सर्वाधिक अनाज उत्पादन में यूपी, पंजाब ने मारी बाजी

सम्मान खुद पंजाब के सीएम ने ग्रहण किया। वहीं असम, त्रिपुरा और उड़ीसा को भी दस लाख से एक करोड़ टन के बीच उत्पादन के लिए पुरस्कृत किया गया। प्रधानमंत्री ने धान का कटोरा छत्तीसगढ़ को चावल उत्पादन में अव्वल रहने के लिए पुरस्कार किया तो गेहूं उत्पादन में हरियाणा पुरस्कार पाने में सफल रहा। दलहन उत्पादकता में राजस्थान ने बाजी मारी।
;इस अवसर पर प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने कृषि वैज्ञानिकों को सावधान करते हुए कहा है कि अगले 10 वर्ष में देश को 28 करोड़ टन से ज्यादा अनाज की जरूरत होगी। पिछले साल 24 करोड़ टन प्रोडक्शन हुआ था। इसलिए प्रधानमंत्री ने वैज्ञानिकों को एक हरित क्रांति की जरूरत बताई।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार अनाज की जरूरत बढ़ती जा रही है उसके लिए हमें हर साल उत्पादकता की दर में कम से कम दो फीसदी की बढ़ोतरी करनी होगी। उन्होंने कहा कि वर्ष 1997-98 से लेकर वर्ष 2006-07 के दशक में कृषि उत्पादन की दर काफी कम रही है। हालांकि बाद में इसे ठीक किया गया है।
;सिंचाई, वैज्ञानिक मदद और कीटाणुओं से अनाज का बचाव बड़ी चिंता है। वैज्ञानिक शोध पर फिलहाल कृषि जीडीपी का 0.6 फीसदी खर्च किया जाता है। इसे दो-तीन गुना बढ़ाना होगा। वहीं सिंचाई को 30 फीसदी से बढ़ाकर कम से कम पचास फीसदी लाना होगा। साथ ही यह भी ध्यान रखना होगा कि नए-नए रोगों से अनाज का बचाव हो सके और किसानों की आमदनी में बढ़ोतरी हो। वर्ष 2010-11 में 24.1 करोड़ टन अनाज का उत्पादन हुआ है जो पिछले साल के मुकाबले 23 फीसदी ज्यादा है।
इस अवसर केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार ने कहा कि गेहूं के निर्यात पर पिछले चार साल से लगी रोक हटा ली गई है। हालांकि अभी निर्यात की मात्रा पर फैसला नहीं किया गया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कम कीमत के कारण फिलहाल गेहूं निर्यात शायद ही फायदेमंद साबित हो।












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