राजस्थान रॉयल्स की 13,500 करोड़ की डील रुक गई? बॉम्बे हाई कोर्ट में जीत से राज कुंद्रा ने पलटा गेम
Rajasthan Royals: बिजनेसमैन राज कुंद्रा के लिए कानूनी मोर्चे पर एक बड़ी जीत सामने आई है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने राज कुंद्रा को इंग्लैंड और वेल्स के हाई कोर्ट द्वारा जारी एंटी-सूट इंजंक्शन को भारत में चुनौती देने की अनुमति दे दी है। यह पूरा मामला आईपीएल फ्रेंचाइजी राजस्थान रॉयल्स में उनकी 11.7% की विवादित हिस्सेदारी से जुड़ा है।
अदालत के इस फैसले का मतलब है कि अब राज कुंद्रा अपनी हिस्सेदारी और टीम के मैनेजमेंट से जुड़े मुद्दों पर भारतीय कानूनी प्रणाली के तहत अपनी लड़ाई जारी रख सकते हैं। अदालत के फैसले का असर अब डील पर हो सकता है। कोर्ट में पेंच फंस सकता है।

क्या है Rajasthan Royals पूरा मामला?
विवाद की जड़ें राज कुंद्रा की कंपनी 'कूकी इन्वेस्टमेंट्स' और राजस्थान रॉयल्स की पेरेंट कंपनी 'इमर्जिंग मीडिया वेंचर्स' (EMV) के बीच के टकराव में छिपी हैं। दरअसल, जनवरी 2026 में यूके की एक अदालत ने एक आदेश जारी किया था, जिसमें राज कुंद्रा को भारत के नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) में कोई भी कार्यवाही करने या राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ कोई नया कानूनी केस शुरू करने से रोक दिया गया था। राज कुंद्रा ने इस आदेश को भारतीय संप्रभुता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ बताते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख
जस्टिस अभय आहूजा की पीठ ने राज कुंद्रा की दलीलों को स्वीकार करते हुए माना कि इस मामले का एक बड़ा हिस्सा मुंबई से जुड़ा है। राज कुंद्रा मुंबई में रहते हैं और राजस्थान रॉयल्स की भारतीय कंपनी (Royals Multisport Pvt Ltd) का रजिस्टर्ड ऑफिस भी यहीं है। कोर्ट ने कुंद्रा को लीव ग्रांट की है, जिससे वे अब यूके कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ भारत में केस फाइल कर सकते हैं जो उन्हें कानूनी उपाय करने से रोक रहा था। कुंद्रा का आरोप है कि उन्हें उनकी हिस्सेदारी के असली मूल्य से वंचित रखा गया है और टीम के मैनेजमेंट में धांधली की जा रही है।
Rajasthan Royals की सेल पर असर
यह कानूनी घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब राजस्थान रॉयल्स को करीब 15,300 करोड़ रुपये में बेचे जाने की खबरें जोरों पर हैं। राज कुंद्रा की 11.7% हिस्सेदारी पर चल रहा यह विवाद नए खरीदारों के लिए सिरदर्द बन सकता है। अगर भारतीय अदालतें राज कुंद्रा के पक्ष में फैसला सुनाती हैं, तो टीम के मालिकाना हक के ढांचे में बड़े बदलाव करने पड़ सकते हैं। फिलहाल, बॉम्बे हाई कोर्ट के इस फैसले ने इस अरबों की डील के बीच राज कुंद्रा को एक नई लाइफलाइन दे दी है।












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