World Bank से अफगान किसानों को 150 मिलियन डॉलर, खाद्य सुरक्षा चिंता के बीच मिली बड़ी राहत

अफगानिस्तान के किसानों (afghanistan farmers) को वर्ल्ड बैंक की ओर से 150 मिलियन अमेरिकी डॉलर की वित्तीय मदद दी जाएगी। तालिबान शासन में अफगान किसानों के लिए ये राहत भरी घोषणा है। जानिए पूरा मामला

काबुल, 15 जून : युद्ध की विभीषिका झेल रहे रूस और यूक्रेन से बाहर भी कई देश बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। गत 24 फरवरी से शुरू हुई लड़ाई खत्म होने के कोई संकेत नहीं हैं। जिन देशों में रूस और यूक्रेन से खाद्यान इंपोर्ट किया जाता था, इन पर युद्ध का भयानक असर पड़ा है। अफगानिस्तान भी रूस यूक्रेन की जद में आया है। युद्ध के कारण अफगानिस्तान में खाद्यान्न संकट की खबरें सामने आई हैं। इसी बीच समाचार एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक अफगानिस्तान में संकट की गंभीरता भांपते हुए वर्ल्ड बैंक ने मदद के हाथ बढ़ाए हैं।

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अफगानिस्तान में व्यापक मानवीय संकट

दरअसल, वर्ल्ड बैंक की ओर से अफगानिस्तान के किसानों (afghanistan farmers) को 150 मिलियन डॉलर की सहायता राशि दी गई है। अफगानिस्तान की खाद्य सुरक्षा के संबंध में संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) के अनुसार, किसानों को उनके कृषि उत्पादों को बढ़ाने के साथ-साथ बढ़ी हुई असुरक्षा को कम करने के लिए सहायता मुहैया कराई गई है। FAO के मुताबिक अफगानिस्तान में व्यापक मानवीय संकट है। इस दबाव के कारण अफगानों के बीच कई स्तरों पर अत्यधिक खाद्य असुरक्षा को देखते हुए वर्ल्ड बैंक ने 150 मिलियन डॉलर जारी किए हैं।

कई किश्तों में मिलेंगे पैसे

एएनआई ने खामा प्रेस (Khaama Press) की रिपोर्ट के हवाले से कहा, एफएओ के अनुसार, यह विश्व बैंक की सहायता की पहली किश्त है, दूसरी किस्त के साथ, कुल 45 मिलियन अमरीकी डालर, आगामी 24 महीनों के भीतर जारी होने की उम्मीद है।

वर्ल्ड बैंक ने समय पर की मदद

वर्ल्ड बैंक से अफगान किसानों की सहायता को 'उदार और समय पर' किया गया उपाय बताते हुए, FAO ने कहा, यूक्रेन में युद्ध के कारण अफगानिस्तान में खाद्य असुरक्षा बढ़ने पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ा है। एफएओ महानिदेशक क्यू डोंग्यु (QU Dongyu FAO Director General) ने कहा, हम उदार और समय पर की गई मदद के लिए विश्व बैंक और उसके सदस्यों के आभारी हैं। उन्होंने कहा, वर्ल्ड बैंक से आर्थिक मदद अफगानिस्तान में गरीब किसानों के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है।

793 मिलियन डॉलर की परियोजना

गौरतलब है कि अफगानिस्तान पुनर्निर्माण ट्रस्ट कोष (ARTF) और विश्व बैंक की प्रबंधन समिति, अफगानिस्तान में जरूरतमंदों को तत्काल राहत प्रदान करने और स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए 793 मिलियन अमरीकी डॉलर की परियोजना को पहले ही मंजूरी दे चुकी है। एएनआई ने खामा प्रेस के हवाले से कहा, ARTF और वर्ल्ड बैंक ने स्पष्ट किया है कि 150 मिलियन डॉलर की हालिया सहायता राशि तालिबान के नियंत्रण से इतर वितरित की जाएगी।

अफगानिस्तान की स्थिति चिंताजनक क्यों ?

बता दें कि अगस्त, 2021 में अफगान सरकार के पतन और तालिबान की सत्ता में वापसी के बाद से आ रही मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अफगानिस्तान में मानवाधिकारों की स्थिति दयनीय हो गई है। लड़ाई समाप्त होने और अमेरिकी सैनिकों के लौटने के 10 महीनों के बाद भी मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन की खबरें अक्सर आती हैं। खासकर महिलाओं और अल्पसंख्यकों के मानवाधिकारों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। इस्लामी अमीरात अफगानिस्तान (Islamic Emirate of Afghanistan) में महिलाओं पर प्रतिबंध लगाने के कारण आलोचना का सामना भी करना पड़ा है। 2021 को अफगान महिलाओं के लिए सबसे खराब साल बताया गया, क्योंकि तालिबान शासन ने अफगानिस्तान पर नियंत्रण करने के बाद महिलाओं की शिक्षा और काम के अधिकार वापस ले लिए हैं। आलोचना से बेपरवाह तालिबान शासन ने कुछ दिनों बाद अफगान महिलाओं के अधिकारों को अनिश्चितकाल के लिए भी छीन लिया।

महिलाओं पर कठोर प्रतिबंध

फिलहाल, अफगानिस्तान की स्थिति इसलिए भी दयनीय है, क्योंकि तालिबान ने अभिव्यक्ति, एसोसिएशन, सभा और महिलाओं और लड़कियों के समर्थन में आंदोलन की स्वतंत्रता के अधिकारों पर कठोर प्रतिबंध लगाए हैं। इसके कारण अफगानिस्तान में महिलाओं और लड़कियों को मानवाधिकारों के संकट का सामना करना पड़ रहा है। इन लोगों को बिना भेदभाव के शिक्षा, काम, सार्वजनिक भागीदारी और स्वास्थ्य के मौलिक अधिकारों से वंचित रखा गया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अफगानिस्तान की सत्ता में वापसी के 10 महीने के भीतर तालिबान महिलाओं के जीवन के पहलुओं को नियंत्रित करने वाले कई प्रतिबंध थोप चुका है। इस कारण देश में महिलाओं का भविष्य अंधकारमय दिख रहा है।

बच्चा जनने के अधिकारों पर भी कुठाराघात !

महिलाओं को अब तक तक यात्रा करने की अनुमति नहीं है जब तक उनके साथ संबंधी पुरुष न हों। महिलाओं को मेकअप / श्रृंगार से रोका जा रहा है। इसके साथ-साथ प्रजनन से जुड़े उनके अधिकारों से भी वंचित किया जा रहा है।

तालिबान शासित अफगानिस्तान

बता दें कि तालिबान की वापसी के बाद गत 10 महीनों की अवधि के दौरान पिछले कुछ हफ्तों में, अफगानिस्तान में कई बम धमाके भी हुए हैं। घातक विस्फोटों श्रृंखला के कारण विशेष रूप से अल्पसंख्यकों को टारगेट किया गया है। इससे भी अफगानिस्तान के हालात दयनीय हुए हैं। अल्पसंख्यकों की कमजोर सुरक्षा स्थितियों के मद्देनजर संयुक्त राष्ट्र (UN), यूरोपीय संघ (EU), अमेरिका सहित दुनिया भर में निंदा हुई है।

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