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APEDA : गेहूं के रिकॉर्डतोड़ निर्यात का बैकग्राउंड हीरो, अन्य उत्पादों के एक्सपोर्ट का भी जिम्मा, जानिए सबकुछ

गेहूं के रिकॉर्ड एक्सपोर्ट के पीछे APEDA की उल्लेखनीय भूमिका रही है। ऐसे समय में जब सरकार ने गेहूं का एक्सपोर्ट रोक दिया है, एक्सपोर्ट और कुछ वस्तुओं के आयात के मामले में APEDA की भूमिका जानना दिलचस्प है।

नई दिल्ली, 14 मई : भारत गेहूं का निर्यात रिकॉर्ड मात्रा में कर रहा है। भारत में पैदा होने वाले अनाज, फल और सब्जियों को वैश्विक बाजार मिले, इस मकसद से केंद्र सरकार ने कृषि उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा-APEDA) का गठन किया। इस प्राधिकरण के अस्तित्व में आने के बाद भारत रिकॉर्ड मात्रा में गेहूं निर्यात कर रहा है। पहली बार इजिप्ट ने भी भारत से गेहूं आयात करने में रूचि दिखाई है। फिलहाल 74 देशों में भारत का गेहूं खरीदा जाता है। ऐसे में गेहूं एक्सपोर्ट में एपीडा की भूमिका जानना दिलचस्प है। इस रिपोर्ट में जानिए, गेहूं के अलावा एपीडा किन उत्पादों के निर्यात पर काम करता है, क्या हैं इसकी जिम्मेदारियां

कैसे बढ़ा गेहूं का निर्यात

कैसे बढ़ा गेहूं का निर्यात

गेहूं का निर्यात बढ़ने के पीछे कृषि उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा-APEDA) की भूमिका उल्लेखनीय रही है। APEDA की ओर से अलग-अलग देशों में बिजनेस टू बिजनेस (B2B) गतिविधियों का आयोजन किया जाता है। इसके अलावा APEDA कृषि और गेहूं जैसे अनाज के संबंध में प्रदर्शनियों का आयोजन भी कराती है। नए संभावित बाजारों की खोज और भारतीय दूतावासों की सक्रिय भागीदारी के साथ मार्केटिंग के अभियान से भी गेहूं के निर्यात में उछाल दर्ज की गई है। APEDA के अध्यक्ष डॉ. एम अंगमुथु सक्रियता से काम कर रहे हैं।

अनाज निर्यात को बढ़ावा देने का प्रयास

अनाज निर्यात को बढ़ावा देने का प्रयास

APEDA के अध्यक्ष डॉ. एम अंगमुथु (APEDA Chairman Dr. M Angamuthu) के मुताबिक एपीडा की ओर से राज्य सरकारों और निर्यातकों, किसान उत्पादक संगठनों, ट्रांसपोर्टरों जैसे हितधारकों के सहयोग से अनाज निर्यात को बढ़ावा देने के लिए मूल्य श्रृंखला में बुनियादी ढांचा तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक दुनिया भर में गेहूं निर्यात में भारत की हिस्सेदारी एक प्रतिशत से भी कम है। हालांकि, यह मात्रा बढ़ रही है। 2016 में इसका हिस्सा 0.14 प्रतिशत था जो 2020 में बढ़कर 0.54 प्रतिशत हो गया। विश्व के कुल गेहूं उत्पादन का लगभग 13.53 प्रतिशत भारत में पैदा होता है।

किसानों को निर्यात के अवसर

किसानों को निर्यात के अवसर

APEDA भारतीय निर्यातकों की शिपमेंट को सुविधा मुहैया कराने पर भी ध्यान केंद्रित कर रहा है। गेहूं एक्सपोर्ट करने वाले लोगों को नया बाजार मिले, इसके प्रयास भी किए जा रहे हैं। मार्च 2021 में, एपीडा की ओर से वर्चुअल ट्रेड फेयर - 'इंडिया राइस एंड एग्रो कमोडिटी शो' का आयोजन हुआ था। इसमें गेहूं निर्यातकों ने भी भाग लिया था। पिछले दो वर्षों में भारत के दूतावासों, आयातकों, निर्यातकों और उत्पाद संघों के साथ खरीदार-विक्रेता बैठकें वर्चुअल तरीके से हो रही हैं। गेहूं उत्पादन कर रहे किसानों को निर्यात के अवसरों के बारे में बताने के लिए संवेदीकरण कार्यक्रम (sensitization programme) भी आयोजित किया गया था।

220 प्रयोगशालाओं को मिली मान्यता

220 प्रयोगशालाओं को मिली मान्यता

गेहूं समेत अन्य फसलों के निर्यात से पहले इनका सर्टिफिकेशन जरूरी है। ऐसे में निर्यात किए जाने वाले उत्पादों को बिना परेशानी गुणवत्ता प्रमाणन मिल सके, APEDA इस दिशा में भी काम कर रहा है। निर्यातकों को बेहतर परीक्षण सेवाएं मिलें, इसके लिए एपीडा ने पूरे भारत में 220 प्रयोगशालाओं को मान्यता दी है। एपीडा निर्यात परीक्षण और अवशेष निगरानी योजनाओं (residue monitoring plans) के लिए मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं को और मजबूत बनाने पर भी काम कर रहा है। कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए बुनियादी ढांचा विकास, गुणवत्ता सुधार और बाजार विकास की वित्तीय सहायता योजनाओं के तहत भी APEDA से सहायता मिलती है।

कब बना APEDA

कब बना APEDA

कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA-एपीडा) की स्थापना लगभग 37 साल पहले हुई थी। दिसंबर, 1985 में गठित इस प्राधिकरण ने प्रसंस्कृत निर्यात संवर्धन परिषद् (Processed Food Export Promotion Council) का स्थान लिया। APEDA भारत से बाहर अनुसूचित उत्पादों की मार्केटिंग में सुधार लाने पर काम करती है।

APEDA की भूमिका

APEDA की भूमिका

एपीडा के अन्य कार्यों में निर्धारित शुल्क के भुगतान पर अनुसूचित उत्पादों के निर्यातकों के रूप में व्यक्तियों का पंजीकरण करना भी शामिल है। एपीडा के कुछ अन्य प्रमुख काम-

  • उत्पादों के निर्यात के लिए मानक तय करना ।
  • उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से निरीक्षण।
  • एपीडा के निरीक्षण वाली जगहों में बूचड़खानों, प्रोसेसिंग यूनिट्स, भंडारण परिसर, वाहनों जैसे स्थान।
  • अनुसूचित उत्पादों की पैकेजिंग में सुधार लाना ।
  • भारत से बाहर अनुसूचित उत्पादों की मार्केटिंग में सुधार लाना ।
चीनी आयात और बासमती चावल का निर्यात

चीनी आयात और बासमती चावल का निर्यात

एपीडा बासमती चावल के निर्यात से भी जुड़ा है। इसके अतिरिक्त एपीडा को चीनी के आयात की निगरानी करने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। एपीडा निर्यात के लिए 'जैविक उत्पाद' को केवल तभी प्रमाणित करता है जब उन्हें दस्तावेज- "जैविक उत्पादन के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम (एनपीओपी) में निर्धारित मानकों के अनुसार उत्पादित, प्रोसेस और पैक किया गया हो। काजू गिरी, काजू शैल तरल, कार्डानॉल भी एपीडा के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।

APEDA पर किन उत्पादों के एक्सपोर्ट की जिम्मेदारी

APEDA पर किन उत्पादों के एक्सपोर्ट की जिम्मेदारी

एपीडा को अनाज के अलावा भी कई और उत्पादों के निर्यात और संवर्धन की जिम्मेदारी दी गई है। एपीडा फल, सब्जी और इनसे बने उत्पादों को एक्सपोर्ट की जिम्मेदारी भी संभालता है। अन्य उत्पाद-

  • मांस और इससे बने उत्पाद
  • कुक्कुट तथा कुक्कुट उत्पाद
  • डेरी उत्पाद
  • कन्फेक्शनरी, बिस्कुट तथा बेकरी उत्पाद
  • शहद, गुड़ तथा चीनी उत्पाद
  • कोको तथा उसके उत्पाद, सभी प्रकार के चौकलेट
  • मादक तथा गैर मादक पेय
  • अनाज तथा अनाज उत्पाद
  • ग्राउंडनट्स, मूंगफली और अखरोट

अचार, पापड़ और चटनी जैसे उत्पादों के अलावा ग्वार गम, पुष्पकृषि तथा पुष्पकृषि उत्पाद और जड़ी बूटी समेत औषधीय पौधों के निर्यात में भी एपीडा की भूमिका उल्लेखनीय रही है।

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