Narottam Mishra Ticket Cancel: मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा में उपचुनाव के लिए बिगुल फूंका जा चुका है और तमाम पार्टियों ने अपने प्रत्याशियों को उतार दिया है। वहीं उपचुनाव का ऐलान होते ही प्रचार की कमान थाम चुके, नामांकन फॉर्म खरीदकर रख चुके और दोबारा अपने सिर विधायकी का ताज सजने का इंतजार कर रहे प्रदेश के पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का बीजेपी ने टिकट ही काटकर मध्य प्रदेश हाउसिंग बोर्ड के चेयरमेन रहे आशुतोष तिवारी मैदान उतार दिया है।
जिसके बाद पूरे दतिया में व्यापक प्रदर्शन हो रहे हैं। उनके चाहने वालों ने पहले बाजार बंद करवाया और अब झांसी जाने वाले नेशनल हाइवे पर भी चक्काजाम कर दिया है। दूसरी तरफ नरोत्तम मिश्रा से हमने बात करने की कोशिश लेकिन उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं आया।
उपचुनाव का ऐलान होते ही और टिकट की खबर आने के पहले नरोत्तम मिश्रा अपनी दावेदारी को पहले से मजबूत करने में लगे थे और ताबड़तोड़ जनसभाओं का आयोजन भी करने में जुट गए थे परंतु इसी बीच भाजपा ने नया दांव खेलकर उनके साथ ही खेला कर दिया। ऐसे में हम आपको वो चार कारण बता रहे हैं जिनकी वजह से नरोत्तम मिश्रा के हाथ निराशा लगी पहला कारण- नरोत्तम मिश्रा की छवि पूरे प्रदेश भर में अड़ियलपन की बनी है जिसकी वजह से पार्टी अब उन्हें टिकट देकर किसी भी प्रकार का रिस्क नहीं लेना चाहती पार्टी को शंका है कि नरोत्तम मिश्रा को टिकट देने की वजह से चुनाव जीतने में काफी कठिनाई होगी। दूसरा कारण- नरोत्तम मिश्रा को टिकट न देने के पीछे सबसे बड़ा कारण यह है कि यदि नरोत्तम मिश्रा चुनाव जीत ही गए तो वह तुरंत कैबिनेट में किसी बड़े मंत्रालय की दावेदारी पेश कर देंगे इसकी वजह से पार्टी को समस्या होगी और ब्राह्मण चेहरा के रूप में राजेंद्र शुक्ला को पहले से ही उपमुख्यमंत्री का पद दिया जा चुका है। तीसरा कारण- हो सकता है कि नरोत्तम मिश्रा को अब पार्टी किनारे लगाने की सोच रही हो और उनका टिकट काटकर आशुतोष तिवारी को प्रत्याशी बनाकर एक बड़ा इशारा दे दिया है। की नरोत्तम मिश्रा के लिए अब रास्ते बंद हो गए हैं। चौथा कारण- नरोत्तम मिश्रा को दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए टिकट इसलिए नहीं दिया गया क्योंकि इस सीट पर पिछले चुनाव में कांग्रेस ने अपनी पकड़ मजबूत करते हुए उनके कोर वोट में सेंधमारी कर दी थी। जिसकी वजह से बीजेपी को दोबारा इस बात का डर है नरोत्तम का कोर वोटर जो अब उनसे छिटक चुका है क्या वो वाकई में वापस आएगा? इसीलिए बीजेपी ये रिस्क लेने से फिलहाल बच रही है और नरोत्तम मिश्रा का टिकट काट दिया है। साल 2018 के विधानसभा चुनाव में जब बीजेपी हार गई तो हार का पूरा ठीकरा तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को ऊपर फोड़ा गया लेकिन वापसी की जिम्मेदारी नरोत्तम मिश्रा को दी गई। इसके बाद सिंधिया की नाराजगी को बीजेपी के लिए मौका बनाकर परोसने में नरोत्तम मिश्रा का बड़ा योगदान रहा। तब कांग्रेस के विधायकों को बातचीत के जरिए बीजेपी में लाने जैसा बड़ा काम भी नरोत्तम मिश्रा के बल बूते पर बीजेपी कर पाई। वहीं जब इनाम देने की बारी आई 2023 के विधानसभा चुनाव में सीएम के तौर पर जो नाम चलते रहे उनमें एक नरोत्तम मिश्रा का भी था। लेकिन चुनाव हारने के कारण उन्हें यह मौका गंवाना पड़ा। इसके अलावा जहां भी उन्हें बीजेपी ने प्रभारी बनाकर भेजा वहां से नरोत्तम बढ़त के साथ ही वापस लौटे। इसके बदले न उन्हें राज्यसभा मिली, न लोकसभा का टिकट और न ही मध्य प्रदेश के बीजेपी अध्यक्ष की कुर्सी। इन्हीं सब कामों की अनदेखी शायद उनके समर्थकों को अब खटक रही है। ऐसे में एक सवाल ये भी है कि क्या नरोत्तम मिश्रा के 36 साल के करियर पूर्ण विराम लगा दिया है? इसका जवाब बीजेपी या फिर आने वाला समय ही दे सकेगा। इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।टिकट के ऐलान के पहले की तस्वीर
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