गुजरात का वो किसान जिसने 10 हजार रुपए से शुरू की शरीफा की खेती, अब हो रहा 10 लाख का मुनाफा
वीरपुर। खेती-किसानी कर मोटा मुनाफा कमाने वालों में गुजरात के कई किसानों का नाम लिया जाता है। यहां प्याज, मूंगफली, टमाटर, खजूर आदि की बड़े पैमाने पर उपज होती है..इसी तरह फल भी खूब होते हैं। यहां मनसुख दुधात्रा वीरपुर के एक ऐसे किसान हैं, जिन्होंने 5 साल पहले सीताफल (जिसे शरीफा कहा जाता है) की खेती शुरू की थी। तब उन्होंने करीब 10 हजार रुपए खर्च किए थे। उसके बाद पिछले 3 से 4 साल में उत्पादन बढ़ाया। अब उनके यहां एक-एक किलो वजनी शरीफा मिल रहे हैं और भारत ही नहीं, अपितु दुबई तक डिमांड है।

गुजरात के किसान का कमाल
मनसुख दुधात्रा के बेटे केतन के मुताबिक, शरीफा की उनके खेत में कई तरह की किस्में उगती हैं। जिनमें जो 1-1 किलो वाले बड़े शरीफा हैं, उसमें देसी शरीफा के मुकाबले कम बीज होते हैं। ऐसे 1 किलो हाइब्रिड शरीफा में 15-20 बीज होते हैं, जबकि देसी शरीफा में 35 से 40 बीज होते हैं। खाने में वो काफी स्वाद भी लगते हैं...इसलिए उसकी डिमांड भी ज्यादा है। बकौल केतन, "अब सालाना 10 लाख रुपए का मुनाफा हो जा रहा है। खासकर मार्केटिंग करने पर अच्छी आमदनी होनी शुरू हुई।"

10 हजार रुपए की लागत से शुरू की बागवानी
मनसुख दुधात्रा ने कहा कि, पहले मैं देसी सीताफल की खेती करता था। जिसमें प्रोडक्शन और कमाई दोनों ही कम होती थी। बाद में हमने हाइब्रिड किस्म की फार्मिंग शुरू की। इसका फायदा यह हुआ कि हमारा प्रोडक्शन बढ़ गया। कई फल तो हमारे एक किलो से भी ज्यादा वजन के निकले।

'मेरे दोनों बेटे यही काम कर रहे'
दुधात्रा बोले, ''तब हमने मार्केटिंग शुरू की। मेरे दोनों बेटे पढ़े-लिखे हैं, वे कहीं नौकरी के लिए नहीं गए। उन्हें इसी काम में लगा लिया। दोनों ने मिलकर मेरे लिए एक नर्सरी भी तैयार की है।''

अब 10 लाख से ज्यादा का हो रहा मुनाफा
फिलहाल मनसुख 10 बीघा जमीन में बागवानी करते हैं और उसमें शरीफा की खेती ज्यादा होती है। उनका कहना है कि वे इसे और बढ़ाने जा रहे हैं। उनके पास शरीफा की देसी और हाइब्रिड समेत कई तरह की वैराइटी हैं। जिसमें से 900 हाइब्रिड किस्म के पेड़ हैं और काफी देशी किस्म वाले भी हैं।
तरह-तरह की किस्मों वाले हैं शरीफा
उनकी बागवानी से हर दिन 35 से 40 किलोग्राम शरीफा निकलता है..और बाजार में 40 रुपए से लेकर 120 रुपए तक प्रति किलो बिक रहा है। उन्होंने कहा कि, देसी शरीफा 2 से 3 दिन तक चलता है। जबकि हाइब्रिड किस्म 10 से 15 दिनों तक सुरक्षित रहती है। अब सर्दियों में तो फल वैसे भी कम ही खराब होते हैं।












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