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MP News: धीरेंद्र शास्त्री की हिंदू एकता यात्रा पर विवाद, आखिर दामोदर सिंह यादव क्यों कर रहे हैं विरोध? जानिए

MP News: मध्य प्रदेश में धार्मिक एकता के नाम पर चल रही सनातन हिंदू एकता पदयात्रा अब सामाजिक न्याय और संवैधानिक मूल्यों के सवालों से घिरी हुई है। बागेश्वर धाम के प्रमुख आचार्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री द्वारा निकाली जा रही इस यात्रा को दलित-पिछड़ा समाज संगठन (DPSS) के राष्ट्रीय अध्यक्ष दामोदर सिंह यादव ने 'असंवैधानिक' करार देते हुए इसका खुलकर विरोध किया है। दामोदर ने कहा, "धीरेंद्र शास्त्री की कथाओं में एक खास धर्म के प्रति नफरत कही जाती है, जो संविधान की धर्मनिरपेक्षता का उल्लंघन है।"

उन्होंने 16 नवंबर से 'संविधान बचाओ यात्रा' की घोषणा की, जो ग्वालियर से शुरू होकर जबलपुर तक चलेगी। यह विरोध दतिया में पुतला दहन के बाद हिंसा से भड़का, जहां दोनों पक्षों के बीच झड़प हुई। दामोदर ने कहा, "हमें हिंदू विरोधी कह रहे, लेकिन हम संविधान की रक्षा कर रहे।" यह विवाद न केवल शास्त्री की यात्रा पर सवाल खड़े कर रहा है, बल्कि हिंदुत्व, संविधान और सामाजिक न्याय की परिभाषा पर बहस छेड़ रहा है। आइए, जानते हैं इस पूरे विवाद की जड़ - शास्त्री की कथाओं से लेकर दामोदर की बगावत, BJP की प्रतिक्रिया और यात्रा के मकसद तक।

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दामोदर यादव का तर्क

दामोदर यादव का कहना है कि धीरेंद्र शास्त्री इस यात्रा के ज़रिए 'हिंदू राष्ट्र' बनाने की मांग कर रहे हैं, जो कि भारत के संविधान की मूल भावना के खिलाफ है।

यादव ने कहा कि - "भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है। संविधान की प्रस्तावना (Preamble) में 'सेक्युलर' और 'पंथनिरपेक्ष' शब्दों का उपयोग किया गया है। इसका साफ मतलब है कि भारत किसी एक धर्म का देश नहीं, बल्कि सभी धर्मों के लिए समान अधिकार और सम्मान वाला देश है।"

संविधान बनाम हिंदू राष्ट्र की बहस

यादव का मानना है कि अगर किसी एक धर्म के नाम पर राष्ट्र की परिभाषा तय की जाएगी, तो यह संविधान की आत्मा और सामाजिक न्याय की नींव को कमजोर करेगा। इसी वजह से उन्होंने इस यात्रा के खिलाफ 'संविधान बचाओ यात्रा' निकालने का ऐलान किया है, जो 16 नवंबर से ग्वालियर से शुरू होगी।

दलित नेता बोले - 'हिंदू एकता का झूठा नारा'

आचार्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की कथाएं लाखों लोगों को आकर्षित करती हैं, लेकिन दलित-पिछड़े नेताओं का आरोप है कि इनमें एक खास समुदाय के प्रति नफरत भरी जाती है। हाल ही में हरियाणा की एक कथा में शास्त्री ने कहा, "अगर हिंदू नहीं जागे तो 20 साल बाद टोपिया ही टोपिया नजर आएगी।" दामोदर सिंह यादव ने इसे 'इस्लामोफोबिया' का उदाहरण बताते हुए कहा, "यह बयान देश में नफरत का वातावरण पैदा करने का प्रयास है। शास्त्री हिंदू एकता की बात करते हैं, लेकिन उनकी कथाओं में मुस्लिम और ईसाई समुदाय को निशाना बनाया जाता है। यह संविधान की धर्मनिरपेक्षता (सेक्युलरिज्म) का उल्लंघन है, जहां सभी धर्म बराबर हैं।"

दामोदर ने अन्य उदाहरण दिए:

  1. हरियाणा कथा (2025): "टोपिया" बयान - मुस्लिम आबादी को खतरा बताकर हिंदुओं को 'जागने' की चेतावनी।
  2. मध्य प्रदेश कथा (2024): "गैर-हिंदू प्रवेश वर्जित" - यात्रा में बोर्ड लगाए गए, जो समानता के सिद्धांत का विरोध।
  3. दिल्ली कथा (2023): "लव जिहाद" पर जोर, एक समुदाय को टारगेट।

दामोदर ने भोपाल प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "शास्त्री खुद को कथा वाचक कहते हैं, लेकिन नफरत फैला रहे। अगर हम विरोध करें तो हमें हिंदू विरोधी बता दिया जाता है। यह मनुवादी मानसिकता है। दलित-पिछड़े हिंदू हैं, लेकिन हमें अपमान सहना पड़ेगा?" पूर्व विधायक आर.डी. प्रजापति ने समर्थन दिया, "BJP की यात्राएं विभाजन फैला रही हैं। हम संविधान की रक्षा करेंगे।"

'संविधान बचाओ यात्रा' का मकसद

दामोदर सिंह यादव की 'संविधान बचाओ यात्रा' (16 नवंबर 2025 से ग्वालियर) शास्त्री की सनातन हिंदू एकता पदयात्रा (7-16 नवंबर, दिल्ली-वृंदावन) का सीधा जवाब है। दामोदर ने कहा, "यह यात्रा संविधान की मर्यादा, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करेगी। शास्त्री की कथाओं में एक धर्म के प्रति नफरत है, जो पंथनिरपेक्ष राज्य के खिलाफ है। भारतीय संविधान की प्रस्तावना में 'धर्मनिरपेक्ष' शब्द है, जिसका मतलब सभी धर्म बराबर। हिंदू राष्ट्र का मांग असंवैधानिक है।"

यात्रा का प्लान:

रूट: ग्वालियर से दतिया, भिंड, मुरैना, भोपाल, सागर, दमोह, कटनी, जबलपुर (400 किमी, 5 दिन)।
कार्यक्रम: चौपाल, संविधान कथा, अंबेडकर स्मृति। सामाजिक न्याय पर व्याख्यान, दलित-वंचित सम्मान।
मकसद: नफरत भरी कथाओं का पर्दाफाश, संविधान की कसम। "हिंदू एकता नफरत से नहीं, समानता से बनेगी।"

दामोदर ने कहा, "BJP और मनुवादी मानसिकता के लोग हमें हिंदू विरोधी बता रहे, लेकिन हम हिंदू हैं। शास्त्री जैसे लोग हिंदू एकता का झूठा नारा देकर नफरत फैला रहे।" दतिया की झड़प (8 नवंबर) का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, "वह हिंसा BJP की साजिश थी। हम शांतिपूर्ण विरोध करेंगे।"

दतिया झड़प का कनेक्शन: पुतला दहन से हिंसा, यात्रा पर सवाल

दामोदर की बगावत दतिया के इंदरगढ़ की हिंसा से जुड़ी है। 8 नवंबर को भीम आर्मी और ASP कार्यकर्ताओं ने शास्त्री का पुतला दहन किया, तो हिंदू संगठनों ने विरोध किया। पथराव में 3 घायल, पुलिस ने लाठीचार्ज और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। दामोदर ने कहा, "यह BJP की BJP की साजिश थी। हमारा विरोध शांतिपूर्ण था।" शास्त्री ने हरियाणा कथा में जवाब दिया, "हमें छेड़ा गया है तो हम छोड़ेंगे नहीं। सनातन एकता ही जवाब है।"

BJP-शास्त्री समर्थकों की प्रतिक्रिया: 'हिंदू विरोधी स्टंट, BJP का जवाब'

BJP ने दामोदर को 'हिंदू विरोधी' बताया। प्रदेश अध्यक्ष वी.डी. शर्मा ने कहा, "शास्त्री संत हैं, हिंदू एकता की बात करते हैं। दामोदर राजनीतिक स्टंट कर रहे।" सनातन हिंदू संगठन के शिरोमणि सिंह राठौर ने कहा, "शास्त्री जात-पात मिटाते हैं। दामोदर मनुवादी कहकर हिंदुओं को बांट रहे।" शास्त्री ने कहा, "हम सनातन एकता की बात करते हैं। विरोधी हमें बदनाम कर रहे।" BJP ने दामोदर पर 'वोट बैंक पॉलिटिक्स' का आरोप लगाया।

दलित-पिछड़े क्यों मुखर? 'हिंदू एकता' का असली मतलब क्या?

दलित-पिछड़े नेता मुखर हैं क्योंकि शास्त्री की कथाएं उन्हें अपमानित करती हैं। सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा, "हिंदू एकता का मतलब सबको साथ लेकर चलना है, न कि एक समुदाय को टारगेट करना।" संविधान बचाओ यात्रा का

मकसद:

  • नफरत भरी कथाओं का पर्दाफाश।
  • अंबेडकर के संविधान की रक्षा।
  • दलित-पिछड़ों का सम्मान।

मामला अब सिर्फ एक यात्रा का नहीं रहा -यह बहस बन चुका है कि "हिंदू एकता" की परिभाषा कहां तक जायज है, और क्या यह सच में संविधान की मर्यादाओं से बाहर जाती है?

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