Black Wheat: नॉर्मल गेहूं से चार गुना महंगा, किसान मालामाल, जानिए वर्धा के किसान की सक्सेस स्टोरी

Black Wheat 70 रुपये किलो बिक रहा है। आम गेहूं से चार गुना महंगा बिकने वाला काले गेहूं का आटा 125 से 130 रुपये प्रति किलो की दर से बिक रहा है।

Black Wheat

Black Wheat Wardha के किसानों की नई पहचान पहनकर उभर रहा है। मौसमी मार से कम प्रभावित होने वाली गेहूं की इस फसल की लोकप्रियता का प्रमुख कारण इसकी अच्छी मार्केट प्राइस है। रिपोर्ट्स के अनुसार काले गेहूं को कम से कम 70 रूपये किलो बेचा जा रहा है। इससे बनने वाला आटा भी 100-120 रूपये प्रतिकिलो से भी अधिक दर से बिकता है। जानिए मराठी किसानों की सक्सेस स्टोरी

दरअसल, भारत के किसान कई बार ऐसी चीजों की खेती करते हैं जो सही मायने में क्रांतिकारी लगती है। Black Wheat यानी काला गेहूं ऐसी ही एक फसल है, जो किसानों को शानदार रिटर्न दे रही है। एक रिपोर्ट के अनुसार महाराष्ट्र में किसान काले गेहूं की खेती कर रहे हैं जो 70 रुपये प्रति किलो की दर से बिक रही है। जानिए क्यों खास है महाराष्ट्र के वर्धा में उगाया जा रहा काला गेहूं

मौसमी मार का असर नहीं!

आम तौर पर खेती किसानी से जुड़े लोगों को मौसम पर निर्भर रहना पड़ता है। अभी बिन मौसम बरसात के कारण करोड़ों रुपये की गेहूं की फसल कई राज्यों में बर्बाद हुई है, किसान मुआवजे की आस लगाए हैं। इसी बीत मौसमी मार को झेलने वाली एक फसल किसानों को अच्छा रिटर्न दे सकती है। कृषि को अधिक लाभदायक बनाने के लिए देश भर के कुछ किसान अलग-अलग फसलों की शुरुआत के साथ नए प्रयोग करने में जरा भी संकोच नहीं करते। महाराष्ट्र के वर्धा में एक किसान ने काले गेहूं का उत्पादन किया। खास बात ये कि इस क्षेत्र में ऐसा करने वाला अकेला किसान बन गया, जिससे लोगों को काफी प्रेरणा भी मिली।

वर्धा में काले गेहूं की खेती के बारे में मीडिया रिपोर्ट के अनुसार किसान राजेश दाफर वर्धा जिले के जलगाँव में रहते हैं। इन्होंने अरवी तालुका के अपने खेतों में पहली बार काले गेहूं की किस्म उगाई। डाफर ने कहा कि उनकी उपज के लिए एक एकड़ जमीन में 40 किलोग्राम बीज बोया गया। इससे बंपर पैदावार हुई। 18 क्विंटल काला गेहूं काटा गया।

काला गेहूं क्या है?

काले गेहूं को उगाने की प्रक्रिया सामान्य गेहूं की तरह ही है। सात साल के शोध के बाद काले गेहूं को राष्ट्रीय कृषि-खाद्य जैव प्रौद्योगिकी संस्थान, मोहाली की कृषि वैज्ञानिक डॉ. मोनिका गर्ग ने विकसित किया है। गेहूं को भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान द्वारा मारू गेहूं नाम दिया गया है जबकि राष्ट्रीय कृषि-खाद्य जैव प्रौद्योगिकी संस्थान (NABI) ने इसे NABI MG नाम दिया है।

क्यों खास है काला गेहूं?

काले गेहूं में फाइबर अधिक होता है और यह कैंसर, मोटापा और मधुमेह जैसी बीमारियों को रोकने में भी उपयोगी है। इसमें पोषक तत्व भी आम गेहूं से ज्यादा होते हैं।साइंस डायरेक्ट जर्नल की एक रिसर्च के अनुसार, पीले गेहूं की तुलना में काले गेहूं में उच्च प्रोटीन, आहार फाइबर, कैल्शियम, विटामिन के, फ्लेवोनोइड और कुल फेनोलिक सामग्री (टीपीसी) होती है और यह एंटीऑक्सीडेंट प्रक्रिया को बढ़ाता है।

गंभीर बीमारियों से बचने का उपाय

Black Wheat हृदय रोग, कैंसर, मधुमेह और मोटापे से बचाता है। शोध में कहा गया है कि यह गेहूं टाइप 2 मधुमेह और ट्यूमर नेक्रोसिस फैक्टर (TNF) -α डाइबिटिज को भी रोकता है।

काले गेहूं का बाजार मूल्य?

काला गेहूं 70 रुपये किलो बिक रहा है जो आम गेहूं से चार गुना महंगा है। काले गेहूं का आटा 125 से 130 रुपये प्रति किलो मिल रहा है। न्यूज 18 की एक रिपोर्ट के अनुसार, जिला कृषि अधिकारी, विद्या मानकर ने बताया कि अरवी तालुका में कुछ किसान गेहूं की इस किस्म की बुवाई कर रहे हैं, लेकिन वे इस किस्म के लिए बीज तैयार नहीं कर पाए हैं। ऐसे में किसानों को बीज बाजार से खरीदना पड़ता है। इस काले गेहूं को बोने के लिए कम क्षेत्र की जरूरत पड़ती है।

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