेकिन उसने मोरक्को की नागरिकता भी ले रखी थी।

बचने की काफी कोशिश की, लेकिन बच नहीं पाया इमाम
जब मामला कोर्ट में पहुंचा तो इमाम हसन को निर्वासन से बचाने के लिए उसके वकीलों ने एड़ी चोटी का जोर लगा दिया था। जिसके बाद पेरिस की एक अदालत ने उसके हक में फैसला सुना दिया था। गृह मंत्रालय के वकील पिछले हफ्ते काउंसिल ऑफ स्टेट को बताया था कि, इमाम हसन सालों से यहूदियों के खिलाफ गलत बयानबाजियां की थीं। उसने कई सालों से नफरत की भाषा के सहारे लोगों के बीच एक नफरत की भावना फैलाने का काम किया है। इसके बाद फ्रांस की सर्वोच्च प्रशासनिक अदालत ने इमाम हसन को देश से बाहर का रास्ता दिखाने को हरी झंडी दे दी।

कोर्ट में किसने क्या कहा जानें
लेकिन कोर्ट में जिरह के दौरान इमाम के वकीलों ने उसे बचाने का काफी प्रयास किया। कोर्ट में वकील ने दलील पेश करते हुए यह कहा कि, इमाम हसन का यहूदी, महिला विरोधी भाषणा 20 साल पुराना है और उनके सार्वजनिक बयानों के लिए उस पर कभी भी मुकदमा नहीं चलाया गया था। इमाम के वकील लूसी साइमन ने कोर्ट को बताया कि, इमाम हसन इक्विउसेन एक रूढ़िवादी व्यक्ति हैं लेकिन वे सार्वजनिक व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा नहीं हैं। इस पर फ्रांस के गृह मंत्रालय के प्रतिनिधि ने पलटवार करते हुए कहा कि, इमाम हसन ने जिन शब्दों का इस्तेमाल यहूदियों और महिलाओं के लिए किया वे अलगाववाद और आतंकवाद को बढ़ावा देते हैं।

फ्रांस के गृह मंत्री गेराल्ड डार्मिनिन ने दी थी कानून बदलने की चेतावनी
वहीं, फ्रांस के गृह मंत्री गेराल्ड डार्मिनिन ने पहले ही चेतावनी दे दी थी कि, अगर कोर्ट से इमाम हसन को दोषी नहीं मानती तो वे उसे फ्रांस की धरती से बाहर का रास्ता दिखाने के लिए देश के कानून को बदलने की कोशिश करेंगे।
(Photo Credit: Twitter)












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