Who Is Makhanlal Sarkar: कौन हैं माखनलाल सरकार? जिनके सम्मान में झुके PM मोदी, मंच पर पैर छूकर किया प्रणाम
Who Is Makhanlal Sarkar: पश्चिम बंगाल की सियासी जमीन पर आज एक ऐसा ऐतिहासिक पल आया, जिसने न केवल सत्ता की तस्वीर बदली, बल्कि करोड़ों लोगों के दिलों को भी छू लिया। कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में जब सुवेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री पद की शपथ ले रहे थे, तब मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ऐसी मिसाल पेश की जिसे देख पूरा मैदान तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
पीएम मोदी ने प्रोटोकॉल किनारे कर बीजेपी के सबसे पुराने और वरिष्ठ कार्यकर्ता के पैर छूकर आशीर्वाद लिया और फिर उन्हें गले लगा लिया। आइए जानतें हैं कौन है वो शख्सियत जिनके सामने खुद प्रधानमंत्री नतमस्तक हुए?

मंच पर दिखा 'संस्कार' और 'संघर्ष' का संगम
शपथ ग्रहण के भव्य समारोह के बीच पीएम मोदी ने 98 साल के माखनलाल सरकार का अभिनंदन किया। माखनलाल को मंच पर देखते ही प्रधानमंत्री खुद उनके पास पहुंचे, पूरी विनम्रता के साथ उनके पैर छुए और फिर उन्हें गर्मजोशी से गले लगा लिया। यह केवल एक औपचारिकता नहीं थी, बल्कि यह उस विचारधारा का सम्मान था जिसने बंगाल में बीजेपी की नींव रखी थी।
पूरा जीवन संगठन को किया समर्पित (Who Is Makhanlal Sarkar)
माखनलाल सरकार आज़ादी के बाद के भारत में राष्ट्रवादी आंदोलन से जुड़े उन शुरुआती ज़मीनी स्तर के लोगों में से एक हैं, जिन्होंने अपना पूरा जीवन संगठन को समर्पित कर दिया।
साल 1952: त्याग और बलिदान से भरा माखनलाल का इतिहास
माखनलाल सरकार का इतिहास त्याग और बलिदान से भरा है। साल 1952 में जब कश्मीर में तिरंगा फहराने को लेकर आंदोलन छिड़ा था, तब माखनलाल सरकार जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे थे। उस दौरान उन्हें कश्मीर में गिरफ्तार भी किया गया था। आज जब बंगाल में 15 साल के ममता शासन का अंत हुआ और बीजेपी की पहली सरकार बनी, तो इस जीत का श्रेय पीएम मोदी ने उन पुराने तपस्वियों को दिया, जिन्होंने जेलें सहीं और लाठियां खाईं।
बंगाल में नई शुरुआत: सुवेंदु का 'राजतिलक'
इस भावुक पल के साथ ही बंगाल में बीजेपी युग का औपचारिक आगाज हो गया। भवानीपुर में ममता बनर्जी को पटखनी देने वाले सुवेंदु अधिकारी ने 207 सीटों के प्रचंड बहुमत के साथ मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इस समारोह के साक्षी गृह मंत्री अमित शाह, राजनाथ सिंह, योगी आदित्यनाथ और दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता जैसे दिग्गज बने। अमित शाह ने ही 8 मई को शुभेंदु को विधायक दल का नेता चुना था, जिसके बाद राज्यपाल आर.एन. रवि को समर्थन पत्र सौंपकर नई सरकार का दावा पेश किया गया था।














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