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GI Tag Rice : भारतीय चावल की 15 किस्में दुनियाभर में हैं मशहूर, जानिए क्या हैं विशेषताएं

भारत के कई चावल ऐसे हैं जो स्वाद और पोषक तत्वों के मामले में विशिष्ट हैं। 15 चावलों को गुण के आधार पर जीआई टैग दिए गए हैं। पढ़िए चावल कि किन किस्मों को मिले हैं जीआई टैग

नई दिल्ली, 02 जून : भारत में किसानों का योगदान कुछ ऐसा है जिसकी वर्णन करना लगभग असंभव है। ऐसा इसलिए क्योंकि अन्नभंडार भरने वाले ये किसान अपने देश के अलावा दूसरे देशों की भूख मिटाने का भी 'भागीरथ यत्न' करते हैं। अन्नदाताओं के इसी पराक्रम के कारण भारत के कई कृषि उत्पाद दुनियाभर में डिमांड में हैं। इन अनाजों की विशेषता भी ऐसी है कि भारत की मिट्टी में पैदा होने के कारण इन चावलों को जीआई टैग (GI Tag Rice) तक दिया जा चुका है। यानी मूल रूप से जीआई टैग वाले ये उत्पाद भारत की किसी राज्य या इलाके की विशेषता हैं। भौगौलिक विशिष्टता वाले इन्हीं उत्पादों में 15 चावल की किस्में हैं। वनइंडिया हिंदी की इस विशेष रिपोर्ट में पढ़िए, भारतीय चावल की किन किस्मों को जीआई टैग दिया गया है, और क्या है इनकी खासियत

'खुशबू की रानी' बासमती दुनिया को भारत का गिफ्ट

'खुशबू की रानी' बासमती दुनिया को भारत का गिफ्ट

बासमती चावल प्राकृतिक रूप से क्यूरेट किए जाते हैं। सुगंध से भरपूर बासमती प्रामाणिक स्वाद परोसने की परंपरा को जीवित रखने के लिए मशहूर हैं। अतिरिक्त लंबे पतले दाने (extra-long slender grains) बासमती की सबसे आसान पहचान हैं। बासमती पकाने पर अपने मूल आकार से कम से कम दो गुना लंबा होता है। पकाने पर नरम, स्वादिष्ट स्वाद, बेहतर सुगंध और वाला बासमती चावल अन्य सुगंधित लंबे चावल की किस्मों के बीच अद्वितीय है। बासमती को 'खुशबू की रानी' भी कहा जाता है, इसका उत्पादन हिमालय की गोद में भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तर में होता है।

बासमती को जीआई टैग पर तकरार
प्राकृतिक रूप से सुगंधित और लंबे दाने वाला बासमती चावल के सबसे श्रेष्ठ गुणों में से एक- इसे स्टार्टर्स, मेन्स या डेसर्ट के रूप में पकाया जा सकना है। यह साधारण भोजन के स्वाद को बेहद लजीज बना सकता है। चावल की इस किस्म के बारे में एक रोचक तथ्य ये भी है कि बासमती 19वीं शताब्दी के शुरुआती दिनों से भारत के उत्तरी भागों की उपजाऊ घाटियों में उगाया जाता रहा है। अनोखे स्वाद और सुगंध के कारण दुनिया भर में बासमती की काफी डिमांड भी है। कुछ मीडिया रिपोर्ट में बासमती को जीआई टैग पर भारत और पाकिस्तान के बीच रस्सा-कस्सी होने की बात भी सामने आई। सितंबर 2021 में आई दी हिंदू बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक ऐसी संभावनाएं बनीं कि भारत को यूरोपीय यूनियन में बासमती बेचने का एक्सक्लूसिव अधिकार मिलेगा।

चावल के दाने छोटे लेकिन खुशबू शानदार

चावल के दाने छोटे लेकिन खुशबू शानदार

केरल के वायनाड में पैदा होने वाली गंधकसल चावल अन्य लोकप्रिय सुगंधित चावल की किस्मों से आकार में छोटा है। बासमती के साथ-साथ वायनाड और केरल में पैदा होने वाली चावल की दूसरी किस्मों से भी गंधकसल के दाने बहुत छोटे होते हैं। गंधकशाला चावल विकसित होने के तरीके, मूल खेती के क्षेत्रों, अनाज के भौतिक-रासायनिक गुणों (physico-chemical properties) और दानों के आकार के कारण बासमती चावल से भिन्न होता है। गंधकसल चावल वायनाड जिले की सबसे लोकप्रिय, पारंपरिक और सुगंधित चावल की खेती कही जाती है। यह सुगंधित (गैर-बासमती) चावल अपनी विशिष्ट सुगंध के लिए प्रसिद्ध है।

गोबिंद भोग चावल स्वदेशी की पहचान

गोबिंद भोग चावल स्वदेशी की पहचान

पश्चिम बंगाल का जीआई टैग वाला चावल 'गोबिंदभोग' स्वदेशी चावल है। इसे खरीफ मौसम के दौरान मध्यम से ऊपरी इलाकों में उगाने के लिए अपनाया गया है। चावल की इस वेराइटी की विशेषता के कारण निचले इलाकों की जमीन में इसकी उपज मुश्किल होती है।

केरल का पोक्कलिक चावल

केरल का पोक्कलिक चावल

केरल के एर्नाकुलम, अलाप्पुझा और त्रिशूर जैसे जिलों में पोक्कली भूभाग पर चावल की ये वेराइटी भरपूर मात्रा में पैदा होती है। पोक्कली के खेतों में उत्पादित चावल को पोक्कली राइस (Pokkali Rice) कहा जाता है। इसका रंग गहरा भूरा होता है।

'धान के कटोरे' से आया जीराफूल चावल

'धान के कटोरे' से आया जीराफूल चावल

छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में पैदा होने वाली चावल की प्राचीन किस्म को जीराफूल नाम दिया गया है। बता दें कि धान उत्पादन में अग्रणी राज्य छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा भी कहा जाता है। एक अनुमान के मुताबिक छत्तीसगढ़ में धान की 20 हजार से अधिक किस्मों की खेती होती है।

नवरा चावल औषधीय गुणों से युक्त

नवरा चावल औषधीय गुणों से युक्त

जीआई टैग युक्त नवरा चावल केरल के नौ जिलों में पैदा होता है। पलक्कड़, मलप्पुरम, कालीकट, वायनाड, कन्नूर, त्रिशूर, एर्नाकुलम, कोट्टायम और अलेप्पी जिलों में उगाया जाने वाला नवरा चावल मेडिसिनल राइस माना जाता है। यानी ये चावल औषधीय गुणों से युक्त है। नवरा राइस दो रंगों में होता है। एक काले भूरे रंग का और दूसरा गोल्डन येलो, लेकिन दोनों सूरत में चावल पर्पल रंग का तैयार होता है।

इस स्वदेशी चावल में भरपूर न्यूट्रिशन

इस स्वदेशी चावल में भरपूर न्यूट्रिशन

पालक्कदन माता चावल (Palakkadan Mata Rice)मोटे मोटे और लाल रंग के होते हैं। चावल अपने अनोखे स्वाद के लिए मशहूर है। लाल फली (pericarp) वाले इस चावल में पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं। भरपूर न्यूट्रिशन से युक्त पालक्कदन माता चावल केरल के पलक्कड़ में पैदा होने वाला स्वदेशी अनाज का है।

पूर्वोत्तर भारत का बोका चावल

पूर्वोत्तर भारत का बोका चावल

बोका चावल या चाउल (Boka chaul) अपनी 'जीरो-कुकिंग' पहचान के कारण स्पेशल है। अन्य प्रकार के चावलों की तरह ही पानी में उबालने या तैयारी के समय दबाव में पकाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। इसका उपयोग हल्का नाश्ता करने में भी किया जाता है। इस्तेमाल के आधार पर असम में चावल की इस वेराइटी को बोका चाउलर जलपान (Jalpan or breakfast of Boka Chaul) के नाम से भी जाना जाता है।

इडली और क्रिस्पी डोसा बनाने वाला चावल

इडली और क्रिस्पी डोसा बनाने वाला चावल

अंबेमोहर चावल पुणे जिले में मावल क्षेत्र की स्पेशल वेराइटी है। चावल की पारंपरिक किस्म अंबेमोहर चावल अपने मीठे स्वाद और सुगंध के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है। अंबेमोहर चावल की खेती मुख्य रूप से पुणे जिले के मावल क्षेत्र में की जाती है। मावल क्षेत्र पुणे के पश्चिम की ओर है। यह पहाड़ी इलाका है और सह्याद्री रेंज/पश्चिमी घाट का हिस्सा है। अंबेमोहर चावल का इस्तेमाल मुलायम इडली और क्रिस्पी डोसा बनाने में भी लिए किया जाता है। चावल के पफ बनाने (मुरमुरे-Murmure) के लिए भी अंबेमोहर का इस्तेमाल किया जाता है। चावल की भूसी का उपयोग तेल निकालने के लिए किया जाता है। मशरूम की खेती में भी अंबेमोहर चावल की भूसी का उपयोग किया जाता है।

कतरनी चावल : कम कैलोरी, भरपूर विटामिन

कतरनी चावल : कम कैलोरी, भरपूर विटामिन

कतरनी चावल कम कैलोरी और वसा के लिए मशहूर है। कतरनी राइस में कुछ विटामिन भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। इसमें फाइबर और कार्बोहाइड्रेट का अच्छा संतुलन होता है। बिहार के चावल कतरनी को जीआई टैग मिलने के बाद इसकी लोकप्रियता और मार्केट डिमांड दोनों बढ़ी है।

असम का जादुई चावल

असम का जादुई चावल

पूर्वोत्तर भारतीय राज्य असम की स्पेशल उपज चोकुवा चावल (Chokuwa rice) असम की अर्ध चिपचिपी सर्दियों (semi glutinous winter) में पैदा होता है। चावल की इस वेराइटी को स्थानीय भाषा में साली चावल (Sali Rice) कहा जाता है। स्थानीय लोगों को मुताबिक चोकुवा चावल अनादि काल से पैदा (Chokuwa cultivation from time immemorial) हो रहा है।

चोकुवा राइस कम एमाइलोज कंटेंट (low amylose content) के लिए जाना जाता है। असम में इसे कोमल चाउल (Komal chaul) भी कहा जाता है। भिगोकर खाना इस चावल का विशेष गुण हैं। अन्य चावलों की किस्मों की तरह इसे पकाने की जरूरत नहीं पड़ती। चावल की इस वेराइटी को दूसरे शब्दों में 'जादुई चावल' (magical rice) भी कहा जाता है।

चावल की इन किस्मों का स्वाद चखा क्या ?

चावल की इन किस्मों का स्वाद चखा क्या ?

इन वेराइटी के अलावा चावल के कुछ अन्य प्रकार भी हैं, जिन्हें ज्योगरॉफिकल इंडिकेशन (Geographical Indications) टैग दिए गए हैं। इनमें केरल का कैपड़ राइस (Kaipad Rice), वायनाड जीराकसाला राइस (Wayanad Jeerakasala Rice) महाराष्ट्र का अजरा घनसाल चावल (Ajara Ghansal Rice), उत्तर प्रदेश का कालानमक चावल (Kalanamak Rice) और पश्चिम बंगाल का तुलाईपांजी राइस (Tulaipanji Rice) शामिल हैं।

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