कार्तिक पूर्णिमा के बारे में खास बातें

चन्द्रमा पृथ्वी के सबसे अधिक नजदीक है, इसलिए पृथ्वी पर सबसे ज्यादा प्रभाव चन्द्रमा का ही पड़ता है।

Written by: पंं.अनुज के शुक्ल
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पूर्णिमा यानि चन्द्रमा की पूर्णअवस्था। पूर्णिमा के दिन चन्द्रमा ठीक 180 अंश पर होता है। उस दिन चन्द्रमा से जो किरणें निकलती है वह काफी सकारात्मक होती है और वह किरणें सीधे दिमाग पर असर डालती है। चूंकि चन्द्रमा पृथ्वी के सबसे अधिक नजदीक है, इसलिए पृथ्वी पर सबसे ज्यादा प्रभाव चन्द्रमा का ही पड़ता है।

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जिस कारण पूर्णिमा वाले दिन हर मनुष्य को अपनी मानसिक उर्जा में वृद्धि करने के लिए चन्द्र को अर्घ्य देकर स्तुति करनी चाहिए। इस बार 14 नवम्बर को कार्तिक पूर्णिमा पड़ रही है।

क्या करें कार्तिक पूर्णिमा के दिन

भविष्य पुराण के अनुसार वैशाख, माघ और कार्तिक माह की पूर्णिमा स्नान-दान के लिए श्रेष्ठ मानी गई है। इस पूर्णिमा में जातक को नदी या अपने स्नान करने वाले जल में थोड़ा सा गंगा जल मिलाकर स्नान करना चाहिए तत्पश्चात भगवान विष्णु का विधिवत पूजन व अर्चज करना चाहिए।

पूरे दिन उपवास रखकर एक समय भोजन करना चाहिए

इस दिन पूरे दिन उपवास रखकर एक समय भोजन करना चाहिए। अपनी सामर्थ्य अनुसार गाय का दूध, केला, खजूर, नारियल, अमरूद आदि फलों का दान करना चाहिए। ब्राहम्ण, बहन, बुआ आदि को कार्तिक पूर्णिमा के दिन दान करने से अक्षय पुण्य मिलता है।

शाम के समय निम्न मन्त्र से वसंतबान्धव विभो शीतांशो स्वस्ति नः कुरू'' चन्द्रमा को अर्घ्य देना चाहिए।

कैसे करें कार्तिक पूर्णिमा में गंगा स्नान-

कार्तिक पूर्णिमा की स्नान के सम्बन्ध में ऋषि अंगिरा ने लिखा है-इस दिन सबसे पहले हाथ-पैर धो लें फिर आचमन करके हाथ में कुशा लेकर स्नान करें। यदि स्नान में कुश और दान करते समय हाथ में जल व जप करते समय संख्या का संकल्प नहीं किया जाये तो कर्म फलों से सम्पूर्ण पुण्य की प्राप्ति नहीं होती है। दान देते समय जातक हाथ में जल लेकर ही दान करें।

स्नान करने से असीम पुण्य मिलता है

गृहस्थ व्यक्ति को तिल व ऑवले का चूर्ण लगाकर स्नान करने से असीम पुण्य मिलता है। विधवा तथा सन्यासियों को तुलसी के पौधे की जड़ में लगी मिट्टी को लगाकर स्नान करना चाहिए। इस दौरान भगवान विष्णु के ऊं अच्युताय नमः, ऊं केशवाय नमः, ऊॅ अनंताय नमः मन्त्रों का जाप करना चाहिए।

कार्तिक पूर्णिमा को ये उपाय करने से मां लक्ष्मी होगी प्रसन्न

  • पूर्णिमा मां लक्ष्मी को अत्यन्त प्रिय है। इस दिन मॉ लक्ष्मी की आराधना करने से जीवन में खुशियों की कमी नहीं रहती है।
  • पूर्णिमा को प्रातः 5 बजे से 10: 30 मिनट तक मॉ लक्ष्मी का पीपल के वृक्ष पर निवास रहता है। इस दिन जो भी जातक मीठे जल में दूध मिलाकर पीपल के पेड़ पर चढ़ाता है उस पर मां लक्ष्मी प्रसन्न होती है।
  • कार्तिक पूर्णिमा के गरीबों को चावल दान करने से चन्द्र ग्रह शुभ फल देता है।
  • इस शिवलिंग पर कच्चा दूध, शहद व गंगाजल मिलकार चढ़ाने से भगवान शिव प्रसन्न होते है।
  • कार्तिक पूर्णिमा को घर के मुख्यद्वार पर आम के पत्तों से बनाया हुआ तोरण अवश्य बॉधे।
  • वैवाहिक व्यक्ति पूर्णिमा के दिन भूलकर भी अपनी पत्नी या अन्य किसी से शारीरिक सम्बन्ध न बनायें वरना चन्द्रमा के दुष्प्रभाव आपको व्यथित करेंगे।
  • आज के दिन चन्द्रमा के उदय होने के पश्चात खीर में मिश्री व गंगा जल मिलाकर मां लक्ष्मी को भोग लगाकर प्रसाद वितरित करें।

कार्तिक पूर्णिमा का महत्व

  • कार्तिक पूर्णिमा के दिन व्रत, स्नान-दान करने से असीम पुण्य मिलता है। कार्तिक मास की पूर्णिमा का खास महत्व है। यह त्रिपुरी पूर्णिमा व गंगा स्नान नाम से
  • प्रचलित है। क्योंकि आज के दिन ही भगवान शंकर ने त्रिपुरासुर नामक राक्षस का वध किया था। इस दिन भगवना शंकर के दर्शन मात्र से ही पूण्य मिलता है।
  • पुराणों के अनुसार इसी दिन भगवान विष्णु ने प्रलय काल में धर्म, वेदों की रक्षा के लिए एंव सृष्टि की रक्षा के लिए मत्स्य अवतार धारण किया था।
  • अषाढ़ शुक्ल एकादशी से भगवान विष्णु चार मास के लिए योगनिद्रा में लीन होकर कार्तिक एकादशी को पुनः उठते है और पूर्णिमा से संसार के पालन का कार्य करने लगते है। इसी दिन लक्ष्मी की अंशरूपा तुलसी का विवाह शालिग्राम से हुआ था।
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English summary
Kartika Poornima is a Hindu and Jain holy festival, celebrated on the Purnima (full moon) day or the fifteenth lunar day of Kartika (November–December).
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