आस्था, इतिहास और रहस्यों का संगम! 600 साल पुराना है करनी माता का 'चूहों वाला मंदिर', एक बार जरूर करें दर्शन
Karni Mata Temple: अगर आप रोजमर्रा की भीड़-भाड़ से दूर किसी शांत, लेकिन अनोखी जगह की यात्रा की सोच रहे हैं, तो राजस्थान का 'करणी माता मंदिर' आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है।आज पीएम मोदी भी करनी माता के मंदिर पहुंचे हैं। यह मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि एक रहस्यमयी और रोमांच से भरी दुनिया है, जहां हजारों चूहे खुलेआम घूमते हैं और लोग उन्हें पूजा का हिस्सा मानते हैं।
बीकानेर के देशनोक गांव में स्थित यह मंदिर 'चूहों वाला मंदिर' के नाम से भी जाना जाता है। यहां आने वाले श्रद्धालु इन चूहों को प्रसाद खिलाते हैं, उनके बीच बैठते हैं और अगर कोई चूहा उनके ऊपर चढ़ जाए तो उसे माता का आशीर्वाद मानते हैं। यह परंपरा जितनी हैरान करने वाली लगती है, उतनी ही आस्था से भरी हुई भी है।

इस मंदिर की मान्यताएं, इसका इतिहास और यहां की परंपराएं इसे भारत के सबसे अनोखे धार्मिक स्थलों में शामिल करती हैं। तो अगर आप दिल्ली से कुछ अलग देखने और महसूस करने की सोच रहे हैं, तो करणी माता मंदिर की यह यात्रा आपके लिए यादगार साबित हो सकती है।
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दिल्ली से कैसे पहुंचें?
दिल्ली से करणी माता मंदिर की दूरी करीब 450 किलोमीटर है। आप ट्रेन, बस या कार से बीकानेर पहुंच सकते हैं। ट्रेन से सफर में 10-12 घंटे लगते हैं। बीकानेर से देशनोक गांव 30 किलोमीटर दूर है, जहां टैक्सी या लोकल बस से आसानी से पहुंचा जा सकता है।
कितने दिन काफी हैं?
इस यात्रा के लिए 1 से 2 दिन काफी हैं। एक दिन सफर, एक दिन मंदिर दर्शन और आस-पास घूमने के बाद वापसी की जा सकती है।
कितना खर्च आएगा?
खर्च के लिए अनुमानित लागत (राउंड ट्रिप)
- ट्रेन या बस यात्रा ₹1,000 - ₹2,000
- होटल में ठहरना (1-2 रातें) ₹1,000 - ₹2,500
- लोकल ट्रांसपोर्ट ₹300 - ₹500
- भोजन व अन्य खर्च ₹500 - ₹800
- कुल खर्च ₹2,800 - ₹5,800 प्रति व्यक्ति
(नोट: खर्च आपके चयनित होटल और यात्रा के साधन पर निर्भर करेगा)
मंदिर की खासियत
- करणी माता मंदिर को 'चूहों वाला मंदिर' कहा जाता है। यहां करीब 25,000 चूहे खुलेआम घूमते हैं और भक्त इन्हें प्रसाद खिलाते हैं। इन चूहों को 'काबा' कहा जाता है और इन्हें करणी माता के भक्तों का पुनर्जन्म माना जाता है।
- अगर किसी को सफेद चूहा दिखाई दे जाए तो उसे बहुत शुभ माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि सफेद चूहे करणी माता और उनके परिवार के प्रतीक हैं।
- अगर किसी भक्त से गलती से कोई चूहा मर जाए, तो उसे प्रायश्चित के रूप में मंदिर में चांदी का चूहा चढ़ाना होता है।
- मंदिर की वास्तुकला भी बेहद सुंदर और ऐतिहासिक है।
- नवरात्रि के समय यहां विशेष भीड़ और आयोजन होते हैं।
करणी माता से जुड़ी मान्यताएं
- करणी माता को मां दुर्गा का अवतार माना जाता है।
- कहा जाता है कि उन्होंने कई चमत्कार किए और अपने भक्तों की रक्षा की।
- भक्तों का मानना है कि चूहों को प्रसाद खिलाना और अगर कोई चूहा उनके ऊपर चढ़ जाए, तो यह शुभ संकेत होता है।
- इतना ही नहीं, मंदिर में मिलने वाला प्रसाद चूहों का झूठा होता है।
यात्रा का सही समय
राजस्थान में गर्मी ज्यादा होती है, इसलिए अक्टूबर से मार्च तक का समय इस यात्रा के लिए सबसे अच्छा है।
करनी माता मंदिर का 600 साल पुराना इतिहास
राजस्थान के बीकानेर जिले के देशनोक गांव में स्थित करणी माता मंदिर करीब 600 साल पुराना है। यह मंदिर मां करणी को समर्पित है, जिन्हें दुर्गा माता का अवतार माना जाता है। मंदिर की पहचान उसकी अनोखी परंपरा और हजारों चूहों के कारण देश-विदेश में फैल चुकी है।
कौन थीं करणी माता?
करणी माता का जन्म 14वीं सदी में नागौर जिले के सुआ गांव में हुआ था। मान्यताओं के अनुसार उनका असली नाम 'रिद्धुबाई' था। बहुत छोटी उम्र से ही उनमें चमत्कारी शक्तियां दिखने लगी थीं। शादी के बाद भी उन्होंने गृहस्थ जीवन नहीं अपनाया और अपना पूरा जीवन लोगों की सेवा और तपस्या में बिताया। मान्यता है कि वे करीब 150 साल तक जीवित रहीं और उन्होंने कई चमत्कार किए।
मंदिर बनने की शुरुआत
मंदिर का निर्माण 15वीं सदी में शुरू हुआ था। बाद में बीकानेर के शासकों ने मंदिर को और भव्य रूप दिया। मंदिर की बनावट राजस्थानी शैली की है, जिसमें सुंदर संगमरमर और चांदी के दरवाजे लगाए गए हैं। यह मंदिर आज बीकानेर की पहचान बन चुका है।
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